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Livestock care in rainy season: बारिश में मवेशियों को रखें स्वस्थ, बचाएं अपनी कमाई!

On: जून 25, 2025 2:05 अपराह्न
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Livestock care in rainy season: बारिश में मवेशियों को रखें स्वस्थ, बचाएं अपनी कमाई!
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Livestock care in rainy season Keep cattle healthy in the rain, save your income: वर्षा ऋतु में पशुधन देखभाल की बात आते ही किसान भाइयों के कान खड़े हो जाते हैं! बारिश का मौसम जहां खेतों में हरियाली लाता है, वहीं मवेशियों के लिए ढेर सारी चुनौतियां भी ले आता है। गीले शेड, कीचड़, परजीवियों का डर, और चारे की दिक्कत ये सब पशुओं की सेहत और किसानों की कमाई पर भारी पड़ सकता है। लेकिन चिंता न करें! सही देखभाल और वैज्ञानिक तरीकों से आप अपने मवेशियों को स्वस्थ रख सकते हैं। तो चलिए, इस बारिश में अपने पशुओं को बीमारियों से बचाने और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के आसान टिप्स जानते हैं।

Livestock care in rainy season: शेड को रखें सूखा

बारिश में सबसे बड़ी मुसीबत है पशु शेड का गीला होना। छत से रिसता पानी और गीला फर्श न सिर्फ पशुओं को बीमार करता है, बल्कि अमोनिया जैसी गैसों से उनकी आंखों में जलन भी हो सकती है। गीले फर्श पर गंदगी जमा होने से कॉक्सीडियॉसिस और खुर सड़ने जैसी बीमारियां पनपती हैं। इसे रोकने के लिए शेड की छत को वाटरप्रूफ करें। फर्श को ढलान वाला और एंटी-स्लिप बनाएं। सूखा पुआल या जूट की बोरियां बिछाएं, ताकि पशु ठंडी और गीली जमीन से बचे रहें।

चारे और पोषण का खास ध्यान

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वर्षा ऋतु में हरा चारा तो खूब मिलता है, लेकिन उसमें नमी की वजह से पोषण कम होता है। गीला चारा बिना सुखाए खिलाने से पशुओं को दस्त या पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। फफूंद लगे चारे से मायकोटॉक्सिन का खतरा भी रहता है। इसलिए हरे चारे को धूप में सुखाएं और सूखे चारे के साथ मिलाकर खिलाएं। फीड ब्लॉक या यूरिया मोलासेस मिनरल ब्लॉक का इस्तेमाल करें। साफ और गुनगुना पानी पिलाना भी जरूरी है, ताकि पशु दस्त और सर्दी से बचे रहें।

परजीवियों और बीमारियों से सावधान

परजीवियों और बीमारियों से सावधानबारिश में परजीवी और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ जाता है। फीताकृमि जैसे आंतरिक परजीवी हरे चारे के साथ पशुओं में घुस सकते हैं, जबकि किलनी, मक्खियां, और जूं थीलिरियोसिस जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाती हैं। इसे रोकने के लिए मौसम की शुरुआत, मध्य, और अंत में कृमिनाशन करें। कीटनाशक छिड़काव भी जरूरी है। दूध देने वाले पशुओं में थनैला (थन की सूजन) का खतरा रहता है, इसलिए शेड की सफाई और थनों की नियमित जांच करें। बछड़ों और बकरियों को PPR, एंटरोटॉक्सिमिया, और खुर सड़न से बचाने के लिए टीकाकरण करवाएं।

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बछड़ों और बकरियों की अतिरिक्त देखभाल

वर्षा ऋतु में बछड़े और बकरी सबसे नाजुक होते हैं। बछड़ों को बारिश में बाहर न निकालें। उन्हें गर्म बिछावन और ज्यादा दूध दें। तीन महीने से बड़े बछड़ों को कृमिनाशक और छह महीने से ऊपर वालों को ब्लैक क्वार्टर और हेमरेजिक सेप्टिसीमिया का टीका लगवाएं। बकरियों के खुरों को हफ्ते में दो बार चूने या पोटाश के पानी से साफ करें। इन छोटी-छोटी बातों से आप अपने पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक रख सकते हैं।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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