ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Schizophrenia Facts: फिल्मों जैसा हिंसक नहीं होता सिजोफ्रेनिया का मरीज, सही इलाज से जी सकता है सामान्य जीवन

On: मई 20, 2026 5:16 अपराह्न
Follow Us:
Schizophrenia Facts: फिल्मों जैसा हिंसक नहीं होता सिजोफ्रेनिया का मरीज, सही इलाज से जी सकता है सामान्य जीवन
Join WhatsApp Group

चंडीगढ़, 20 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Schizophrenia symptoms in Hindi: आज के दौर में भले ही मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन कुछ बीमारियां अब भी डर, अंधविश्वास और गलतफहमियों के घेरे में हैं। हाल ही में हुए चर्चित ट्विशा शर्मा केस के बाद ‘सिजोफ्रेनिया’ शब्द अचानक देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले के सामने आने के बाद लोग इंटरनेट पर लगातार सर्च कर रहे हैं कि आखिर यह बीमारी क्या है, इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण क्या हैं और क्या इससे प्रभावित इंसान कभी आम जिंदगी में लौट सकता है। इस गंभीर विषय पर गहराई से प्रकाश डालते हुए प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. सामंत दर्शी ने कई चौंकाने वाले तथ्यों से पर्दा उठाया है।

क्या है सिजोफ्रेनिया और कैसे प्रभावित करता है इंसान का दिमाग?

डॉ. सामंत दर्शी के अनुसार, सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) एक जटिल और गंभीर मानसिक रोग है जो सीधे तौर पर व्यक्ति के सोचने, समझने और दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। इस बीमारी की सबसे डरावनी स्थिति तब होती है जब मरीज को वास्तविकता और कोरी कल्पना के बीच का अंतर समझ आना बंद हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति को अक्सर ऐसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं या ऐसी चीजें दिखाई देने लगती हैं जिनका हकीकत में कोई वजूद नहीं होता। कई बार मरीजों के मन में यह गहरा शक बैठ जाता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है या उनके खिलाफ कोई जानलेवा साजिश रची जा रही है।

Schizophrenia से युवाओं को सबसे ज्यादा खतरा

चिकित्सकीय आंकड़ों और एक्सपर्ट्स की मानें तो सिजोफ्रेनिया के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य तनाव या मूड स्विंग्स जैसे लगते हैं, जिसके कारण लोग इसे पहचान नहीं पाते और इलाज में देरी हो जाती है। यह बीमारी ज्यादातर किशोरावस्था के अंतिम दिनों में या युवावस्था में दस्तक देती है। आमतौर पर 16 से 30 वर्ष की उम्र के बीच इसके लक्षण उभरकर सामने आते हैं, जिसमें पुरुषों में यह समस्या थोड़ी जल्दी और महिलाओं में थोड़ी अधिक उम्र में देखी जाती है। इसके मुख्य कारणों में आनुवंशिक (जेनेटिक) वजहें, दिमाग में होने वाले केमिकल बदलाव, अत्यधिक मानसिक तनाव, नशीली चीजों का सेवन और गर्भावस्था के दौरान की कुछ जटिलताएं शामिल हैं।

दिवाली से पहले घर से निकाल फेंकें ये सामान, वरना नहीं होगा मां लक्ष्मी का आगमन; देखें पूरी लिस्ट | diwali-2026-date-laxmi-puja-shubh-muhurat-remove-unlucky-items-vastu-tips
दिवाली से पहले घर से निकाल फेंकें ये सामान, वरना नहीं होगा मां लक्ष्मी का आगमन; देखें पूरी लिस्ट

यह ‘डबल पर्सनालिटी’ या कोई हिंसक पागलपन नहीं है

समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करते हुए डॉ. सामंत दर्शी ने स्पष्ट किया कि सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) को ‘दोहरा व्यक्तित्व’ यानी स्प्लिट पर्सनालिटी समझना पूरी तरह गलत है। चिकित्सा विज्ञान में डबल पर्सनालिटी को ‘डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर’ (DID) कहा जाता है, जो एक अलग बीमारी है। फिल्मों और सोशल मीडिया पर अक्सर सिजोफ्रेनिया के मरीजों को सनकी या हिंसक दिखाया जाता है, जबकि हकीकत में वे किसी के लिए खतरा नहीं होते। इसके विपरीत, वे खुद अपने दिमाग में चल रहे डर और समाज के भेदभावपूर्ण व्यवहार से पीड़ित होते हैं। सही समय पर एंटीसाइकोटिक दवाओं, काउंसलिंग और थेरेपी की मदद से इस स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

इलाज में देरी डाल सकती है मुसीबत में

इस बीमारी में सबसे बड़ी चूक तब होती है जब लोग लोकलाज या डर के कारण मनोचिकित्सक के पास जाने से बचते हैं। इलाज में देरी होने से मरीज सामाजिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाता है और उसके निजी व पेशेवर रिश्ते टूटने लगते हैं। डॉ. दर्शी कहते हैं कि Schizophrenia बीमारी कोई उम्मीद खत्म होने का नाम नहीं है; दुनिया भर में लाखों लोग सिजोफ्रेनिया के बावजूद नियमित मेडिकल सपोर्ट से नौकरियां कर रहे हैं और सफल पारिवारिक जीवन जी रहे हैं। इस रिकवरी में परिवार की भूमिका सबसे अहम है। अगर परिवार मरीज को ‘पागल’ समझने के बजाय उसकी बातों को धैर्य से सुने, समय पर दवाइयां दे और उसे भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करे, तो मरीज का आत्मविश्वास तेजी से लौटता है।

ट्विशा शर्मा मामले का सच

ट्विशा शर्मा मामले में सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) का जिक्र तब आया जब उनके ससुराल पक्ष ने दावा किया कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं और उनका सिजोफ्रेनिया का इलाज चल रहा था। दूसरी ओर, ट्विशा के मायके वालों ने इन सभी दावों को मनगढ़ंत और झूठा बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है और आधिकारिक रूप से किसी भी मानसिक बीमारी की पुष्टि नहीं की गई है। इस बीच, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सख्त लहजे में कहना है कि बिना किसी ठोस मेडिकल रिपोर्ट या पेशेवर डॉक्टर की पुष्टि के किसी भी व्यक्ति को मानसिक रोगी करार देना बेहद असंवेदनशील और गलत प्रथा है।

शरद पूर्णिमा की रात में उल्लू दिखना क्यों माना जाता है मां लक्ष्मी की कृपा? जानें रहस्य

Miyazaki Mango: ₹3 लाख प्रति किलो वाला मियाजाकी आम अब भारत के बगीचों में, जानें घर पर उगाने का पूरा तरीका

दिन की लू से भी ज्यादा खतरनाक है ‘वार्म नाइट्स’, डॉक्टरों ने दी हार्ट अटैक और स्ट्रोक की चेतावनी

सेहत, फिटनेस, फैशन, ब्यूटी और रिलेशनशिप से जुड़ी आसान और उपयोगी जानकारी आपकी बेहतर लाइफस्टाइल के लिए।

शरद पूर्णिमा पर किस विधि से करें मां लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा? नोट करें आवश्यक सामग्री और मंत्र | sharad-purnima-2026-date-shubh-muhurat-puja-samagri-vidhi-kheer-timing
शरद पूर्णिमा पर किस विधि से करें मां लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा? नोट करें आवश्यक सामग्री और मंत्र

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now