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हरियाणा में जड़ी बूटियों की खेती करने वाले किसानों की बदलेगी किस्मत, सीएम सैनी ने तैयार किया यह खास प्लान

On: January 29, 2026 8:48 AM
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हरियाणा में जड़ी बूटियों की खेती करने वाले किसानों की बदलेगी किस्मत, सीएम सैनी ने तैयार किया यह खास प्लान
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डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़ : हरियाणा सीएम नायब सैनी ने औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रवार योजना बनाने को कहा है। सरकार किसानों को मार्केटिंग सपोर्ट देगी और ई औषधि पोर्टल से जोड़ेगी।

हरियाणा में अब पारंपरिक खेती के साथ साथ औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट कर दिया है कि जड़ी बूटियों यानी हर्बल फार्मिंग को राज्य में एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को एक ठोस कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मकसद केवल फसल उगवाना नहीं बल्कि उसे सही दाम पर बिकवाना भी है ताकि किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हो सके।

क्लस्टर बनाकर होगी खेती

हर्बल फेडरेशन के अधिकारियों के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘क्षेत्रवार मैपिंग’ पर जोर दिया। इसका मतलब है कि पूरे हरियाणा में एक ही फसल उगाने के बजाय मिट्टी और जलवायु के हिसाब से फैसले लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि अधिकारी यह पता लगाएं कि किस जिले की मिट्टी में कौन सा औषधीय पौधा सबसे अच्छा उग सकता है। जैसे रेतीली जमीन पर एलोवेरा और उपजाऊ जमीन पर हल्दी। इसके बाद उन इलाकों के किसानों का एक ‘क्लस्टर’ या समूह बनाया जाएगा ताकि वे संगठित होकर खेती कर सकें।

मार्केटिंग की समस्या होगी खत्म

अक्सर देखा जाता है कि किसान औषधीय पौधे उगा तो लेते हैं लेकिन सही बाजार न मिलने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। सीएम सैनी ने इस दर्द को समझा है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही मार्केटिंग का ऐसा सिस्टम तैयार करेगी जिससे किसान अपनी उपज सीधे कंपनियों या बड़े खरीदारों को बेच सकें। बिचौलियों को हटाने से मुनाफे का सीधा हिस्सा किसान की जेब में जाएगा। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव और अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा भी मौजूद थीं जिन्होंने इस रोडमैप पर चर्चा की।

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हर्बल खेती का वर्तमान गणित

हरियाणा में औषधीय खेती का दायरा धीरे धीरे बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में अभी 4557 हेक्टेयर भूमि पर जड़ी बूटियों की खेती हो रही है। इसमें प्रमुख रूप से ये पौधे शामिल हैं:

  • आंवला और एलोवेरा

  • स्टीविया (मिठास के लिए) और मुलेठी

  • शतावरी और तुलसी

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  • अश्वगंधा, हरड़, बेलपत्र और हल्दी

विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद की वैश्विक मांग को देखते हुए अगर हरियाणा के किसान इन फसलों को अपनाते हैं तो वे गेहूं और धान के मुकाबले तीन गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

कृषि मामलों के जानकारों के अनुसार मुख्यमंत्री का यह कदम दूरदर्शी है। औषधीय पौधों की खेती में पानी की खपत कम होती है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। अगर सरकार क्लस्टर अप्रोच के साथ प्रोसेसिंग यूनिट्स यानी प्रसंस्करण इकाइयां भी लगा देती है तो हरियाणा देश का हर्बल हब बन सकता है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि लोगों को शुद्ध आयुर्वेदिक उत्पाद भी मिल सकेंगे।

ई-औषधि पोर्टल बना मददगार

डिजिटल इंडिया की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने ‘ई औषधि पोर्टल’ भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक इस पोर्टल पर 4500 किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि 118 आयुर्वेदिक दवा निर्माता कंपनियां भी इससे जुड़ी हैं। यह पोर्टल एक सेतु की तरह काम कर रहा है जहां दवा कंपनियां सीधे पंजीकृत किसानों से संपर्क कर सकती हैं।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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