यमुनानगर (Yamunanagar AQI)। तीन-चार दिनों से मौसम में ठंड बढ़ गई थी। परंतु मंगलवार को दिन के समय मौसम गर्म रहा। तेज धूप निकली। हालांकि सुबह-शाम ठंड बरकरार है। सुबह-शाम लोगों को गर्म कपड़ों में देखा जा रहा है। सोमवार की रात बहुत ज्यादा ठंड थी। ठंडी हवाओं की वजह से लोग रात को दोपहिया वाहनों पर ठिठुरते दिखे।
Yamunanagar AQI: न्यूनतम तापमान गिरेगा
जिले का न्यूनतम तापमान 11 डिग्री पर पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह के आखिर तक न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक जा सकता है। शहर की हवा भी अभी तक बेहद खराब स्थिति में चल रही थी। मंगलवार को शहर का एक्यूआई 123 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया।
गत तीन दितों से यह 250 माइक्रोग्राम से ऊपर बना हुआ था। शहर में बढ़ते प्रदूषण का असर सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। प्रदूषण की वजह से लोग गला दर्द की चपेट में आए। साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत हुई। एक्यूआई का स्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली है।
किसान नहीं कर पा रहे बिजाई
उपमंडल के गांव मलिकपुर बांगर की कृषि योग्य जमीन से पानी निकासी का इंतजाम न होने के कारण किसानों की जमीन में पानी जमा है। मलिकपुर के किसान इस जमीन में पानी जमा होने के कारण धान की फसल की बिजाई नहीं कर पाए थे। अब इसी जमीन में पानी जमा होने के कारण गेहूं की फसल की भी बिजाई नहीं हो सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव से सोम नदी मात्र 500 मीटर की दूरी पर है। किसान संदीप शर्मा, सतराम शर्मा, गुरदयाल सिंह सैनी, फूल सिंह सैनी, राजेश टोनी, कुलदीप राणा, हरदीप सिंह, तेजपाल सिंह, अमीरचंद सैनी, सुभाष सैनी, रामपाल सैनी, राजेश सैनी, सोमनाथ सैनी राजीव राणा, चुन्नीलाल,अमन शर्मा, संजीव सैनी आदि ने बताया कि गांव मलिकपुर बांगर में हर वर्ष बरसात के सीजन में बरसाती व आसपास के दर्जनों गांव का पानी उनकी जमीनों में घुस जाता है।
जल्द कराई जाएगी निकासी
एसडीएम व्यासपुर जसपाल सिंह गिल का कहना है कि गांव मलिकपुर बांगर में खेतों में खड़े पानी से निकासी करवाने के लिए प्रयास जारी है। ग्रामीण उनसे मिल चुके हैं। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है। वह पहले ही मौका कर चुके हैं। पानी निकासी के लिए प्रयास जारी है, जल्द ही पानी निकासी का इंतजाम करवाने का प्रयास किया जाएगा।
बरसात का सीजन खत्म होने के बाद भी यह पानी खेतों में ही खड़ा रहता है। जिस जगह से यह पानी गुजरता था उस जगह पर पास के गांव की पंचायत ने जमीन को ऊंचा उठाकर पक्का रास्ता बना दिया है, ऐसे में पानी निकासी बंद हो जाने के कारण बारिश का पानी खेतों में खड़ा हो गया है। प्रशासन कोई नाला, ड्रेन या सीवरेज डलवा दे तो पानी निकासी का इंतजाम हो सकता है औरकिसानों की जमीन बर्बाद होने से बच सकती है।













