Black Pepper farming: South’s boundaries broken! Now black pepper is being cultivated in Haryana, Punjab too, earning in lakhs, know the method of growing it: काली मिर्च की किस्म MDBP-16 (black pepper variety MDBP-16) ने भारतीय किसानों के लिए संभावनाओं का नया दरवाज़ा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के प्रसिद्ध किसान डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने इसे लगभग 30 वर्षों की रिसर्च के बाद विकसित किया। अब देश के 16 राज्यों में इसकी सफल खेती हो रही है, जो काली मिर्च को दक्षिण भारत तक सीमित मानने की सोच को बदलती है।
इस किस्म की खासियत यह है कि एक पौधे से सामान्यतः 1.5-2.5 किलो उत्पादन होता है, लेकिन MDBP-16 से 8-10 किलो (black pepper yield) तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इसकी उच्च गुणवत्ता, जिसमें पाइपरिन का प्रतिशत 16% से अधिक पाया गया, इसे और भी शानदार बनाती है। यह किस्म अब भारत सरकार के कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा पंजीकृत भी हो चुकी है।
जैविक खेती और वर्टिकल फार्मिंग में MDBP-16 की सफलता Black Pepper farming
डॉ. त्रिपाठी का कहना है कि MDBP-16 की सफलता की जड़ें उसकी अनुकूलता में हैं। उन्होंने इसे प्राकृतिक विधियों से और जलवायु के अनुकूल वातावरण में विकसित किया है, जिससे यह किस्म लगभग हर जगह उगाई जा सकती है (pepper cultivation India)। किसान जैविक विधि, वर्टिकल फार्मिंग और समूह आधारित मार्केटिंग को अपनाकर इससे लाखों की कमाई कर सकते हैं (organic farming, vertical farming, pepper marketing)।
कई छोटे किसान, जो बड़े बजट के अभाव में मसाला खेती से दूर रहते थे, अब इस किस्म को अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ICAR और Spice India जैसी संस्थाओं ने इसकी गुणवत्ता और उत्पादन पर रिसर्च करके इसे प्रमाणित किया है। Bastar की धरती पर उगाई गई इस काली मिर्च को “Black Gold” नाम तक दिया गया।
MDBP-16 की उपलब्धता और पंजीकरण की कहानी
MDBP-16 का नाम उस साल के अनुसार रखा गया जब इसे पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किया गया था यानी 2016। हाल ही में भारत सरकार द्वारा इसे प्रमाणित किया गया है। इस प्रक्रिया में ICAR-IISR की रिसर्च टीम ने कई वर्षों तक इसकी उपज और गुणवत्ता की जांच की और अंत में “Black Gold–Culture of Bastar” शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की गई।
डॉ. त्रिपाठी की यह यात्रा संघर्ष, रिसर्च और नवाचार का अद्भुत उदाहरण है। आज किसान इसे अपनाकर कम जमीन में अधिक उत्पादन कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में बड़ा फर्क आया है।












