ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Paddy variety: धान की यह नई किस्म किसानों को करेगी मालामाल, कम पानी में बंपर पैदावार

On: January 31, 2026 9:54 AM
Follow Us:
Paddy variety: धान की यह नई किस्म किसानों को करेगी मालामाल, कम पानी में बंपर पैदावार
Join WhatsApp Group

Paddy variety: धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अक्सर देखा जाता है कि धान की फसल में खरपतवार और पानी की कमी से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई किस्म ‘सीआर धान 807’ विकसित की है।

यह किस्म न केवल कम पानी में तैयार हो जाती है बल्कि इस पर खरपतवार नाशक दवाओं का कोई बुरा असर भी नहीं पड़ता। भारत के छह राज्यों के किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।

इन 6 राज्यों के किसानों की बदलेगी किस्मत

कृषि वैज्ञानिकों ने मशहूर ‘सहभागिधान’ को और बेहतर बनाकर सीआर धान 807 तैयार किया है। इसे विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की जलवायु को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। छोटे और सीमांत किसान जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं, उनके लिए यह किस्म सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगी।

मजदूरों की कमी और खरपतवार का पक्का इलाज

इस नई किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘हर्बिसाइड टॉलरेंट’ होना है। इसका मतलब यह है कि अगर आप खेत में ‘इमाजेथापायर’ जैसी खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करते हैं, तो उससे घास और खरपतवार तो जल जाएंगे लेकिन आपकी धान की फसल पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हाथ से निराई गुड़ाई करने का खर्च बचेगा। आज के दौर में जब मजदूरों की कमी एक बड़ी समस्या है, यह तकनीक खेती की लागत को काफी कम कर देगी।

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, खेतों की मिट्टी जांचने के लिए 2.5 करोड़ की लागत से आएंगी आधुनिक किट

पैदावार का गणित और सूखा सहने की क्षमता

सीआर धान 807 जलवायु परिवर्तन के इस दौर में किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी।

पकने का समय: यह फसल मात्र 110 से 115 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।

पैदावार: सामान्य बारिश होने पर इससे प्रति हेक्टेयर 4.4 टन तक चावल प्राप्त किया जा सकता है।

सूखे में भी दमदार: यदि बारिश कम होती है या सूखा पड़ता है, तब भी यह किस्म 2.8 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उपज देने में सक्षम है।

हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले! 2000 एकड़ में शुरू होगी स्मार्ट खेती, मोरनी ब्लॉक बनेगा राज्य का पहला मॉडल
हरियाणा के किसानों की बल्ले-बल्ले! 2000 एकड़ में शुरू होगी स्मार्ट खेती, मोरनी ब्लॉक बनेगा राज्य का पहला मॉडल

सीधी बुवाई और जीरो टिलेज के लिए वरदान

पारंपरिक रोपाई यानी ट्रांसप्लांटिंग में बहुत पानी और मेहनत लगती है। लेकिन सीआर धान 807 को आप सीधी बुवाई (DSR) तकनीक से उगा सकते हैं। इसके लिए खेत में पानी भरकर कद्दू (Puddling) करने की जरूरत नहीं है। आप इसे जीरो टिलेज यानी बिना जुताई के भी बो सकते हैं। इससे न केवल डीजल का खर्च बचता है बल्कि जमीन की नमी भी बरकरार रहती है। यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है क्योंकि इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है।

बुवाई का सही तरीका और बीज उपचार

अगर आप इस किस्म की खेती करना चाहते हैं तो कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

जमीन की तैयारी: अगर सूखी सीधी बुवाई कर रहे हैं तो रोटावेटर से खेत को समतल कर लें। इसमें प्रति हेक्टेयर 5 टन कंपोस्ट खाद का प्रयोग करें।

बीज की मात्रा: सीधी बुवाई के लिए 35 से 40 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर काफी है।

मुख्यमंत्री भी हुए मुरीद: किसान विक्रमजीत के बाग के सेबों की मिठास ने जीता सबका दिल, देखें तस्वीरें
मुख्यमंत्री भी हुए मुरीद: किसान विक्रमजीत के बाग के सेबों की मिठास ने जीता सबका दिल, देखें तस्वीरें

बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कार्बेंडाजिम (Carbendazim 50 WP) से उपचारित जरूर करें।

बुवाई का समय: खरीफ सीजन यानी मानसून की शुरुआत इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है। कोशिश करें कि बुवाई तब करें जब अगले 3 से 4 दिन भारी बारिश की संभावना न हो।

कृषि वैज्ञानिक इस किस्म को भविष्य की खेती बता रहे हैं। उनका कहना है कि सीआर धान 807 में शुरुआती अवस्था में ही तेजी से बढ़ने की क्षमता है, जिससे यह खरपतवार को पनपने का मौका नहीं देती। साथ ही, यह पोषक तत्वों का भरपूर इस्तेमाल करती है जिससे दाना मजबूत बनता है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment