Crime Against Children: High Court changed the death sentence to 30 years imprisonment: Know what was the crime: हाईकोर्ट की सजा में बदलाव के तहत एक गंभीर मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी को दी गई फांसी की सजा को कठोर कारावास में परिवर्तित किया। यह केस (court changes death sentence) इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यह ‘दुर्लभतम से दुर्लभतम’ श्रेणी में नहीं आता।
पीड़िता की गवाही और मेडिकल साक्ष्य बने न्याय का आधार Crime Against Children
पीड़िता ने स्पष्ट रूप से बताया कि उसके पिता ने वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। अदालत ने गवाही और (DNA evidence rape case) जैसे साक्ष्यों को पर्याप्त माना। निचली अदालत की सजा को बरकरार रखते हुए, हाईकोर्ट ने (minor abuse verdict) को दोबारा विचार करके सजा की प्रकृति को बदल दिया।
अपील में आरोपी ने जताया झूठा फंसाए जाने का दावा
आरोपी ने दावा किया कि उसे झूठा फंसाया गया है क्योंकि उसने लड़की का फोन छीना था। लेकिन अदालत ने उसकी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चिकित्सीय प्रमाण और पीड़िता की स्पष्ट गवाही के आधार पर (convict appeal news) में कोई शक की गुंजाइश नहीं बचती।













