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गन्ना किसानों के लिए खजाना है यह वैज्ञानिक विधि, कम लागत में पाएं बंपर पैदावार और डबल मुनाफा

On: January 28, 2026 12:42 PM
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गन्ना किसानों के लिए खजाना है यह वैज्ञानिक विधि, कम लागत में पाएं बंपर पैदावार और डबल मुनाफा
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डिजिटल डेस्क, करनाल : गन्ने की वैज्ञानिक खेती से किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। जानिए बुवाई का सही समय उन्नत किस्में और बीज उपचार के आसान तरीके जिससे मिलेगी बंपर पैदावार।

भारत के किसान अपनी आय बढ़ाने के लिए लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। नकदी फसलों में गन्ने का स्थान सबसे ऊपर आता है लेकिन सही जानकारी के अभाव में कई बार किसान अपनी फसल से पूरा लाभ नहीं ले पाते।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर गन्ने की खेती परंपरागत तरीके के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक विधि से की जाए तो पैदावार को दोगुना किया जा सकता है। इसमें बीज के चुनाव से लेकर कटाई तक का सही प्रबंधन शामिल है जो खेती की लागत घटाकर मुनाफे को बढ़ा देता है।

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उन्नत किस्में और बुवाई का सही समय

गन्ने की बंपर पैदावार के लिए सबसे पहली शर्त है सही समय पर बुवाई और अच्छी किस्म का चयन। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक शरद काल में बुवाई के लिए मध्य सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त है। वहीं बसंतकालीन बुवाई के लिए पूर्वी क्षेत्र में जनवरी से फरवरी और पश्चिमी क्षेत्र में फरवरी से अप्रैल तक का समय सही रहता है।

वैज्ञानिकों ने जलवायु के अनुसार कुछ खास किस्में तैयार की हैं। जल्दी पकने वाली किस्मों में को.शा. 8436 और को. 0238 जैसी प्रजातियां शामिल हैं। वहीं देर से पकने वाली किस्मों में को.शा. 767 और को.पंत 84212 प्रमुख हैं। जल भराव वाले क्षेत्रों के लिए यू.पी. 9530 किस्म को वरदान माना जाता है।

बीज उपचार से फसल को मिलती है सुरक्षा

अक्सर किसान बीज को बिना उपचारित किए खेत में लगा देते हैं जिससे बाद में रोग लगने का खतरा रहता है। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि बुवाई से पहले बीजों को 52 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले गर्म पानी में दो घंटे तक रखना चाहिए। इसके अलावा रासायनिक उपचार के लिए बाविस्टीन का घोल बनाकर उसमें गन्ने के टुकड़ों को डुबोना चाहिए। इससे फसल में फफूंद और अन्य शुरुआती रोग नहीं लगते।

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खाद और सिंचाई का सही गणित

खेत की तैयारी के समय ही उर्वरकों का सही प्रबंधन जरूरी है। बसंतकालीन बुवाई में प्रति हेक्टेयर 180 किलोग्राम और शरदकालीन में 200 किलोग्राम नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है। मिट्टी की जांच के आधार पर फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग करना चाहिए।

सिंचाई के मामले में क्षेत्र का ध्यान रखना जरूरी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में 7 से 8 सिंचाई की जरूरत पड़ती है जबकि पूर्वी क्षेत्रों में 4 से 5 सिंचाई पर्याप्त होती है। गर्मी के मौसम में हर सिंचाई के बाद गुड़ाई करने से नमी बनी रहती है और खरपतवार भी नष्ट हो जाते हैं।

सहफसली खेती से होगी अतिरिक्त कमाई

गन्ने की खेती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके साथ दूसरी फसलें भी आसानी से उगाई जा सकती हैं। इसे इंटरक्रॉपिंग या सहफसली खेती कहते हैं। शरदकालीन गन्ने के साथ किसान गेहूं आलू सरसों और मटर लगा सकते हैं। बसंतकालीन गन्ने के साथ उड़द मूंग और भिंडी की खेती की जा सकती है। यह तकनीक किसानों को एक ही खेत और एक ही समय में दोहरी आय देती है।

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कीट प्रबंधन और मिट्टी चढ़ाना

फसल को गिरने से बचाने और जड़ों को मजबूत करने के लिए जून जुलाई में गन्ने के पौधों पर मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है। दीमक और अंकुर बेधक जैसे कीटों से बचाव के लिए क्लोरपाइरीफास या रीजेन्ट का प्रयोग करना चाहिए। अगर किसान इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं तो निश्चित रूप से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और गन्ने की मिठास उनके मुनाफे में भी घुलेगी।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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