Organic Farming: Magic of organic farming: These 5 easy tips will increase profits and reduce costs!: नई दिल्ली: जैविक खेती आज की जरूरत बन चुकी है। यह न सिर्फ पर्यावरण को बचाती है, बल्कि किसानों की लागत कम कर मुनाफा भी बढ़ाती है।
पंचगव्य, जीवामृत, नीम घोल जैसे घरेलू उपायों से कीट नियंत्रण, मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है। ये तरीके सस्ते, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हैं। आइए, जानते हैं जैविक खेती की इन तकनीकों के बारे में, जो टिकाऊ कृषि की ओर एक बड़ा कदम हैं।
जैविक खेती का महत्व Organic Farming
जैविक खेती पर्यावरण, उत्पादकता और सामाजिक समानता को संतुलित करती है। यह हमारी ग्रामीण जीवनशैली का हिस्सा है।
रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के बेतहाशा इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और फल, सब्जियां व अनाज की क्वालिटी भी घट रही है। ऐसे में जैविक खेती ही समाधान है। खेत पर ही जैविक आदान तैयार करने से लागत कम होती है और गुणवत्तापूर्ण फसल मिलती है।
पंचगव्य: फसलों का टॉनिक
पंचगव्य गाय के पांच उत्पादों—गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी से बनता है। इसे 5:3:2:2:1 के अनुपात में मिलाया जाता है। इसमें 5 किलो ताजा गोबर, 3 लीटर गोमूत्र, 2 लीटर दूध, 2 किलो दही, 1 किलो घी, 600 ग्राम गुड़, 3 लीटर नारियल पानी और 12 पके केले मिलाएं।
गोबर और घी को तीन दिन तक दिन में तीन बार हिलाएं। चौथे दिन बाकी सामग्री मिलाकर 15 दिन तक दिन में दो बार हिलाएं। 500 ग्राम गुड़ और 100 ग्राम बेकर्स यीस्ट को गर्म पानी में मिलाकर घोल में डालें। 30 दिन में पंचगव्य तैयार हो जाता है। इसे 6 महीने तक रखा जा सकता है। 3% घोल को 20 लीटर प्रति एकड़ की दर से सिंचाई में या नर्सरी बेड की ड्रेचिंग के लिए इस्तेमाल करें। यह फसलों को बढ़ाता है और कीट-रोगों से बचाता है।
मटका खाद: मिट्टी की ताकत
15 किलो ताजा गोबर, 15 लीटर गोमूत्र और 15 लीटर पानी को मटके में मिलाएं। इसमें 250 ग्राम गुड़ डालकर मटके को कपड़े या टाट से ढक दें।
8 दिन बाद इस घोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ खेत में छिड़कें। बुवाई के 15 दिन बाद पहला छिड़काव करें, फिर 7 दिन बाद दूसरा। सामान्य फसलों में 3-4 बार और लंबी अवधि की फसलों में 8-9 बार छिड़काव करें। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
गोमूत्र और नीम घोल: कीटों का काल
1 लीटर गोमूत्र को 20 लीटर पानी में मिलाकर पत्तों पर छिड़काव करें। यह कीटों और रोगों से बचाता है। नीम घोल के लिए 5 किलो नीम की पत्तियां, 5 लीटर गोमूत्र और 2 किलो गोबर मिलाकर दो दिन तक सड़ने दें।
इसे 100 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ में छिड़कें। यह चूसने वाले कीटों और नीली बग को नियंत्रित करता है।
तीखा सत: प्राकृतिक कीटनाशक
500 ग्राम हरी मिर्च, 500 ग्राम लहसुन, 1 किलो धतूरा पत्तियां और 500 ग्राम नीम पत्तियों को 10 लीटर गोमूत्र में उबालें, जब तक मात्रा आधी न हो जाए। इसे छानकर 2-3 लीटर सत को 10 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ में छिड़कें। यह पत्ती लपेटक, तना और फल छेदक कीटों को रोकता है।
जीवामृत: मिट्टी का पोषण
10 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 1 किलो चने/उड़द का आटा और 1 किलो जीवंत मृदा को 200 लीटर पानी में मिलाकर 7 दिन तक सड़ने दें। दिन में तीन बार हिलाएं। इसे 1 एकड़ में सिंचाई के साथ इस्तेमाल करें। यह मिट्टी की उर्वरता और फसल वृद्धि बढ़ाता है।












