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Bhavantar Bharpai Yojana: हरियाणा में बाजरे की सरकारी खरीद बंद, भावांतर से मुआवजा

On: September 25, 2025 9:15 AM
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Bhavantar Bharpai Yojana: हरियाणा में बाजरे की सरकारी खरीद बंद, भावांतर से मुआवजा
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Bhavantar Bharpai Yojana haryana Bajra msp price: चंडीगढ़ | हरियाणा के बाजरा उत्पादक किसानों के लिए इस बार मुश्किल खबर है। सरकार ने इस सीजन में बाजरे की सरकारी खरीद बंद कर दी है, जिसके चलते किसानों को अपनी फसल निजी खरीदारों को बेचना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने ‘भावांतर भरपाई योजना’ के तहत नुकसान की भरपाई का वादा किया है, लेकिन इसका लाभ सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही मिलेगा। इससे कई किसान योजना से वंचित रह सकते हैं।

नूंह जिले में भारी बारिश ने बाजरे की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। बची हुई फसल की क्वालिटी भी खराब हो चुकी है। मंडियों में बाजरे की आवक शुरू हो गई है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बजाय बहुत कम दाम मिल रहे हैं। किसान औने-पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर हैं, जिससे उनकी कमाई पर बड़ा असर पड़ रहा है।

सरकारी खरीद बंद, भावांतर योजना की शुरुआत Bhavantar Bharpai Yojana

हरियाणा सरकार ने इस बार बाजरे की सरकारी खरीद न करने का फैसला लिया है। इसके बजाय किसानों को अपनी फसल निजी आढ़तियों या खरीदारों को बेचनी होगी। राहत के तौर पर सरकार ने ‘भावांतर भरपाई योजना’ लागू की है, जिसके तहत बाजार में MSP से कम कीमत मिलने पर सरकार अंतर की राशि किसानों को देगी। लेकिन इस योजना का लाभ सिर्फ उन किसानों को मिलेगा, जो पहले से पंजीकृत हैं।

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नूंह में बारिश का कहर

नूंह जिले में इस साल औसत से ज्यादा बारिश ने बाजरे की फसल को बर्बाद कर दिया। बची हुई फसल की क्वालिटी भी खराब हो गई है, जिसके कारण मंडियों में अच्छी कीमत नहीं मिल रही। MSP 2,725 रुपये प्रति क्विंटल तय है, लेकिन बाजार में किसानों को 2,000-2,300 रुपये प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं। पुन्हाना मंडी में 20,000 क्विंटल और नूंह मंडी में 400 क्विंटल बाजरे की आवक दर्ज हुई है।

पंजीकरण और गेट पास की प्रक्रिया

‘भावांतर भरपाई योजना’ का फायदा उठाने के लिए किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करना जरूरी है। पंजीकृत किसानों को मंडी में गेट पास मिलेगा, और निजी खरीद के बाद सरकार MSP और बाजार मूल्य के अंतर को उनके बैंक खाते में जमा करेगी।

जो किसान पंजीकृत नहीं हैं, वे इस योजना से बाहर हो सकते हैं, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान का खतरा है।

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कीमतों में अंतर और आर्थिक प्रभाव

मंडियों में बाजरे की कीमत MSP (2,725 रुपये प्रति क्विंटल) से काफी कम है। निजी खरीदार 2,000-2,300 रुपये प्रति क्विंटल के दाम दे रहे हैं। यह अंतर किसानों की कमाई को सीमित कर रहा है और उनकी मेहनत व लागत का सही मुआवजा नहीं मिल पा रहा। पुन्हाना मंडी में 20,000 क्विंटल की भारी आवक हुई, जबकि नूंह में सिर्फ 400 क्विंटल पहुंचा, जो क्वालिटी और ट्रांसपोर्टेशन की समस्याओं को दर्शाता है।

किसानों की नाराजगी और मांग

किसान पहले ही बारिश से हुए नुकसान से परेशान हैं। अब MSP न मिलना और निजी खरीदारों का कम दाम देना उनके लिए दोहरी मार बन गया है।

किसान चाहते हैं कि सरकार निजी खरीदारों पर नजर रखे, सरकारी खरीद फिर से शुरू करे या MSP की गारंटी दे। उनकी मांग है कि सरकार सख्त दिशानिर्देश जारी करे ताकि उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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