High Tension Line Compensation: सरकार की नई गाइडलाइन के तहत किसानों को हाईटेंशन लाइन और टावर लगाने पर 200 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा। यह फैसला किसानों की आर्थिक सुरक्षा और भूमि उपयोग से होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करेगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए हाईटेंशन टावर लगाने पर मिलने वाले मुआवजे को दोगुना कर दिया है। नई गाइडलाइन के अनुसार अब किसानों को उनकी जमीन के उपयोग पर 200 प्रतिशत भुगतान मिलेगा। यह फैसला लंबे समय से चली आ रही किसानों की शिकायतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य
किसानों का कहना था कि हाईटेंशन लाइन और टावर उनकी खेती और भूमि मूल्य को प्रभावित करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बहुत कम राशि मिलती है। इसकी वजह से कई बार बिजली परियोजनाएं अटक जाती थीं और किसान नुकसान झेलते थे। सरकार ने अब इस समस्या को गंभीरता से समझते हुए मुआवजा बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया है। इससे किसानों को उचित प्रतिफल मिलेगा और आने वाली परियोजनाओं में तेजी आएगी।
क्या है नई मुआवजा नीति
सरकार का मानना है कि बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए हाईटेंशन लाइन और टावर जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए किसानों को सही भुगतान मिलना भी उतना ही आवश्यक है। नई गाइडलाइन के अनुसार अब किसानों को भूमि के बाजार मूल्य से दोगुना भुगतान किया जाएगा, जिससे भूमि उपयोग से होने वाली आर्थिक क्षति पूरी तरह कवर हो सके।
किसानों की प्रतिक्रिया
नई नीति आने के बाद किसानों में उत्साह और संतोष दोनों हैं। उनका कहना है कि पहले टावर लगने से खेत का मूल्य घटने और खेती प्रभावित होने की चिंता रहती थी। अब 200 प्रतिशत मुआवजे से यह नुकसान आसानी से कवर हो जाएगा और किसान सुरक्षित महसूस करेंगे।
किन चीजों पर मिलेगा मुआवजा
सरकार की नई गाइडलाइन में यह साफ किया गया है कि
• टावर के बेस एरिया पर 200 प्रतिशत भुगतान मिलेगा, जिसमें भूमि मूल्य में कमी और स्थायी उपयोग का आकलन शामिल होगा।
• टावर के आसपास अतिरिक्त 1 मीटर भूमि का भी मुआवजा दिया जाएगा।
• लाइन गुजरने की वजह से प्रभावित कृषि गतिविधियों के लिए विद्युत कंडक्टर के नीचे की भूमि पर 30 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा, जो प्रति मीटर निर्धारित होगा।
मुआवजे की गणना कैसे होगी
मुआवजे की राशि इन मानकों पर तय की जाएगी
• टावर की क्षमता जैसे 132 केवी, 220 केवी, 400 केवी या उससे अधिक
• कलेक्टर की वर्तमान भूमि गाइडलाइन
• भूमि का उपयोग कृषि या अकृषि
• नुकसान की प्रकृति और प्रभावित क्षेत्र
• लाइन की लंबाई और ऊंचाई
इन सभी आधारों पर स्वचालित रूप से राशि तय की जाएगी और DBT के माध्यम से सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी ताकि प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रहे।













