आजकल भारत में लॉन्च हो रही कई नई कारों में मोबाइल वायरलेस चार्जिंग का फीचर दिया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा समेत देशभर में कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह सुविधा खास बन रही है, क्योंकि ड्राइविंग के दौरान चार्जिंग केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
कार में बने खास चार्जिंग पैड पर वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करने वाला स्मार्टफोन रखते ही उसकी बैटरी चार्ज होने लगती है। देखने में यह प्रक्रिया आसान है, लेकिन इसके पीछे चुंबकीय क्षेत्र और इलेक्ट्रिक कॉइल की तकनीक काम करती है।
कार में वायरलेस चार्जिंग क्या होती है?
वायरलेस चार्जिंग का मतलब है कि मोबाइल को चार्ज करने के लिए फोन में सीधे चार्जिंग केबल लगाने की जरूरत नहीं होती। कार में इसके लिए एक विशेष चार्जिंग पैड दिया जाता है।
यूजर को केवल वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करने वाला मोबाइल पैड पर सही जगह रखना होता है। इसके बाद कार का चार्जिंग सिस्टम और फोन आपस में ऊर्जा स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।
वायरलेस चार्जिंग पैड मोबाइल तक पावर कैसे पहुंचाता है?
कार के वायरलेस चार्जिंग पैड के अंदर तांबे की एक विशेष कॉइल लगी होती है। मोबाइल के अंदर भी वायरलेस चार्जिंग के लिए एक छोटी कॉइल मौजूद होती है।
जब चार्जिंग पैड सक्रिय होता है तो उसकी कॉइल में बदलता हुआ विद्युत प्रवाह चलता है। इससे बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र पैदा होता है, जो पास रखे मोबाइल की रिसीवर कॉइल तक ऊर्जा पहुंचाने में मदद करता है।
मोबाइल की कॉइल इस ऊर्जा को ग्रहण करती है और फोन का चार्जिंग सिस्टम उसे बैटरी चार्ज करने योग्य विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसी प्रक्रिया के कारण बिना तार लगाए फोन की बैटरी तक पावर पहुंचती है।
क्यूआई वायरलेस चार्जिंग तकनीक क्या है?
कई वायरलेस चार्जिंग सिस्टम क्यूआई जैसे वायरलेस चार्जिंग मानक का इस्तेमाल करते हैं। यह फोन और चार्जिंग पैड के बीच अनुकूलता और सुरक्षित चार्जिंग की व्यवस्था में मदद करता है।
हालांकि, सभी कारों और सभी मोबाइल में एक जैसा वायरलेस चार्जिंग सिस्टम नहीं होता। इसलिए किसी कार के चार्जिंग पैड पर फोन रखने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपका स्मार्टफोन उस सुविधा को सपोर्ट करता है या नहीं।
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फोन को सही जगह रखना क्यों जरूरी है?
वायरलेस चार्जिंग में चार्जिंग पैड और मोबाइल की कॉइल का सही तरीके से एक-दूसरे के सामने होना जरूरी है। यदि फोन पैड पर टेढ़ा या गलत जगह रखा गया है तो चार्जिंग धीमी हो सकती है।
कॉइल का सही संरेखण न होने पर ऊर्जा का स्थानांतरण कम प्रभावी हो सकता है और कुछ ऊर्जा गर्मी के रूप में बदल सकती है। इसी कारण कई कारों में चार्जिंग पैड पर फोन रखने की निर्धारित जगह या निशान दिया जाता है।
क्या हर स्मार्टफोन कार के वायरलेस चार्जर पर चार्ज होगा?
नहीं, हर स्मार्टफोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता। इसके लिए फोन में जरूरी हार्डवेयर और वायरलेस चार्जिंग रिसीवर होना आवश्यक है।
यदि फोन में यह सुविधा नहीं है तो उसे कार के वायरलेस चार्जिंग पैड पर रखने से बैटरी चार्ज नहीं होगी। फोन और चार्जिंग पैड की क्षमता के आधार पर चार्जिंग की गति भी अलग-अलग हो सकती है।
क्या कार में वायरलेस चार्जिंग सुरक्षित है?
अच्छी गुणवत्ता वाले वायरलेस चार्जिंग सिस्टम में सुरक्षा के लिए पावर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं होती हैं। चार्जिंग के दौरान फोन का तापमान बढ़ने पर कई उपकरण चार्जिंग की गति को कम कर सकते हैं।
बहुत अधिक गर्मी में फोन को चार्ज करने से चार्जिंग की गति प्रभावित हो सकती है। इसलिए तेज धूप में लंबे समय से गर्म हो चुके फोन को चार्जिंग पैड पर रखने के बजाय पहले उसका तापमान सामान्य होने देना बेहतर हो सकता है।
केबल चार्जिंग की जगह वायरलेस चार्जिंग कितनी उपयोगी है?
कार में वायरलेस चार्जिंग की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि बार-बार केबल लगाने और निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। छोटे सफर और रोजाना ड्राइविंग के दौरान यह फोन की बैटरी बनाए रखने का सुविधाजनक तरीका हो सकता है।
हालांकि, वायरलेस चार्जिंग की गति हर स्थिति में केबल चार्जिंग जैसी नहीं होती। इसलिए लंबी यात्रा के दौरान तेजी से बैटरी भरने की जरूरत हो तो कार के अन्य चार्जिंग विकल्प फोन और वाहन की क्षमता के अनुसार ज्यादा उपयोगी हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, कार का वायरलेस चार्जर चुंबकीय क्षेत्र के जरिए ऊर्जा को चार्जिंग पैड से मोबाइल की अंदरूनी कॉइल तक पहुंचाता है। फोन का सिस्टम इस ऊर्जा को बैटरी चार्ज करने के लिए इस्तेमाल करता है और इसी तरह बिना तार लगाए मोबाइल की बैटरी चार्ज होने लगती है। #CarTechnology #WirelessCharging #AutoTips











