Chandigarh News made compulsory for admission in PU, student organizations protest: पंजाब यूनिवर्सिटी की हैंडबुक ऑफ इन्फॉर्मेशन 2025 (पार्ट सी, पेज 129) में शामिल एक एफिडेविट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह एफिडेविट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य किया गया है। इसमें प्रदर्शन और कैंपस में आचरण को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं।
एफिडेविट के 11 पॉइंट्स में से दूसरे पॉइंट को लेकर सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। इसमें कहा गया है कि कोई भी धरना, प्रदर्शन या रैली सिर्फ एक तय स्थान हो सकती है।स चौकी, हेल्थ सेंटर या डिस्पेंसरी के पास होगा, जिसे रजिस्ट्रार ने 29 अप्रैल 2022 के सर्कुलर में नोटिफाई किया था।
Chandigarh News: स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशंस क्या बोली
वहीं स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशंस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का उल्लंघन बताया है। स्टूडेंट्स का कहना है कि इससे कैंपस के मुख्य हिस्सों में अपनी बात रखने का अधिकार छिन जाएगा। वीसी प्रो. रेनू विंग ने कहा कि इन नियमों का मकसद अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखना है।
स्टूडेंट्स डेजिग्नेटेड जगहों पर ही प्रदर्शन कर सकते हैं। पिछले दिनों जब स्टूडेंट्स पर एफआईआर हुई और उसे वापस लेने की बात कही गईं तो भी यही बात सामने आई कि डेज़िग्नेटेड साइट पर धरना करें। इसलिए लीगल राय लेकर ही इसे एफिडेविट में शामिल किया गया है।
स्टूडेंट लीडर्स का आरोप है कि यह कदम असहमति की आवाज दबाने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि यह संविधान में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन है और स्टूडेंट्स की आवाज दबाने की कोशिश है।
एफिडेविट में ये शर्तें
अन्य शर्तों में रिहायशी इलाकों और यूनिवर्सिटी के कॉन्सटिटुएंट कॉलेजों में प्रदर्शन पर रोक, तय डेसिबल से ज्यादा आवाज में नारेबाजी पर रोक, कैंपस में वाहन चलाने और पार्किंग पर पाबंदी, हथियार या हानिकारक वस्तुएं लाने पर रोक शामिल हैं।
पॉइंट 11 में चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने पर स्टूडेंट्स को एग्जाम से रोक, एडमिशन रद्द करने या यूनिवर्सिटी कैंपस में एंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। स्टूडेंट्स को यह भी मानना होगा कि वे यूनिवर्सिटी नहीं लगाएंगे।
अगर ऐसा की दीवारों पर पोस्टर या स्टीकर हैं तो हटाने का खर्च खुद उठाना होगा। उन्हें हमेशा आइडेंटिटी कार्ड पहनना होगा। प्रदर्शन में आउटसाइडर्स को बुलाने की अनुमति नहीं होगी।
वीसी ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन की घोषणा
पीयू कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट अर्चित गर्ग ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इन शर्तों को वापस ले या संशोधित करे, ताकि स्टूडेंट्स के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। रिसर्च स्कॉलर शिशपाल ने कहा कि यह निर्णय किसी भी रूप में स्टूडेंट्स के हित में नहीं है और इसे पीयू में लागू नहीं होने दिया जाएगा।
हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन से बात करेंगे और उन्हें स्टूडेंट्स की चिंताओं और इस आदेश के दुष्परिणामों से अवगत कराएंगे। इसके बावजूद यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो हम सभी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशंस के साथ मिलकर इस फैसले के खिलाफ व्यापक आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
पीएसयू (लालकार) ने इसे स्टूडेंट्स के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। स्टूडेंट लीडर सारा ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों को एक डेजिग्नेटेड एरिया तक सीमित रखने और पूर्व की आवश्यकता के पीयू के कदम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज दोपहर 1 बजे एबीवीपी को छोड़कर वीसी ऑफिस के बाहर एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है।












