अंबाला, (Sanskrit AI): अब 10वीं पास छात्र बिना NEET दिए आयुर्वेद की पढ़ाई कर डॉक्टर बन सकते हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली अगले सत्र से साढ़े सात साल का बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) कोर्स शुरू करने जा रहा है। दाखिले के लिए सिर्फ 10वीं पास होना जरूरी है, साथ ही 10वीं के विषयों पर आधारित प्रवेश परीक्षा देनी होगी। नासिक से शुरू होगा यह खास आयुर्वेद गुरुकुलम, जहां पहले बैच में 60 सीटें होंगी।
गुरुकुल परंपरा में शास्त्रीय आयुर्वेद
प्रो. मदनमोहन झा ने बताया कि भारत सरकार ने पिछले वर्ष एक अधिसूचना में आयुर्वेद को मूलरूप में पढ़ने के लिए कहा था। आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार अभी बीएएमएस में पढ़ाई नहीं चल रही है, इसीलिए भारत सरकार चाहती है कि हम गुरुकुल परंपरा के अनुसार आयुर्वेद का अध्ययन कराएं और आयुर्वेद गुरुकुलम की स्थापना हो, इसके लिए सरकार ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
विवि देश में आयुर्वेद गुरुकुलम की स्थापना करेगी और कॉलेजों को पाठ्यक्रम चलाने के लिए मान्यता भी देगी। इस कोर्स में प्रवेश लेने के बाद दो साल का प्री-आयुर्वेद और फिर पांच साल का बीएएमएस पाठ्यक्रम होगा। प्रो. झा ने बताया कि जिन मेडिकल कॉलेजों में बीएएमएस पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे हैं वहां यह कोर्स नहीं होगा, इसके लिए नए ही संस्थान स्थापित किए जाएंगे। इस पाठ्यक्रम को चलाने के लिए संस्थान के पास 100 बेड का अस्पताल होना अनिवार्य है, गुरु और शिष्य के साथ रहने की व्यवस्था जैसे मानक रखे गए हैं।
संस्कृत में बीटेक, GPT और IIT तक का रास्ता
प्रो. झा ने आगे बताया कि संस्कृत में बीटेक को मान्यता मिल गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस में बीटेक होगा। भारतीय वास्तु एवं आर्किटेक्चर पर भी कोर्स शुरू होगा। चैट जीपीटी की तर्ज पर संस्कृत जीपीटी बन रहा है, जिससे संस्कृत से जुड़ी रिसर्च आसान हो जाएगी। गुरुकुल के छात्र जो आगे बड़ी डिग्री नहीं कर पाएं, उन्हें छात्रवृत्ति देकर IIT भेजा जाएगा। वहां तीन साल शोध करेंगे कि शास्त्रों को तकनीक से कैसे जोड़ा जाए। एलएलबी संस्कृत कोर्स भी चल रहा है।













