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Tomato Varieties: टमाटर की ये 2 किस्में उगाओ, बन जाओ लखपति! जानो राज

On: अक्टूबर 2, 2025 9:20 पूर्वाह्न
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Tomato Varieties: माटर की ये 2 किस्में उगाओ, बन जाओ लखपति! जानो राज
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Best Tomato Varieties: टमाटर की खेती के लिए सितंबर से नवंबर का महीना सबसे बेस्ट टाइम माना जाता है। झारखंड के चतरा, पलामू और रामगढ़ जिले के किसान इस दौरान बड़े स्तर पर टमाटर की बुआई करते हैं। तो चलिए, हम आपको टमाटर की कुछ हाई-यील्ड वाली किस्मों के बारे में बताते हैं, जो आपकी कमाई दोगुनी कर सकती हैं।

देश में मौसम का बदलना, सब्जियों की बढ़ती डिमांड और नई-नई खेती की ट्रिक्स ने टमाटर जैसी फसल को नया रंग दे दिया है। ये तो हमारी किचन का स्टार है, लेकिन अब ये सिर्फ खुले खेतों में ही नहीं, बल्कि पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस जैसे स्मार्ट तरीकों से भी उगाया जा रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), पूसा ने किसानों की मदद के लिए दो कमाल की किस्में तैयार की हैं—पूसा रक्षित (DTPH-60) और पूसा चेरी टमाटर-1। ये न सिर्फ ज्यादा पैदावार देती हैं, बल्कि अच्छी क्वालिटी और लंबे समय तक चलने की वजह से बाजार में भी अच्छा दाम दिला सकती हैं। आइए, इन खास किस्मों को करीब से समझते हैं।

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पूसा रक्षित (DTPH-60) की खेती Tomato Varieties

पूसा रक्षित (DTPH-60) टमाटर की एक सुपर हाइब्रिड किस्म है, जो खासतौर पर पॉलीहाउस जैसे कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट के लिए बनी है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसकी जबरदस्त पैदावार। एक 100 मीटर के पॉलीहाउस से औसतन 15 क्विंटल तक टमाटर निकल सकते हैं। इसके फल गोल शेप के और गहरे लाल रंग के होते हैं, जिनका एवरेज वेट करीब 100 ग्राम रहता है।

टेस्ट में भी ये टॉप क्लास है, क्योंकि पके फलों का TSS (टोटल सॉल्यूबल सॉलिड) 5.1° ब्रिक्स होता है, जो स्वाद को बैलेंस्ड और लाजवाब बनाता है। ऊपर से, फलों में लाइकोपीन 6.0 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम मिलता है, जिससे रंग चटख लाल और आकर्षक लगता है।

फल का मीट लगभग 8 मिमी मोटा होता है, जो इन्हें मजबूत बनाता है। कुल मिलाकर, ये फसल 7-8 महीने तक चलती है। मार्केट की लगातार डिमांड को देखते हुए, पॉलीहाउस वाले किसानों के लिए ये प्रॉफिटेबल और लॉन्ग-टर्म ऑप्शन है।

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टमाटर पूसा चेरी टमाटर-1

पूसा चेरी टमाटर-1 आईएआरआई की तरफ से विकसित देश की पहली देसी चेरी टमाटर वैरायटी है। इसकी बुआई ज्यादातर दिल्ली, यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और एमपी जैसे राज्यों में होती है। ये खासकर ग्रीनहाउस और पॉलीहाउस कंडीशंस के लिए परफेक्ट है।

इसकी यूएसपी है इसका अनलिमिटेड ग्रोथ पैटर्न, यानी पौधा लंबे वक्त तक फल देता रहता है। वाइन की लंबाई एवरेज 9 से 12 मीटर तक हो सकती है। पत्तियां लाइट ग्रीन और मीडियम हेयरी होती हैं, जबकि स्टेम सॉलिड और स्ट्रॉन्ग पाया गया है। एक प्लांट पर औसतन 18 से ज्यादा फ्लावर क्लस्टर्स आते हैं, जिससे फलन अच्छा होता है और फल छोटे, गोल व डार्क रेड कलर के निकलते हैं।

एवरेज फल का वेट करीब 13 ग्राम रहता है और प्रति प्लांट लगभग 22 किलोग्राम प्रोडक्शन मिल जाता है। फसल की लाइफ 9 से 10 महीने तक चलती है, जिससे कंटीन्यूअस यील्ड पॉसिबल है। न्यूट्रिशन वैल्यू में भी ये कमाल है—लाइकोपीन 5.40 мг प्रति 100 ग्राम और विटामिन सी (एस्कॉर्बिक अम्ल) 20.7 мг प्रति 100 ग्राम मिलता है।

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फलों में 10.4° ब्रिक्स तक स्वीटनेस होती है। प्लस, ये रूट नॉट नेमाटोड जैसी प्रॉब्लम्स को सहन कर लेती है, इसलिए किसानों के लिए ये सुपर प्रॉफिटेबल चॉइस है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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