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Earthquake in Kashmir: कश्मीर में भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में था केंद्र, 5.9 की तीव्रता, लोग घरों से भागे

On: April 19, 2025 1:21 PM
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Earthquake in Kashmir: कश्मीर में भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में था केंद्र, 5.9 की तीव्रता, लोग घरों से भागे
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Earthquake in Kashmir valley today news details 19 April 2025: शनिवार की सुबह कश्मीर घाटी में भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। रिक्टर स्केल पर 5.9 तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान-ताजिकिस्तान सीमा पर था। झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर की ओर भागे। सौभाग्य से, अभी तक किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। आइए, इस भूकंप और इसके पीछे की वजहों को विस्तार से समझते हैं।

Earthquake in Kashmir: कश्मीर में भूकंप का कहर

कश्मीर घाटी में शनिवार को सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा पर, 71.38 डिग्री पूर्व और 36.13 डिग्री उत्तर में, जमीन से 86 किलोमीटर की गहराई में था। रिक्टर स्केल पर 5.9 की तीव्रता ने लोगों में डर पैदा कर दिया। जैसे ही झटके महसूस हुए, लोग अपने घरों, दफ्तरों और इमारतों से बाहर खुले मैदानों की ओर दौड़े। यह घटना कश्मीर में हाल के दिनों में दूसरी बार हुई है, क्योंकि तीन दिन पहले बुधवार को किश्तवाड़ जिले में 2.4 तीव्रता का भूकंप आया था।

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अफगानिस्तान: भूकंप का संवेदनशील क्षेत्र

अफगानिस्तान प्राकृतिक आपदाओं, खासकर भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन के लिए अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार, यह क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद जोखिम भरा है। कश्मीर में तीन दिन पहले आए 2.4 तीव्रता के भूकंप का केंद्र भी किश्तवाड़ में 5 किमी की गहराई पर था। यह भूकंप सुबह 5:14 बजे (IST) आया था। अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप आने की वजह वहां की भौगोलिक स्थिति और सक्रिय टेक्टोनिक प्लेट्स हैं।

टेक्टोनिक प्लेट्स और फॉल्ट लाइन्स की भूमिका

अफगानिस्तान यूरोशियन और इंडियन टेक्टोनिक प्लेट्स के बीच बसा है। जब ये विशाल प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या खिसकती हैं, तो धरती के अंदर जबरदस्त तनाव पैदा होता है, जो भूकंप के रूप में सामने आता है। इसके अलावा, अफगानिस्तान में कई सक्रिय फॉल्ट लाइन्स हैं, जिनमें चमन फॉल्ट लाइन प्रमुख है। यह फॉल्ट लाइन अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा के पास स्थित है और अक्सर सक्रिय रहती है। इन फॉल्ट लाइन्स के कारण इस क्षेत्र में मध्यम से लेकर तेज तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।

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कमजोर इमारतें, बड़ा खतरा

अफगानिस्तान के कई इलाके पहाड़ी और कमजोर जमीन वाले हैं, जहां ज्यादातर इमारतें भूकंपरोधी नहीं हैं। यही वजह है कि यहां भूकंप होने पर नुकसान का खतरा ज्यादा रहता है। कश्मीर में भी लोग भूकंप के झटकों से डर जाते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति इसे संवेदनशील बनाती है। शुक्रवार के भूकंप में नुकसान न होने से लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह घटना हमें भूकंप से बचाव की तैयारियों की याद दिलाती है।

भूकंप से बचाव: क्या करें?

भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए जागरूकता और तैयारी जरूरी है। अगर आप भूकंप के झटके महसूस करें, तो तुरंत खुले मैदान में जाएं और ऊंची इमारतों से दूर रहें। घर में मजबूत फर्नीचर, जैसे टेबल के नीचे छिपें। इसके अलावा, भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण और आपातकालीन किट तैयार रखना भी जरूरी है। कश्मीर और अफगानिस्तान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को भी भूकंप जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।

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प्रकृति की चेतावनी, सावधानी जरूरी

यह भूकंप कश्मीर और अफगानिस्तान के लोगों के लिए एक और चेतावनी है कि हमें प्रकृति के संकेतों को गंभीरता से लेना होगा। भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही तैयारी और जागरूकता से जान-माल का नुकसान कम किया जा सकता है। कश्मीर घाटी में लोग अब सामान्य जीवन में लौट रहे हैं, लेकिन यह घटना हमें सिखाती है कि सावधानी और सुरक्षा हमेशा पहले आनी चाहिए।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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