भारत की मोटरस्पोर्ट्स पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा देने वाली महिंद्रा रेसिंग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी फॉर्मूला E प्रतिबद्धता को 2030 तक बढ़ा दिया है. कंपनी अब आधिकारिक रूप से GEN4 निर्माता के रूप में भी भाग लेगी, जिससे वह इस भविष्यवादी इलेक्ट्रिक रेसिंग प्लेटफॉर्म का हिस्सा बनने वाली दुनिया की चुनिंदा टीमों में शामिल हो गई है.
हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में महिंद्रा ने अपनी M12 Electro रेस कार की नई लिवरी पेश की, जो टीम के अगले अध्याय की झलक दिखाती है. इसी मौके पर समूह के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने बताया कि कंपनी सिर्फ रेसिंग में नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की अगली पीढ़ी को आकार देने में भी सक्रिय भूमिका निभाएगी.
GEN4 एरा क्यों खास माना जा रहा है?
फॉर्मूला E 2026/27 सीज़न में GEN4 कारों की शुरुआत करने जा रहा है, जिन्हें अब तक की सबसे एडवांस और शक्तिशाली इलेक्ट्रिक रेस कार माना जा रहा है.
नई GEN4 मशीनें 600 kW तक की पावर देने में सक्षम होंगी, जिसका मतलब है लगभग 815 hp की जबरदस्त ताकत. यह आंकड़ा इलेक्ट्रिक रेसिंग को पारंपरिक मोटरस्पोर्ट्स के और भी करीब ले जाता है.
स्पीड को संभालने के लिए गाड़ियों में एक्टिव ऑल-व्हील ड्राइव तकनीक दी जाएगी, जिससे ट्रैक्शन, ग्रिप और ऐक्सिलरेशन में बड़ा सुधार होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि GEN4 रेसें अब तक की सबसे तेज और सबसे रणनीतिक होंगी.
स्पोर्ट्स एनालिस्ट विवेक मेहरा कहते हैं कि
“GEN4 प्लेटफॉर्म सिर्फ तेज कारों के बारे में नहीं है. यह रेसिंग टेक्नोलॉजी को रोजमर्रा के इलेक्ट्रिक वाहनों तक पहुँचाने का रास्ता बनेगा. महिंद्रा जैसी कंपनियों के लिए यह बड़ा अवसर है.”
सस्टेनेबिलिटी में नई मिसाल
GEN4 कारों को 100% री-साइक्लेबल मटीरियल से बनाने की योजना है, जो फॉर्मूला E की पर्यावरण मित्र पहचान को और मजबूत करेगा. सिर्फ कार ही नहीं, बैटरी पैक्स और कई इंटरनल पार्ट्स भी रीसाइक्लिंग-रेडी होंगे.
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर में ऑटोमोबाइल कंपनियां सर्कुलर इकॉनमी मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
महिंद्रा लंबे समय से ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने वाली कंपनियों में गिनी जाती है, ऐसे में GEN4 भागीदारी उसकी स्थिरता प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है.
GEN4 के पावर फीचर्स कौन-कौन से हैं?
नई कारें सिर्फ तेज नहीं होंगी, बल्कि स्मार्ट भी होंगी.
GEN4 प्लेटफॉर्म में मिलने वाली प्रमुख खूबियां:
• 450 kW की रेस पावर
• 600 kW अटैक मोड
• 700 kW तक की रेगेनेरेटिव ब्रेकिंग
• 55 kWh की रेस एनर्जी कैपेसिटी
रेजेनरेटिव ब्रेकिंग का इतना बड़ा अपग्रेड यह दिखाता है कि भविष्य में इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स रेसें बिना पिट-स्टॉप पर निर्भर हुए और अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं.
भारत के लिए यह उपलब्धि क्यों बड़ी है?
फॉर्मूला E एक तकनीक-प्रधान खेल है, जहां निर्माता सिर्फ रेस नहीं करते, बल्कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के भविष्य का रोडमैप भी तय करते हैं. महिंद्रा का GEN4 स्टेटस हासिल करना भारत के तकनीकी विकास और इंजीनियरिंग क्षमता को वैश्विक मंच पर और मजबूत करता है.
इसके साथ ही यह घरेलू टैलेंट को इंटरनेशनल मोटरस्पोर्ट्स में आगे बढ़ने का अवसर देता है. कई युवा भारतीय इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट और ड्राइविंग टैलेंट अब महिंद्रा जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए दुनिया की बड़ी रेसिंग कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे.
आगे की राह क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक फॉर्मूला E पूरी तरह से नई पावरट्रेन टेक्नोलॉजी, हाई-क क्षमता वाली बैटरियों और अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग के साथ विकसित हो जाएगी. ऐसे में महिंद्रा के पास वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपने प्रभाव को कई गुना बढ़ाने का मौका है.
कंपनी पहले ही भारत में इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में तेजी से विस्तार कर रही है. रेसिंग में हासिल अनुभव सीधे उत्पादन वाहनों की बैटरी और मोटर तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करेगा.













