Haryana BPL Card Issue: Chaos over BPL card in Haryana: More than 9 lakh families out of the list, big allegations on the government!: चंडीगढ़ | हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में बीपीएल कार्ड को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और बीपीएल लिस्ट से लाखों परिवारों को बाहर करने का मुद्दा गरमाया।
सत्र में हुई तीखी बहस ने सबका ध्यान खींचा। आइए, इस खबर में जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है और सरकार ने क्या जवाब दिया।
बीपीएल कार्ड पर विपक्ष का हमला Haryana BPL Card Issue
विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान गरीबों को लुभाने के लिए बीपीएल लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े गए। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म हुए, लाखों परिवारों को इस लिस्ट से बाहर कर दिया गया। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सवाल उठाया कि जनवरी 2024 से 31 जुलाई 2025 के बीच कितने नए बीपीएल कार्ड बने और कितने परिवारों को लिस्ट से हटाया गया।
साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि बीपीएल कार्ड रद्द करने का आधार क्या है। जवाब में विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पवार ने बताया कि इस दौरान 8 लाख 57 हजार परिवारों को बीपीएल लिस्ट में शामिल किया गया, जबकि 9 लाख से ज्यादा परिवारों को हटा दिया गया। अब 22 अगस्त 2025 तक बीपीएल परिवारों की संख्या घटकर 41 लाख 93,669 रह गई है।
सरकार पर गुपचुप सर्वे का आरोप
विपक्ष ने सरकार पर और भी गंभीर इल्जाम लगाए। उनका कहना था कि सरकार ने चुपके से सर्वे करवाया ताकि गरीब परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ न मिले। विधायक केहरवाला ने आरोप लगाया कि चुनाव में फायदा लेने के लिए बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या बढ़ाई गई और नतीजे आने के बाद इसे कम कर दिया गया। इन आरोपों ने सदन में माहौल को और गर्म कर दिया।
सीएम सैनी का करारा जवाब
बढ़ते विवाद के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभाला और विपक्ष को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बीपीएल के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा था। सरकार ने पारदर्शी तरीके से काम किया और पोर्टल पर लोगों से उनकी आय की जानकारी ली।
जिन परिवारों की सालाना आय 1,80,000 रुपये से कम थी, उन्हें बीपीएल कैटेगरी में रखा गया। ज्यादा आय वाले परिवार अपने आप लिस्ट से बाहर हो गए। सीएम ने दावा किया कि सरकार ने पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रखा।











