Hing Cultivation in India: Himachal farmer Tog Chand created history, ended dependence on Afghanistan and Iran: भारत में हींग की खेती (Hing Cultivation in India) अब कल्पना नहीं, हकीकत बन चुकी है। हिमाचल प्रदेश के लाहौल घाटी के एक छोटे से गांव सलग्रां के किसान तोग चंद ठाकुर ने देश में पहली बार हींग का सफल उत्पादन कर इतिहास रच दिया है।
भारत लंबे समय से अफगानिस्तान और ईरान से हींग का आयात करता रहा है, लेकिन अब इस निर्भरता से मुक्ति मिलने की उम्मीद बंधी है। सीएसआईआर-आईएचबीटी पालमपुर की पहल के बाद 2019 में लाहौल-स्पीति की जलवायु को हींग उत्पादन के लिए उपयुक्त माना गया, लेकिन अधिकांश प्रयास विफल रहे। ऐसे में तोग चंद ने हिम्मत नहीं हारी और चार साल तक लगातार मेहनत की।
बच्चों की तरह की देखभाल, जून में मिली पहली सफलता Hing Cultivation in India
52 वर्षीय तोग चंद ठाकुर ने हींग के पौधों को बच्चों की तरह पाला। बर्फीली ठंड से बचाते हुए उन्होंने पौधों की देखभाल की, और इस साल जून में उनके खेत में पहली बार हींग के बीज सफलतापूर्वक उगे।
उनकी मेहनत को सराहते हुए सीएसआईआर-आईएचबीटी ने उन्हें सम्मानित किया। यही नहीं, उन्होंने अगली साल 20 अन्य किसानों को (Hing Farming Training India) देने का संकल्प भी लिया है ताकि यह बदलाव सामूहिक हो सके।
सेब से भी ज़्यादा लाभदायक हो सकती है हींग की खेती
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी कृषि में (Asafoetida Farming India) एक नया अध्याय जुड़ गया है। हींग की कीमत भारत में करीब ₹10,000 प्रति किलो है, जो इसे सेब जैसी पारंपरिक फसल से कहीं ज़्यादा लाभकारी बनाती है।
हिमाचली हींग की सुगंध अफगान हींग की तुलना में और भी तीखी बताई जा रही है। किसानों के लिए यह न सिर्फ एक नया अवसर है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी वरदान साबित हो सकता है।













