मुंबई में रहने वाली तीन साल की बच्ची श्रेया कुमारी सिंह इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इतनी कम उम्र में उसका संतुलित बैटिंग स्टांस, शॉट सिलेक्शन और गेंद पर नियंत्रण देखकर क्रिकेट प्रेमी हैरान हैं। वीडियो में वह कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव और पुल शॉट जैसे क्लासिक शॉट्स सहजता से खेलती नजर आती है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
कौन है श्रेया कुमारी सिंह
श्रेया मूल रूप से उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखती है। फिलहाल वह मुंबई में अपनी बुआ के साथ रहती है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है और उसके पिता छोटी नौकरी करते हैं। तीन बेटियों की जिम्मेदारी के कारण परिवार ने श्रेया की देखभाल की जिम्मेदारी बुआ को सौंपी, ताकि उसे बेहतर माहौल और अवसर मिल सकें।
सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ती पहचान
श्रेया के क्रिकेट वीडियो इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर नियमित रूप से शेयर किए जाते हैं।
इंस्टाग्राम पर 67 हजार से अधिक फॉलोअर्स
अलग यूट्यूब चैनल जहां अभ्यास और मैच जैसे वीडियो डाले जाते हैं
सोशल मीडिया अकाउंट्स को उसके फुफेरे भाई संभालते हैं
वीडियो में उसकी टाइमिंग और बैलेंस देखकर लोग उसे प्यार से जूनियर विराट कोहली कह रहे हैं।
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सिर्फ बैटिंग नहीं, गेंदबाजी में भी दिखा हुनर
एक अन्य वीडियो में श्रेया गेंदबाजी करती नजर आती है। उसका एक्शन स्वाभाविक और नियंत्रित है। आखिरी गेंद पर हल्की स्विंग के साथ गेंद बैटर को चकमा दे जाती है। क्रिकेट कोचों के अनुसार इतनी कम उम्र में हाथ आंख समन्वय और लाइन लेंथ की समझ दुर्लभ मानी जाती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मुंबई के एक जूनियर क्रिकेट कोच के अनुसार
अगर इस उम्र में खेल को दबाव मुक्त रखा जाए और सही तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो यह प्रतिभा आगे चलकर निखर सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में अब कम उम्र में प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने की संस्कृति मजबूत हो रही है।
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यह खबर क्यों अहम है
यह कहानी बताती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती
सही सहयोग और मार्गदर्शन से छोटे शहरों और सामान्य परिवारों के बच्चे भी आगे बढ़ सकते हैं
यह उदाहरण युवा माता पिताओं को बच्चों को खेल से जोड़ने की प्रेरणा देता है
आगे क्या हो सकता है
परिवार की योजना है कि भविष्य में श्रेया को उम्र के अनुसार क्रिकेट अकादमी में दाखिला दिलाया जाए। फिलहाल ध्यान सिर्फ खेल के आनंद और बुनियादी अभ्यास पर रखा गया है। विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि इस उम्र में प्रतियोगिता से ज्यादा खेल भावना जरूरी है।
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श्रेया सिंह की कहानी भारतीय क्रिकेट के भविष्य की एक झलक देती है। कम उम्र, सीमित संसाधन और बड़ा सपना। अगर उसे सही दिशा और समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में वह एक प्रेरणादायक नाम बन सकती है।













