रोहतक, 02 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में मार्च की तपिश के बाद अब अप्रैल महीने में सूरज के तेवर नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह राहत किसानों के लिए आफत बनकर आई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस पूरे महीने मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इसकी मुख्य वजह एक के बाद एक सक्रिय हो रहे 7 पश्चिमी विक्षोभ हैं। इन प्रणालियों के प्रभाव से राज्य में बार-बार धूल भरी आंधी, बादलों की गर्जना और बेमौसम बारिश की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। मार्च के आंकड़ों पर गौर करें तो हरियाणा में पहले ही सामान्य से 19% अधिक बारिश हो चुकी है, जिसमें रोहतक और रेवाड़ी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं। इसके उलट, सिरसा और जींद में बारिश का ग्राफ सबसे नीचे रहा है।
खेतों में बिछी ‘सुनहरी’ फसल, ओलावृष्टि से भारी नुकसान
पिछले दिनों हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने प्रदेश के कृषि बेल्ट में तबाही मचाई है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी गेहूं की बालियां तेज हवाओं के कारण जमीन पर बिछ गई हैं (Lodging)। इससे न केवल दाना काला पड़ने का डर है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और वजन में भी भारी गिरावट आने की आशंका है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, अप्रैल में बार-बार आने वाले इन विक्षोभों के कारण औसत से अधिक बारिश होगी। 2 और 3 अप्रैल को मौसम में पहला बड़ा बदलाव दिखेगा, जिसमें तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश हो सकती है। इसके तुरंत बाद 7 और 8 अप्रैल को दूसरा सिस्टम सक्रिय होगा, जो कटाई के काम में और देरी पैदा करेगा।
किसानों के लिए एडवायजरी
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए ही गेहूं की कटाई का निर्णय लें। कटी हुई सरसों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल या सेफ हाउस का उपयोग करें ताकि मंडियों में पहुंचने से पहले फसल भीगकर खराब न हो। तापमान की बात करें तो दिन का पारा फिलहाल सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे गर्मी का अहसास कम है। हालांकि, हवाओं के रुख में बदलाव के कारण रात के तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में कुछ दिनों के लिए शुष्क मौसम और हल्की गर्मी वापसी कर सकती है, लेकिन तीसरे सप्ताह के अंत में एक बार फिर बारिश का नया दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।
ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए फसल नुकसान की भरपाई के लिए हरियाणा सरकार ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल (e-Kshatipurti Portal) को सक्रिय कर दिया है। यदि आपकी फसल को नुकसान पहुंचा है, तो आप नीचे दी गई प्रक्रिया के अनुसार मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं:
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और पात्रता
आवेदन करने से पहले सुनिश्चित करें कि आपने ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ (MFMB) पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण पहले ही करा लिया हो।
परिवार पहचान पत्र (Family ID)
आधार कार्ड (जो बैंक खाते से लिंक हो)
फसल पंजीकरण संख्या (MFMB ID)
खेत की फोटो: नुकसान का साक्ष्य देने के लिए प्रभावित फसल की स्पष्ट फोटो।
आवेदन करने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
चरण 1: आधिकारिक पोर्टल पर जाएं
सबसे पहले ई-क्षतिपूर्ति की आधिकारिक वेबसाइट ekshatipurti.haryana.gov.in पर जाएं।
चरण 2: लॉगिन करें
पोर्टल पर आपको ‘Farmer Login’ का विकल्प मिलेगा।
आप अपनी Family ID, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या MFMB ID के जरिए लॉगिन कर सकते हैं।
आपके मोबाइल पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज कर वेरिफिकेशन पूरा करें।
चरण 3: फसल और नुकसान का विवरण भरें
लॉगिन करने के बाद आपके द्वारा पंजीकृत फसलों का विवरण दिखाई देगा।
जिस किले/खसरे में नुकसान हुआ है, उसका चयन करें।
नुकसान का कारण (जैसे ओलावृष्टि, भारी बारिश या जलभराव) चुनें।
नुकसान का प्रतिशत: आपको खुद यह बताना होगा कि आपके अनुसार कितने प्रतिशत फसल खराब हुई है (जैसे 25%, 50% या 75-100%)।
चरण 4: फोटो अपलोड और सबमिट
अपने खेत की ताजा फोटो अपलोड करें जहाँ नुकसान स्पष्ट दिख रहा हो।
सभी जानकारी जांचने के बाद ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।
आवेदन के बाद आपको एक एप्लीकेशन नंबर मिलेगा, इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।
मुआवजा मिलने की प्रक्रिया
सरकार ने मुआवजे को 5 श्रेणियों (Slabs) में बांटा है:
0 से 24%: कोई मुआवजा नहीं।
25 से 32%, 33 से 49%, 50 से 74% और 75 से 100%: इन श्रेणियों के आधार पर प्रति एकड़ निर्धारित राशि सीधे आपके बैंक खाते (DBT) में भेजी जाएगी।
महत्वपूर्ण सूचना: आपके द्वारा दर्ज किए गए नुकसान के दावे का सत्यापन (Verification) संबंधित पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार द्वारा किया जाएगा। विशेष गिरदावरी की रिपोर्ट और आपके दावे के मिलान के बाद ही अंतिम मुआवजे की राशि स्वीकृत होगी।
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