ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Swiggy-Zomato महंगे हो जाएंगे! नया लेबर कोड जेब खाली करेगा

On: November 26, 2025 6:28 PM
Follow Us:
Swiggy-Zomato महंगे हो जाएंगे! नया लेबर कोड जेब खाली करेगा
Join WhatsApp Group

Swiggy-Zomato Gig Economy Labour Codes Impact: अगर तुम रोज ओला-उबर से राइड बुक करते हो या स्विगी-जोमैटो से खाना मंगाते हो, तो सावधान हो जाओ – आने वाले दिनों में बिल थोड़ा भारी पड़ सकता है। 21 नवंबर 2025 से भारत में लागू हुए नए लेबर कोड्स का असर गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म्स जैसे स्विगी, जोमैटो, ओला और उबर पर सीधा पड़ेगा।

कंपनियों को अब सोशल सिक्योरिटी फंड में पैसा डालना होगा, जिससे उनका हर ऑर्डर या राइड का खर्च बढ़ेगा। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट कहती है कि ये एक्स्ट्रा खर्च यूजर्स पर ही आ सकता है। मतलब, फूड डिलीवरी, कैब राइड और क्विक कॉमर्स सब महंगे हो सकते हैं।

Swiggy-Zomato: यूजर्स के लिए सर्विसेज महंगी होंगी

कोटक इक्विटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, नए लेबर कोड्स से स्विगी, जोमैटो, ओला और उबर जैसी कंपनियों की प्रति ऑर्डर लागत बढ़ेगी। सरकार के सोशल सिक्योरिटी फंड में कंपनियों को सालाना टर्नओवर का 1-2% या गिग वर्कर्स को दिए पेमेंट का 5% तक योगदान देना पड़ सकता है।

AI भी नहीं छीन पाएगा आपकी नौकरी, बस अपने अंदर पैदा कर लें ये 5 खूबियां, नई रिपोर्ट में खुलासा
AI भी नहीं छीन पाएगा आपकी नौकरी, बस अपने अंदर पैदा कर लें ये 5 खूबियां, नई रिपोर्ट में खुलासा

अगर 5% की कैप लगी तो फूड डिलीवरी ऑर्डर पर औसतन 3.2 रुपये एक्स्ट्रा और क्विक कॉमर्स पर 2.4 रुपये का बोझ जुड़ जाएगा। रिपोर्ट का अनुमान है कि कंपनियां ये खर्च यूजर्स पर ही डाल देंगी।

प्लेटफॉर्म फीस कैसे बढ़ेगी?

रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां इस लागत को प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर, सर्ज चार्ज लगाकर या डिलीवरी प्राइस में बदलाव करके वसूल सकती हैं। अभी ये प्लेटफॉर्म्स अलग से दुर्घटना बीमा, हेल्थ इंश्योरेंस, इनकम प्रोटेक्शन और मैटरनिटी बेनिफिट्स देते हैं।

अगर सब कुछ एक केंद्रीकृत फंड से हो तो प्रति ऑर्डर एक्स्ट्रा लागत 1-2 रुपये तक कम रह सकती है। फिर भी, कुल खर्च बढ़ना तो तय है यूजर्स को थोड़ा ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं।

WhatsApp Web पर आया ग्रुप वीडियो कॉल का नया फीचर, स्क्रीन शेयर करने के साथ मिलेगा वेटिंग रूम का सपोर्ट
WhatsApp Web पर आया ग्रुप वीडियो कॉल का नया फीचर, स्क्रीन शेयर करने के साथ मिलेगा वेटिंग रूम का सपोर्ट

फॉर्मल स्टाफिंग कंपनियों को होगा फायदा

नए लेबर कोड्स से ऑर्गनाइज्ड स्टाफिंग कंपनियों को फायदा मिलेगा, क्योंकि कंप्लायंस आसान और सेंट्रलाइज्ड हो जाएगा। इससे टीमलीज जैसी कंपनियों की भूमिका मजबूत हो सकती है।

हालांकि, गिग वर्कर्स के अनियमित समय, प्लेटफॉर्म बदलने और मल्टीपल ऐप्स पर काम करने से सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स ट्रैक करना मुश्किल होगा। यहां सरकार का e-Shram डेटाबेस बड़ी भूमिका निभाएगा।

21 नवंबर से लागू हुए लेबर कोड्स

चार नए लेबर कोड्स ने 29 पुराने कानूनों को रिप्लेस करके एक सिंगल सिस्टम बना दिया है। पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को फॉर्मल सोशल सिक्योरिटी में शामिल किया गया।

एआई रोबोट को काम सिखाने के मिल रहे प्रति घंटा 250 रुपये, भारत में शुरू हुआ अनोखा ट्रेंड
एआई रोबोट को काम सिखाने के मिल रहे प्रति घंटा 250 रुपये, भारत में शुरू हुआ अनोखा ट्रेंड

वेजेस कोड के तहत सेंट्रल गवर्नमेंट नेशनल मिनिमम वेज तय करेगी, लेकिन ये गिग वर्कर्स पर लागू होगा या नहीं, ये क्लियर नहीं। कोटक का कहना है कि स्ट्रॉन्ग डिजिटल इंफ्रा और रीयल-टाइम ट्रैकिंग के बिना इन बेनिफिट्स को सब तक पहुंचाना टेढ़ी खीर होगा।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment