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Farmers Protest: किसान आंदोलन हरियाणा में फिर गरमाया मुद्दा, गांव-गांव जलेंगे पुतले

On: जुलाई 8, 2025 8:40 पूर्वाह्न
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Farmers Protest: किसान आंदोलन हरियाणा में फिर गरमाया मुद्दा, गांव-गांव जलेंगे पुतले
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Farmers Protest: The issue of farmers’ movement has heated up again in Haryana, effigies will be burnt in every village: किसान आंदोलन (Farmers Protest) एक बार फिर हरियाणा में सुर्खियों में है। राज्य के किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं।

पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि 11 से 19 जुलाई तक गांव-गांव में भाजपा सरकार के पुतले जलाए जाएंगे (Effigy Burning)。 यह आंदोलन किसानों की नौ मांगों (Farmers Demands) को लेकर है, जिन्हें वे लंबे समय से उठा रहे हैं। आइए, इस आंदोलन की वजह और मांगों को विस्तार से समझते हैं।

पुतले जलाने का ऐलान: क्यों भड़के किसान? Farmers Protest

हरियाणा के किसान खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। पगड़ी संभाल जट्टा समिति के प्रदेशाध्यक्ष मनदीप नथवान ने बताया कि किसानों को खाद, पानी और मुआवजे (Compensation) जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।

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ट्यूबवेल कनेक्शन (Tubewell Connection) के लिए समय पर राशि जमा करने के बावजूद, भ्रष्टाचार (Corruption) के कारण कनेक्शन जारी नहीं हो रहे। इससे किसानों में गुस्सा है।

11 से 19 जुलाई तक हर गांव में सरकार के पुतले जलाए जाएंगे। इसके बाद 21 जुलाई को तहसील और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन (Demonstration) कर अधिकारियों को मांगपत्र सौंपा जाएगा। यह आंदोलन सरकार को किसानों की समस्याओं (Farmers Issues) की गंभीरता समझाने का प्रयास है। नथवान का कहना है कि सरकार की नीतियां किसान विरोधी (Anti-Farmer Policies) हैं, जिसके खिलाफ यह कदम जरूरी हो गया है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों की नौ मांगें स्पष्ट और जायज हैं। वे चाहते हैं कि असली डीएपी खाद और नहरों में पर्याप्त पानी (Irrigation Water) उपलब्ध हो।

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बिजली बिलों में बढ़ोतरी (Electricity Bill Hike) वापस ली जाए। भिवानी, हिसार, यमुनानगर जैसे जिलों में एचटी लाइनों के लिए उचित मुआवजा (Compensation) मिले। इसके अलावा, नई खेती नीति (New Agriculture Policy) रद्द हो और मेवात, झज्जर जैसे क्षेत्रों में चल रहे आंदोलनों की मांगें पूरी हों।

किसान गुंडागर्दी और नशाखोरी (Crime and Drug Abuse) पर रोक की मांग भी कर रहे हैं। साथ ही, शामलात जमीन का हक काश्तकारों को मिले और एमएसपी की गारंटी (MSP Guarantee) दी जाए। किसान मजदूरों को कर्ज मुक्त (Debt-Free Farmers) करने की मांग भी जोर पकड़ रही है। ये मांगें न केवल किसानों, बल्कि पूरे ग्रामीण समाज के हित में हैं।

समाज और सरकार के लिए संदेश

यह किसान आंदोलन (Farmers Protest) हरियाणा के ग्रामीण समाज की नब्ज को दर्शाता है। किसान देश की रीढ़ हैं, और उनकी समस्याओं का समाधान जरूरी है। यह आंदोलन सरकार को यह याद दिलाता है कि किसान विरोधी नीतियां (Anti-Farmer Policies) लंबे समय तक नहीं चल सकतीं। समाज को भी किसानों के साथ एकजुट होने की जरूरत है।

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पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन (Peaceful Protest) का सम्मान करें। किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार हो, ताकि यह आंदोलन सकारात्मक परिणाम दे। यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि एक जागरूक समाज ही बदलाव ला सकता है। आइए, किसानों की इस लड़ाई में उनका साथ दें।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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