करनाल . हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन हमेशा से आय का मुख्य स्रोत रहा है, लेकिन अब यह एक बड़े कमर्शियल बिजनेस का रूप ले चुका है। केंद्र सरकार ने नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (NLM) के जरिए पशुपालकों की किस्मत बदलने की तैयारी कर ली है। यदि आप 100 से लेकर 500 तक भेड़-बकरी पालने की योजना बना रहे हैं, तो सरकार आपको 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दे रही है। यह पहल खास तौर पर उन युवाओं के लिए है जो खेती के साथ-साथ आधुनिक पशुपालन से जुड़ना चाहते हैं।
यूनिट के हिसाब से सब्सिडी का गणित
सरकार ने सब्सिडी को यूनिट के आधार पर तय किया है ताकि छोटे और बड़े दोनों स्तर के पशुपालकों को लाभ मिल सके। अगर आप 100 बकरी और 5 बकरों के साथ काम शुरू करते हैं, तो 20 लाख के प्रोजेक्ट पर 10 लाख रुपये सब्सिडी मिलेगी। इसी तरह, 200 बकरियों पर 20 लाख और 300 बकरियों पर 30 लाख रुपये की मदद दी जा रही है। जो लोग बड़े स्तर पर 500 बकरी और 25 बकरों का यूनिट लगाएंगे, उन्हें सरकार सीधे 50 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी। यह पैसा सीधे पशुपालक के खाते में प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर भेजा जाता है।
मथुरा में लें ट्रेनिंग और पाएं शुद्ध नस्ल के पशु
बकरी पालन में सफलता के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए मथुरा स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) में ट्रेनिंग की विशेष व्यवस्था है। यहां बरबरी, जमनापरी और जखराना जैसी उन्नत नस्लों पर रिसर्च होती है। संस्थान न केवल ट्रेनिंग देता है, बल्कि पशुपालकों को शुद्ध नस्ल के ब्रीडर बकरे भी उपलब्ध कराता है। कई विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर CIRG अब पीएचडी और पीजी के छात्रों को भी इस क्षेत्र में रिसर्च करवा रहा है, जिससे इस सेक्टर में पेशेवर विशेषज्ञ तैयार हो रहे हैं।
विदेशों से आ रही मीट और दूध की मांग
बाजार में भेड़-बकरी के उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ने का सीधा फायदा सीधे आम किसान को होगा। कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे बकरी के दूध की खपत में उछाल आया है। इसके अलावा, खाड़ी देशों और अन्य विदेशी बाजारों से भारतीय बकरे के मीट की भारी डिमांड आ रही है। वैज्ञानिक तरीके से पालन करने पर पशुओं की मृत्यु दर कम होती है और मुनाफा दोगुना हो जाता है। सरकार का मकसद इन स्कीमों के जरिए पशुपालकों को सीधे ग्लोबल मार्केट से जोड़ना है।
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