चंडीगढ़, 19 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। देशभर में पड़ रही प्रचंड गर्मी और 47 डिग्री के टॉर्चर के बीच अब ‘वार्म नाइट्स’ (Warm Nights) यानी रात की गर्मी ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) की रिसर्च के मुताबिक, रात में तापमान कम न होने से शरीर को रिकवरी का मौका नहीं मिलता, जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
मई के महीने में उत्तर और मध्य भारत समेत देश के कई हिस्से भयंकर रूप से तप रहे हैं। जहां दिन का पारा 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है, वहीं अब एक ऐसा नया खतरा सामने आया है जिस पर अमूमन लोग ध्यान नहीं देते। डॉक्टर अब सिर्फ दोपहर की लू से ही नहीं, बल्कि सूरज ढलने के बाद शुरू होने वाली ‘वार्म नाइट्स’ यानी गर्म रातों को लेकर भी अलर्ट कर रहे हैं। आम धारणा है कि रात होते ही गर्मी से राहत मिलती है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण अब रातें भी उबल रही हैं, जिससे इंसानी शरीर को संभलने का मौका ही नहीं मिल रहा है।
एनआईएच की रिसर्च: दिल और दिमाग के लिए बेहद घातक
अमेरिका के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा 1993 से 2015 के बीच किए गए एक दीर्घकालिक शोध में बेहद डरावनी बातें सामने आई हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहले गर्मी के खतरों का आकलन सिर्फ दिन के तापमान से होता था, लेकिन अब साफ हो गया है कि रात का बढ़ता तापमान मृत्यु दर को सीधे प्रभावित करता है। जब रात में भी मौसम ठंडा नहीं होता, तो शरीर लगातार तनाव (Stress) की स्थिति में रहता है। इसके कारण सोते समय अचानक स्ट्रोक आना या कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डॉक्टर ने दी बड़ी चेतावनी
दिल्ली के सीके बिड़ला हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन कंसलटेंट डॉ. अमित प्रकाश सिंह बताते हैं कि इंसानी शरीर का सामान्य तापमान लगभग 36.9 डिग्री सेल्सियस होता है। दिनभर पसीना बहाकर शरीर खुद को ठंडा रखता है, लेकिन रात का समय अंगों की मरम्मत और रिकवरी के लिए होता है। डॉ. अमित के अनुसार, जब कमरा या बाहरी वातावरण रात में भी गर्म रहता है, तो दिल और ब्लड सर्कुलेशन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका सबसे पहला और सीधा हमला हमारी नींद पर होता है, जिससे घबराहट, चिड़चिड़ापन, इम्यून सिस्टम का कमजोर होना और ब्लड प्रेशर बढ़ना लाजमी है।
इन मरीजों को है सबसे ज्यादा खतरा, ऐसे करें बचाव
गर्म रातों का सबसे बुरा असर समाज के संवेदनशील तबके पर पड़ता है। बुजुर्गों, नवजात बच्चों, अस्थमा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के शरीर में तापमान को खुद से नियंत्रित करने की क्षमता कम होती है, इसलिए इन्हें विशेष सुरक्षा की दरकार है। डॉक्टरों का कहना है कि वार्म नाइट्स के इस जानलेवा असर से बचने के लिए लोग रात को सोने से पहले हल्का और सुपाच्य भोजन करें। सोने से ठीक पहले ठंडे या सामान्य पानी से स्नान करना शरीर के तापमान को तुरंत गिराता है। इसके अलावा, सूती कपड़े पहनें, कमरे को वेंटिलेटेड या ठंडा रखें और रात को भी पर्याप्त मात्रा में पानी पीकर खुद को हाइड्रेट रखें।
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