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Haryana: हरियाणा में बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें: मंडियों में भीगा गेहूं, तिरपाल बना सहारा

On: April 12, 2025 9:17 PM
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Haryana: हरियाणा में बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें: मंडियों में भीगा गेहूं, तिरपाल बना सहारा
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Rain increased the problems of farmers in Haryana Wheat got wet in the markets tarpaulin became a support: हरियाणा के खेतों और मंडियों में इन दिनों बारिश ने किसानों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार की दोपहर जैसे ही आसमान में बादल घिरे, कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि ने दस्तक दी। गेहूं और सरसों की फसलें मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी थीं, जो इस बारिश में भीग गईं। अब किसान तिरपाल और जुगाड़ के सहारे अपनी मेहनत को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। आखिर क्या है इस बारिश का असर और कैसे हालात बने हैं? चलिए, इसकी पूरी कहानी जानते हैं।

Haryana: आसमान से बरसी आफत

हरियाणा के 15 जिलों में गुरुवार को मौसम ने अचानक करवट ली। पानीपत, नूंह, पंचकूला, कुरुक्षेत्र, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, करनाल, जींद, भिवानी, कैथल, पलवल, चरखी दादरी, सिरसा और फतेहाबाद जैसे इलाकों में बारिश ने जोर पकड़ा। नारनौल में तो 14.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं रतिया, नरवाना और गुहला चीका जैसे क्षेत्रों में ओले भी गिरे। इस अप्रत्याशित मौसम ने किसानों को सकते में डाल दिया।

मंडियों में रखी गेहूं और सरसों की फसलें इस बारिश की भेंट चढ़ गईं। सोनीपत, चरखी दादरी, करनाल, कैथल और समालखा की मंडियों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। गीली फसल न केवल क्वालिटी खो रही है, बल्कि किसानों की कमाई पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

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मंडियों में क्यों बिगड़े हालात?

हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक इस बार धीमी रही है। अब तक करीब नौ लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंचा है, लेकिन समय पर उठान न होने की वजह से फसलें बाहर खुले में पड़ी हैं। मंडियों में शेड की कमी और भंडारण की अपर्याप्त व्यवस्था ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जब बारिश ने दस्तक दी, तो किसानों के पास फसल को बचाने का कोई ठोस इंतजाम नहीं था।

कई जगह किसानों ने तिरपाल डालकर गेहूं को ढकने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा और बारिश ने उनके प्रयासों पर पानी फेर दिया। जो फसलें भीग गईं, उनकी कीमत में कमी आने का डर सता रहा है। किसानों का कहना है कि अगर समय पर उठान और भंडारण की व्यवस्था होती, तो शायद यह नौबत न आती।

ओलावृष्टि ने और बढ़ाया नुकसान

रतिया, नरवाना और गुहला चीका में बारिश के साथ ओले गिरने की खबर ने किसानों की चिंता को और गहरा दिया। ओलावृष्टि फसलों के लिए बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि यह न केवल अनाज को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों को भी बर्बाद कर सकती है। हालांकि इस बार ओलावृष्टि का दायरा सीमित रहा, लेकिन जिन इलाकों में यह हुई, वहां नुकसान की तस्वीर साफ दिख रही है।

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किसानों की जुबानी

मंडियों में बैठे किसान इस बारिश से हताश हैं। सोनीपत के एक किसान रामपाल ने बताया, “हमने दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार की, लेकिन अब यह पानी में डूब रही है। तिरपाल से कितना बचा सकते हैं? सरकार को पहले ही मंडियों में व्यवस्था करनी चाहिए थी।” वहीं, करनाल की मंडी में मौजूद अनीता देवी ने कहा, “गीला गेहूं कोई अच्छे दाम में नहीं लेगा। अब तो लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।”

आगे क्या होगा?

यह बारिश भले ही कुछ घंटों की मेहमान रही हो, लेकिन इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। गीली फसल की क्वालिटी खराब होने से किसानों को कम दाम मिलने का खतरा है। साथ ही, अगर मंडियों में उठान की रफ्तार नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों में और दिक्कतें हो सकती हैं।

किसानों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द मंडियों में भंडारण और उठान की व्यवस्था को दुरुस्त करे। साथ ही, बारिश से हुए नुकसान का आकलन करके उचित मुआवजा दिया जाए। हरियाणा के खेतों से लेकर मंडियों तक, यह बारिश एक सबक छोड़ गई है कि मौसम की मार से बचने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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