चंडीगढ़. हरियाणा के निवासियों को पिछले कुछ दिनों से खिलती धूप ने कड़ाके की सर्दी से थोड़ी राहत दी है। दिन का तापमान बढ़ने से ठंड का अहसास कम हुआ है लेकिन रातें अभी भी ठिठुरन भरी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह राहत बस कुछ पलों की है क्योंकि मौसम एक बार फिर बड़ा यू टर्न लेने वाला है।
मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए प्रदेश के कई जिलों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बारिश का भी दौर शुरू होने वाला है।
दिन गर्म और रातें सर्द
प्रदेश में मौसम का मिजाज काफी मिलाजुला बना हुआ है। दिन में धूप निकलने से अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे लोगों ने स्वेटर और जैकेट का बोझ कम कर दिया है। लेकिन सूरज ढलते ही तापमान तेजी से नीचे गिर रहा है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार सोनीपत जिला प्रदेश में सबसे ठंडा रहा जहां न्यूनतम तापमान 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा भिवानी में 5.1 डिग्री और हिसार में 5.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। यह गिरावट दर्शाती है कि शीत लहर का प्रभाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
पश्चिमी विक्षोभ का डबल अटैक
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार हरियाणा के मौसम में असली बदलाव 22 जनवरी से देखने को मिलेगा। पहाड़ों पर सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर मैदानी इलाकों पर पड़ेगा।
बारिश का पूरा कार्यक्रम:
22 से 24 जनवरी: पहले चरण में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके चलते राज्य के कई इलाकों में आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बूंदाबांदी होने की संभावना है।
25 जनवरी: मौसम विभाग के अनुसार 24 जनवरी की रात को एक और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देगा। इसका असर 25 जनवरी को दिखेगा जब प्रदेश के अधिकतर स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है।
कोहरे का येलो अलर्ट और एडवाइजरी
बारिश से पहले लोगों को घने कोहरे का सामना करना पड़ेगा। वातावरण में नमी बढ़ने के कारण सुबह और शाम के समय विजिबिलिटी काफी कम रह सकती है। मौसम विभाग ने वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। हाईवे पर गाड़ी चलाते समय फॉग लाइट का इस्तेमाल करें और गति सीमा नियंत्रित रखें।
खेती और सेहत पर असर
मौसम में हो रहे इस बदलाव का सीधा असर रबी की फसलों पर पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हल्की बारिश होती है तो यह गेहूं और सरसों की फसल के लिए टॉनिक का काम करेगी। लेकिन अगर बारिश के साथ ओले गिरे या तेज हवा चली तो फसल बिछ सकती है जिससे किसानों को नुकसान हो सकता है। वहीं डॉक्टरों ने भी बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को वायरल फीवर से बचने की सलाह दी है।













