Emergency Sikh Honour Ceremony: Those who served jail time will be honoured greatly!: इमरजेंसी सिख सम्मान समारोह (Emergency Sikh Honour Ceremony) हरियाणा में 26 जून 2025 को आयोजित होगा, जिसमें 1975 की इमरजेंसी (Emergency 1975) के दौरान जेल काटने वाले सिखों और उनके परिवारों को सम्मानित किया जाएगा।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने बताया कि यह समारोह लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को श्रद्धांजलि है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित कई बड़े नेता इस आयोजन में शामिल होंगे। यह पहल इतिहास को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का प्रयास है।
इमरजेंसी का काला अध्याय और सिखों का संघर्ष Emergency Sikh Honour Ceremony
25 जून 1975 को तत्कालीन सरकार ने इमरजेंसी (Emergency 1975) लागू कर लोकतंत्र (Democracy) को कुचल दिया था। इस दौरान सिख समुदाय सहित कई लोगों ने अपनी आवाज़ बुलंद की और जेल की यातनाएँ (Prison Ordeal) सही।
जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि उस दौर में सिखों ने तानाशाही के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। 24 जून को गुरुद्वारों में अरदास और अखंड पाठ (Akhand Path) होंगे, जिसमें संगत लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ी गई लड़ाई को याद करेगी। यह आयोजन उस बलिदान को सलाम करने का अवसर है।
सम्मान समारोह में बड़े नेताओं की मौजूदगी
26 जून को होने वाले इमरजेंसी सिख सम्मान समारोह (Emergency Sikh Honour Ceremony) में उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने लोकतंत्र के लिए जेल में समय बिताया। इसमें पूर्व सांसद, सामाजिक कार्यकर्ता (Social Activists), और बुजुर्ग शामिल होंगे।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी, मनोहर लाल, और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को निमंत्रण भेजा गया है। झींडा ने बताया कि यह समारोह हरियाणा सिख गुरुद्वारा कमेटी (HSGMC) के अन्य कार्यक्रमों के कारण 25 की बजाय 26 जून को होगा। यह आयोजन सिख समुदाय के योगदान को रेखांकित करेगा।
लोकतंत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत
यह समारोह न केवल अतीत को याद करने का अवसर है, बल्कि युवाओं को लोकतंत्र (Democracy) की कीमत समझाने का भी प्रयास है।
झींडा ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान सिखों ने जो बलिदान दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। इस आयोजन से नई पीढ़ी को सिख समुदाय के संघर्ष और लोकतंत्र की रक्षा (Defense of Democracy) के महत्व का पता चलेगा। हरियाणा सरकार और केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी इस समारोह को ऐतिहासिक बनाएगी। यह कदम सामुदायिक एकता और ऐतिहासिक जागरूकता (Historical Awareness) को बढ़ावा देगा।










