ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Success Story: 7वीं पास किसान का कमाल, झींगा पालन से कमा रहा 50 लाख, देखें झज्जर की सक्सेस स्टोरी

On: फ़रवरी 17, 2026 6:30 पूर्वाह्न
Follow Us:
Success Story: 7वीं पास किसान का कमाल, झींगा पालन से कमा रहा 50 लाख, देखें झज्जर की सक्सेस स्टोरी (symbolic image by gemini)
Join WhatsApp Group

झज्जर, Jhinga machli palan Success Story Haryana : हरियाणा सरकार की प्रोत्साहन नीतियों का लाभ उठाकर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती की लकीर को मिटा रहे हैं। वे बागवानी, ऑर्गेनिक खेती और मत्स्य पालन में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी झज्जर जिले के गांव पाटौदा के रहने वाले संजय उर्फ सुदामा की है। मात्र 7वीं कक्षा तक पढ़े संजय ने साबित कर दिया है कि सफलता के लिए बड़ी डिग्रियां नहीं, बल्कि नेक इरादे और सही मार्गदर्शन जरूरी है। आज वे अपने गांव में झींगा पालन कर लाखों की कमाई कर रहे हैं।

दक्षिण भारत से बीज, पूरे देश में डिमांड

किसान संजय ने अपने सफर के बारे में बताया कि उन्होंने करीब दस साल पहले एक एकड़ जमीन पर झींगा मछली पालन शुरू किया था। आज उनकी मेहनत से यह दायरा बढ़कर ढाई एकड़ तक पहुंच गया है। वे खारे पानी के झींगा बीज विशेष रूप से विशाखापट्टनम, चेन्नई और पुडुचेरी से मंगवाते हैं। उनके फार्म पर तैयार झींगा की गुणवत्ता इतनी बेहतरीन है कि दिल्ली, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और केरल सहित कई राज्यों में इसकी भारी मांग रहती है।

कम बारिश के बीच करनाल-कुरुक्षेत्र ने कैसे बचाई फसल, जानिए उत्पादन के पूरे आंकड़े | haryana-monsoon-2026-paddy-production-loss-drought-impact-district-wise-report
कम बारिश के बीच करनाल-कुरुक्षेत्र ने कैसे बचाई फसल, जानिए उत्पादन के पूरे आंकड़े

सबसे अच्छी बात यह है कि दूसरे राज्यों के व्यापारी सीधे उनके फार्म पर आकर खरीदारी करते हैं। इससे उन्हें मंडी या बाजार में भागदौड़ करने की जरूरत नहीं पड़ती। संजय बताते हैं कि 1 एकड़ के लिए लगभग 1 लाख रुपये का बीज आता है। आज वे ढाई एकड़ जमीन पर मछली पालन करके 50 लाख रुपये तक का कारोबार कर रहे हैं।

सरकार से मिली गाड़ी और लाखों की मदद

संजय ने बताया कि जिला मत्स्य विभाग ने उनके काम को सराहा है। विभाग की ओर से मछलियों के परिवहन के लिए उन्हें एक छोटा टैंपो वाहन उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, झींगा पालन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए उन्हें करीब 8 लाख रुपये की सब्सिडी भी प्रदान की गई है। संजय ने साल 2016 में हिसार से झींगा पालन की तकनीकी ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद, जोखिम उठाते हुए उन्होंने करीब 5 लाख रुपये का निवेश कर तालाब तैयार किया। शुरुआत चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन लगातार प्रयास से उन्होंने उत्पादन बढ़ाया।

मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल फिर खुला: हरियाणा सरकार ने दोबारा शुरू किया फसल पंजीकरण, जानें प्रक्रिया | meri-fasal-mera-byora-portal-reopens-kharif-registration-haryana-farmers
मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल फिर खुला: हरियाणा सरकार ने दोबारा शुरू किया फसल पंजीकरण, जानें प्रक्रिया

मार्च और जुलाई में डालते हैं बीज

उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि साल में दो बार फसल ली जाती है। पहले मार्च महीने में तालाब में बीज डाला जाता है और अप्रैल में झींगा तैयार हो जाती है। इसके बाद, दूसरा उत्पादन जुलाई से नवंबर तक लिया जाता है। एक कल्चर के दौरान करीब 7 टन झींगा मछली का उत्पादन हो जाता है। हालांकि, इसमें मेहनत और सही देखभाल की बहुत जरूरत होती है। पानी की गुणवत्ता, आहार और समय-समय पर जांच करना बेहद जरूरी है, तभी अच्छा मुनाफा मिल पाता है।

Bhavantar Bharpai Yojana: भावांतर भरपाई योजना की तारीख बढ़ी, अब आलू-गोभी पर मिलेगा पूरा पैसा

रुक-रुककर बारिश से धान को राहत, लीफ फोल्डर का असर काफी कम | yamunanagar-rainfall-paddy-crop-rice-leaf-folder-pest-august-2026
रुक-रुककर बारिश से धान को राहत, लीफ फोल्डर का असर काफी कम

Haryana News Post पर नज़र बनाए रखें।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment