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Rani Lakshmi Bai Quotes: रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर कोट्स से दें श्रद्धांजलि

On: June 17, 2025 6:37 PM
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Rani Lakshmi Bai Quotes: रानी लक्ष्मी बाई के बलिदान दिवस पर कोट्स से दें श्रद्धांजलि
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Rani Lakshmi Bai Quotes Slogans in Hindi: कालजयी रचनाकार सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ” बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी” के केंद्र में रही महान देशभक्त झांसी की रानी लक्ष्मीबाई आज भी देशभक्ति और अमरता का प्रतीक है।

बुंदेलखंड प्रदेश के झांसी अंचल की रानी लक्ष्मी बाई केवल भारत के किसी राजे-रजवाड़े की महारानी भर नहीं थीं। बल्कि, वीरता,शौर्य और स्वाभिमान की ऐसी मिसाल थीं, जो बुंदेलखंड सहित देश और दुनियां में देश प्रेमियों की प्रेरणा और जनमानस के लिए एक किंवदंती बन चुकी हैं। उनकी वीरगाथा झांसी और उसके आसपास के क्षेत्रों के चप्पे चप्पे में आज भी गाई जाती है।

Rani Lakshmi Bai Quotes

दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।

मातृभूमि के लिए झांसी की रानी ने जान गवाई थी,
अरि दल कांप गया रण में, जब लक्ष्मीबाई आई थी।

हर औरत के अंदर है झाँसी की रानी,
कुछ विचित्र थी उनकी कहानी
मातृभूमि के लिए प्राणाहुति देने को ठानी,
अंतिम सांस तक लड़ी थी वो मर्दानी।

रानी लक्ष्मी बाई से जुड़े खास कोट्स

रानी लक्ष्मी बाई लड़ी तो,
उम्र तेईस में स्वर्ग सिधारी
तन मन धन सब कुछ दे डाला,
अंतरमन से कभी ना हारी।

मुर्दों में भी जान डाल दे,
उनकी ऐसी कहानी है
वो कोई और नहीं,
झांसी की रानी हैं

अपने हौसले की एक कहानी बनाना,
हो सके तो खुद को झांसी की रानी बनाना।

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Jhansi Ki Rani Slogans

“मै अपने झांसी का आत्म समर्पण नही होने दूंगी”

‘मैदाने जंग मे मारना है , फिरंगी से नही हारना है’

‘मेरे स्वर्गीय पति ने शान्ति की कला पर अपना ध्यान समर्पित किया’

‘हम सब एक साथ ग्वालियर मे अंग्रेजों पर हमला करेंगे ‘

‘हम स्वयं को तैयार कर रहे है , यह अंग्रेजो से लड़ने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है ‘

‘यह सभी को पता है ये अंग्रेज , सभी धर्म के खिलाफ है ‘

‘यदि युद्ध के मैदान मे हार गये और मारे गए तो निश्चित रूप से मोक्ष प्राप्त करेंगे ‘

‘हम आजादी के लिए लड़ते है अगर कृष्ण के शब्दो मे कहें तो , हम विजयी होंगे तो विजय के फल का आनन्द लेंगे’

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Rani Lakshmi Bai Slogans in English

‘If defeated and killed on the field of battle, we shall surely earn eternal glory and salvation’

‘We fight for independence, In the words of Lord Krishna we will, if we are victorious, enjoy the fruits of victory’

‘I conjure the Hindus in the name of Gunga, Tollsee and Salikram, and the Mahomedans by the name of God and the Koran and entreat them to join us in destroying the English for their mutual welfare’

‘They endeavoured to contaminate the Hindu and Mohamadan religions by the production and circulation of religious books through the medium of missionaries’

‘We are preparing our forces, It is very important to fight the English’

‘My late husband devoted his attention to the art of Peace, and not to keeping up even the semblance of a warlike state’

यहां तक कि उनकी वीरता के मुरीद उनके धुर विरोधी अंग्रेज तक हो गए थे, जिसकी तस्दीक कुछ इतिहासकारों ने भी की है। आज के दिन 18 जून 1858 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। भारतीय स्वाधीनता संग्राम की अमर सेनानी के रूप में उनके बलिदान को आज ही नहीं आने वाले सदियों तक याद किया जाता रहेगा।

महान बलिदानी रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 में बनारस के एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जिन्हें प्यार से मनु बुलाया जाता था। वर्ष1842 में मनु की शादी झांसी के महाराजा गंगाधर राव नेवलेकर से कर दी गई। शादी के बाद ही मनु यानि मणिकर्णिका का नाम लक्ष्मीबाई पड़ा था।

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सन 1851 में उनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तब झांसी के कोने-कोने में आनंद की लहर प्रवाहित हुई। लेकिन चार माह पश्चात उस बालक का निधन हो गया। सारी झांसी शोक सागर में निमग्न हो गई। राजा गंगाधर राव ने अपने जीवनकाल में ही अपने परिवार के बालक दामोदर राव को दत्तक पुत्र मानकर अंगरेजी सरकार को सूचना दे दी थी। परंतु ईस्ट इंडिया कंपनी की सरकार ने दत्तक पुत्र को अस्वीकार कर दिया। इससे राजा गंगाधर राव को तो इतना गहरा धक्का पहुंचा कि वे फिर स्वस्थ न हो सके और 21 नवंबर 1853 को चल बसे।

इसी क्रम में 27 फरवरी 1854 को लार्ड डलहौजी ने गोद की नीति के अंतर्गत दत्तकपुत्र दामोदर राव की गोद अस्वीकृत कर दी और झांसी को अंगरेजी राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी। पोलेटिकल एजेंट की सूचना पाते ही रानी लक्ष्मीबाई के मुख से यह वाक्य प्रस्फुटित हो गया, ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’।

कालांतर में 7 मार्च 1854 को झांसी पर अंग्रेजों का अधिकार हुआ। झांसी की रानी ने अंग्रेजी सरकार द्वारा दी गई पेंशन अस्वीकृत कर दी। इसके बाद रानी नगर के राजमहल में निवास करने लगीं। यहीं से भारत की प्रथम स्वाधीनता क्रांति का बीज प्रस्फुटित हुआ। अंग्रेजों की राज्य लिप्सा की नीति से उत्तरी भारत के नवाब और राजे-महाराजे असंतुष्ट हो गए और सभी में विद्रोह की आग भभक उठी।

रानी लक्ष्मीबाई ने इसको स्वर्ण अवसर माना और क्रांति की ज्वालाओं को अधिक सुलगाया तथा अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह करने की योजना बनाई। फिर क्या था, मुगल सम्राट बहादुर शाह और तात्या टोपे आदि सभी महारानी के इस कार्य में सहयोग देने का प्रयत्न करने लगे।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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