Anger of employees in Haryana , Warning of agitation if demands are not met, pressure on the government increased: हरियाणा संयुक्त कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। चरखी दादरी में हुई एक बड़ी बैठक में कर्मचारियों ने अपनी अनसुनी मांगों पर गुस्सा जाहिर किया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी जायज मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो बड़े आंदोलन की राह अपनाई जाएगी। पुरानी पेंशन बहाली, बकाया भुगतान और नौकरी सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कर्मचारी एकजुट दिखे।
चरखी दादरी में जुटे कर्मचारी नेता Employees in Haryana
हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मैकेनिकल वर्क्स यूनियन के चरखी दादरी मुख्यालय में संयुक्त कर्मचारी संघ की राज्य और जिला कार्यकारिणी की अहम बैठक हुई।
चिड़ियाघर रोड स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर सिंह शर्मा ने की, जबकि संचालन प्रदेश महासचिव सन्दल सिंह राणा ने किया। भिवानी, चरखी दादरी और पूरे प्रदेश से आए पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। जिला मीडिया प्रभारी अमित जांगड़ा ने बताया कि बैठक में 17 मार्च से 3 अप्रैल तक हुए जिला स्तरीय रोष प्रदर्शनों की समीक्षा की गई।
रोष प्रदर्शनों ने दिखाई ताकत
प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर सिंह शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पूरे हरियाणा में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार रोष प्रदर्शन किए। ये प्रदर्शन इस बात का सबूत हैं कि कर्मचारी अपनी जायज मांगों के लिए पूरी तरह जागरूक और एकजुट हैं।
उन्होंने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि अगर संगठन के साथ बातचीत कर मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो कर्मचारी बड़ी रणनीति के साथ सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों का धैर्य अब टूट रहा है, और वे अपने हक के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
संघ ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें 2020 से 2023 तक की बकाया एलटीसी का भुगतान, 2018-19 में भर्ती कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची तैयार करना, हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारियों को नौकरी सुरक्षा, और पुरानी पेंशन योजना की बहाली शामिल है।
इसके अलावा, पब्लिक हेल्थ की ग्रामीण वाटर वर्कशॉप को पंचायत के अधीन न करने, मेडिकल कैशलेस सुविधा लागू करने, और 440 रुपये वृद्धि भत्ते को मासिक वेतन में जोड़ने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। प्रदेश महासचिव सन्दल सिंह राणा ने कहा कि अगर सरकार ने इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो कर्मचारी आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे, और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
कर्मचारियों की एकजुटता का प्रदर्शन
बैठक में जिला भिवानी प्रधान सुरेंद्र कुमार टोनी, चरखी दादरी प्रधान जयप्रकाश पूनिया, और अन्य नेताओं ने कर्मचारियों की एकता पर जोर दिया।
राज्य कोषाध्यक्ष श्रीभगवान अहलावत, वरिष्ठ उपप्रधान ओमप्रकाश पुनिया, और कई अन्य पदाधिकारियों ने भी सरकार के रवैये की निंदा की। उन्होंने कहा कि कर्मचारी प्रदेश के विकास की रीढ़ हैं, और उनकी मांगों को नजरअंदाज करना सरकार की सबसे बड़ी भूल होगी। बैठक में आंदोलन की रणनीति पर भी गहन चर्चा हुई।
सरकार के सामने चुनौती
यह बैठक हरियाणा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। कर्मचारियों की एकजुटता और उनके रोष ने साफ कर दिया है कि वे अब और इंतजार नहीं करेंगे।
उनकी मांगें न केवल जायज हैं, बल्कि उनके मेहनत और अधिकारों से जुड़ी हैं। सरकार को अब जल्द से जल्द कर्मचारी नेताओं के साथ बातचीत शुरू करनी होगी, वरना बड़ा आंदोलन अपरिहार्य हो सकता है।
कर्मचारियों की उम्मीद और अपील
हरियाणा के कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेगी और समाधान के लिए कदम उठाएगी। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
कर्मचारी संगठन ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से एकजुट रहने और इस लड़ाई में साथ देने की अपील की है। यह बैठक कर्मचारियों के हक की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है।











