Asian Athletics Championship: Haryana’s Pooja won gold, created history: एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (Asian Athletics Championship) 2025 ने भारत के लिए गौरव का पल ला दिया! दक्षिण कोरिया में चल रही इस चैंपियनशिप के चौथे दिन भारतीय महिला एथलीट्स ने कमाल कर दिखाया।
दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल के साथ भारत चमका। लेकिन सबसे प्रेरणादायक है हरियाणा की 18 साल की पूजा की कहानी। फतेहाबाद की इस बेटी ने ऊंची कूद में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। सीमित संसाधनों और असीम जज्बे के साथ पूजा ने दुनिया को दिखाया कि मेहनत से सपने सच हो सकते हैं। आइए, जानते हैं उनकी यह अद्भुत यात्रा!
हरियाणा की लाडली ने लहराया परचम Asian Athletics Championship
एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (Asian Athletics Championship) में हरियाणा के फतेहाबाद जिले के बोस्ती गांव की पूजा ने कमाल कर दिया।
18 साल की इस युवा एथलीट ने महिलाओं की ऊंची कूद में 1.89 मीटर की छलांग लगाई। इस शानदार प्रदर्शन ने भारत की झोली में गोल्ड मेडल डाला। पूजा ने अपने ही अंडर-20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा। हालांकि, वे 2012 के 1.92 मीटर के सीनियर रिकॉर्ड से चूक गईं। उनकी इस उपलब्धि ने हरियाणा और पूरे देश को गर्व से भर दिया।
संघर्ष से शुरू हुआ सफर
पूजा की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। एक राजमिस्त्री की बेटी होने के नाते, उनके पास ट्रेनिंग की कोई खास सुविधा नहीं थी। बांस के डंडों और पराली से भरी बोरियों पर अभ्यास कर उन्होंने कूदना सीखा।
सीमित संसाधनों के बावजूद, पूजा ने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें (Asian Athletics Championship) के मंच तक पहुंचाया। साधारण गांव से निकलकर गोल्ड मेडल तक का यह सफर सपनों को सच करने की मिसाल है।
सबसे कम उम्र की चैंपियन
एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (Asian Athletics Championship) में पूजा ने न सिर्फ गोल्ड जीता, बल्कि एक रिकॉर्ड भी बनाया। वे इस चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गईं। अभ्यास के दौरान उनके स्पाइक्स (जूते) फट गए। लेकिन पूजा ने हिम्मत नहीं हारी।
पट्टियों से जूतों को बांधकर उन्होंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उनकी इस जिद और जज्बे ने भारत के लिए इतिहास रच दिया। पूजा का यह कारनामा हर युवा के लिए प्रेरणा है।
चुनौतियों पर जीत का जश्न
पूजा की राह आसान नहीं थी। एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (Asian Athletics Championship) में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
फटे जूतों के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प ने 1.89 मीटर की छलांग को संभव किया। यह गोल्ड मेडल न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत है, बल्कि भारत की ताकत को भी दर्शाता है। पूजा की कहानी बताती है कि संसाधनों की कमी सपनों को रोक नहीं सकती।
भारत का गौरव, भविष्य की उम्मीद
एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (Asian Athletics Championship) में पूजा की जीत ने भारत को गौरवान्वित किया। 18 साल की उम्र में गोल्ड मेडल और रिकॉर्ड बनाना अद्भुत है।
उनकी यह उपलब्धि युवाओं को प्रेरित कर रही है। पूजा ने दिखाया कि मेहनत और जुनून से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। हरियाणा की इस बेटी ने न सिर्फ अपने गांव का नाम रोशन किया, बल्कि (Asian Athletics Championship) में भारत की धाक जमाई। पूजा का सफर भविष्य के एथलीट्स के लिए एक मिसाल है!













