नई दिल्ली. उत्तर भारत में आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए जनवरी का महीना किसी परीक्षा से कम नहीं होता। यह वह समय है जब पेड़ों के भीतर एक प्राकृतिक बदलाव हो रहा होता है। पेड़ यह निर्णय ले रहा होता है कि उसे नई कोपलें (पत्तियां) निकालनी हैं या फल देने वाला मंजर (बौर) बनाना है।
पूसा स्थित राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस के सिंह ने किसानों को आगाह किया है कि इस नाजुक समय में थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है।
सबसे बड़ी गलती जो किसान करते हैं
अक्सर देखा जाता है कि किसान पेड़ों की अच्छी बढ़त के लिए दिसंबर और जनवरी में नाइट्रोजन वाली खाद डाल देते हैं या अधिक सिंचाई कर देते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह इस समय की सबसे बड़ी गलती है।
अधिक नमी और नाइट्रोजन मिलने पर पेड़ ‘वानस्पतिक वृद्धि’ की ओर चला जाता है। नतीजा यह होता है कि पेड़ पर मंजर की जगह सिर्फ नई पत्तियां निकल आती हैं और उस साल फल नहीं लगते। इसलिए इस समय सिंचाई पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है।
पोटेशियम नाइट्रेट का जादुई असर
पेड़ को फल देने की दिशा में मोड़ने के लिए उसे विशेष पोषण की जरूरत होती है। डॉ सिंह के मुताबिक आम के पेड़ों पर पोटेशियम नाइट्रेट (1 प्रतिशत) का छिड़काव करना बेहद फायदेमंद होता है। यह रसायन पेड़ को संकेत देता है कि अब पत्तियां नहीं बल्कि फूल निकालने का समय है।
इसके अलावा पैक्लोब्यूट्राजोल नामक दवा का इस्तेमाल भी जनवरी के पहले पखवाड़े तक मिट्टी में कर देना चाहिए। यह पेड़ की अनावश्यक बढ़त को रोकता है और मंजर निकलने में मदद करता है।
काला होकर झड़ सकता है पूरा मंजर
जनवरी की सर्दी और कोहरा आम के मंजर का सबसे बड़ा दुश्मन है। इस मौसम में ‘पाउडरी मिल्ड्यू’ नामक सफेद फफूंद और ‘भुनगा कीट’ का हमला सबसे ज्यादा होता है। यह बीमारी पूरे मंजर को काला करके सुखा देती है।
बचाव का तरीका: जैसे ही मंजर निकलना शुरू हो सुरक्षा के तौर पर हेक्साकोनाजोल या डाइफेनोकोनाजोल जैसे फफूंदनाशक का छिड़काव करें। कीड़ों से बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड का इस्तेमाल करें। याद रखें कि बीमारी लगने के बाद इलाज करने से बेहतर है कि पहले ही सुरक्षा कवच तैयार कर लिया जाए।
फलों को झड़ने से रोकेगा बोरॉन
कई बार मंजर तो खूब आता है लेकिन फल मटर के दाने जितने होकर गिरने लगते हैं। यह समस्या ‘बोरॉन’ और ‘जिंक’ की कमी से होती है। बोरॉन परागण (Pollination) में मदद करता है। इसलिए मंजर आने के समय 0.2 प्रतिशत बोरॉन और जिंक सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए। इससे फल डंठल से मजबूती से चिपके रहते हैं और उनका आकार भी अच्छा होता है।
छिड़काव का सही समय और तरीका
दवा का असर तभी होगा जब उसे सही समय पर डाला जाए। वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि कड़ाके की ठंड और पाले के दौरान स्प्रे करने से बचें। छिड़काव हमेशा साफ मौसम में करना चाहिए।
सुबह 10 बजे के बाद जब धूप निकल आए या दोपहर 3 बजे के बाद का समय सबसे उपयुक्त होता है। सही तकनीक और समय पर की गई देखभाल ही इस बार आपको आम की बंपर पैदावार दिला सकती है।













