ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Summer Plowing Tips: ग्रीष्मकालीन जुताई हरियाणा के खेतों में समृद्धि की नींव

On: May 1, 2025 2:43 PM
Follow Us:
Summer Plowing Tips: ग्रीष्मकालीन जुताई: हरियाणा के खेतों में समृद्धि की नींव
Join WhatsApp Group

Summer Plowing Tips , Summer ploughing: The foundation of prosperity in Haryana’s farms: हरियाणा के किसान लंबे समय से खेती को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों को अपनाते रहे हैं, और ग्रीष्मकालीन जुताई उनमें से एक है।

यह तकनीक न केवल फसलों की पैदावार को बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने और पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मदद करती है। खरपतवार नियंत्रण से लेकर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई तक, ग्रीष्मकालीन जुताई किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। आइए, इसके फायदों को विस्तार से समझें।

खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण

ग्रीष्मकालीन जुताई का सबसे बड़ा लाभ है खरपतवारों का आसान और प्राकृतिक नियंत्रण। फसल कटाई के बाद, जब खेत खाली हों, तो एक या दो बार जुताई करने से खरपतवार की जड़ें मिट्टी में दबकर सड़ जाती हैं। सूर्य की तेज गर्मी खरपतवार के बीजों को नष्ट कर देती है।

शोध के अनुसार, इस विधि से खरपतवार की मात्रा 30-40% तक कम हो सकती है। हरियाणा के रेवाड़ी के किसान सुरेश यादव कहते हैं, “ग्रीष्मकालीन जुताई ने मेरे खेतों में खरपतवार की समस्या को जड़ से खत्म कर दिया। अब फसलें पहले से ज्यादा स्वस्थ हैं।”

किसान भाइयों! बिना Farmer ID और e-KYC के नहीं मिलेगी 23वीं किस्त, सरकार ने जारी किया अलर्ट
किसान भाइयों! बिना Farmer ID और e-KYC के नहीं मिलेगी 23वीं किस्त, सरकार ने जारी किया अलर्ट

कीट और रोगों से मुक्ति

फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेष कीटों और रोगों का घर बन सकते हैं। ग्रीष्मकालीन जुताई इन अवशेषों को मिट्टी में दबाकर कीटों के जीवन चक्र को तोड़ देती है।

गर्मी का बढ़ता तापमान बचे हुए कीटों और उनके लार्वा को नष्ट कर देता है। अध्ययनों से पता चलता है कि इस तकनीक से कीटों की संख्या 40-50% तक कम हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश शर्मा बताते हैं, “यह पर्यावरण-अनुकूल तरीका रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत को कम करता है, जिससे खेती की लागत घटती है।”

मिट्टी की उर्वरता और जल संरक्षण

ग्रीष्मकालीन जुताई मिट्टी को भुरभुरा और हवादार बनाती है, जिससे उसकी जलधारण क्षमता 10-15% तक बढ़ जाती है। बारिश का पानी इस मिट्टी में आसानी से समा जाता है, और वाष्पीकरण व रिसाव की समस्या कम होती है।

यह तकनीक मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को भी बढ़ावा देती है, जो मिट्टी की उर्वरता में 15-20% तक सुधार करते हैं। फतेहाबाद की किसान सुनीता रानी कहती हैं, “जुताई के बाद मेरे खेत की मिट्टी इतनी उपजाऊ हो गई कि अब कम उर्वरक में भी अच्छी फसल मिल रही है।”

रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा
रोहतक के किसानों का नया दांव: गेहूं-धान छोड़ चुकंदर से कमा रहे बंपर मुनाफा

जलवायु परिवर्तन से सुरक्षा

ग्रीष्मकालीन जुताई जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, जैसे सूखा और गर्मी, से फसलों को बचाने में कारगर है। यह मिट्टी की नमी को संरक्षित करती है और पानी की बर्बादी रोकती है।

भारत में 20% से अधिक कृषि भूमि इस तकनीक से लाभान्वित हो रही है। यह टिकाऊ खेती को बढ़ावा देती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करती है। कृषि वैज्ञानिक प्रो. अनीता मेहता कहती हैं, “ग्रीष्मकालीन जुताई पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए फायदेमंद है। यह खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाती है।”

हरियाणा के किसानों के लिए वरदान

हरियाणा में 65-70% खेतों में खुर्रा (सूखी बुवाई) की जाती है, जिसके लिए खेतों को पहले से तैयार करना जरूरी है। ग्रीष्मकालीन जुताई इस काम को आसान बनाती है।

खरीफ फसलों की कटाई के बाद अगर रबी की बुवाई नहीं करनी है, या रबी फसलों के बाद खेत खाली हैं, तो जुताई करके छोड़ देना चाहिए। यह अगली फसल के लिए मिट्टी को तैयार करता है और कीटों व खरपतवारों से बचाता है।

हरियाणा सरकार का किसानों को तोहफा, अब वापस मिलेगी सरकारी ट्यूबवेल वाली जमीन
हरियाणा सरकार का किसानों को तोहफा, अब वापस मिलेगी सरकारी ट्यूबवेल वाली जमीन

किसानों के लिए व्यावहारिक सुझाव

किसानों को सलाह है कि वे ग्रीष्मकालीन जुताई के लिए स्थानीय कृषि विभाग या विशेषज्ञों से संपर्क करें। जुताई के समय मिट्टी की नमी जांचें और उचित गहराई पर काम करें।

जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को और बढ़ा सकता है। नवीनतम कृषि तकनीकों की जानकारी के लिए कृषि विश्वविद्यालयों की वेबसाइट्स और स्थानीय कार्यशालाओं का लाभ लें।

ग्रीष्मकालीन जुताई हरियाणा के किसानों के लिए एक ऐसी चाबी है, जो समृद्ध फसलों और स्वस्थ मिट्टी का ताला खोलती है। इस गर्मी में अपने खेतों को तैयार करें और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ाएं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment