चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने सेना से सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य में पहली बार गठित की जा रही ‘हरियाणा राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल’ यानी एचएसडीआरएफ (HSDRF) में अग्निवीरों को प्राथमिकता दी जाएगी। वर्ष 2022 और 23 में भर्ती हुए 2227 अग्निवीरों का पहला बैच रिटायरमेंट की कगार पर है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय युवाओं के लिए रोजगार की नई उम्मीद लेकर आया है।
क्या है एचएसडीआरएफ और क्यों है इसकी जरूरत
जिस तरह केंद्र स्तर पर एनडीआरएफ काम करती है, ठीक उसी तर्ज पर हरियाणा अपनी खुद की विशेष फोर्स तैयार कर रहा है। चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने इस योजना की समीक्षा की।
इस फोर्स का मुख्य काम बाढ़, भूकंप या किसी भी मानव निर्मित आपदा के दौरान लोगों की जान बचाना होगा। चूंकि अग्निवीर पहले से ही सेना की कठिन ट्रेनिंग और अनुशासन से गुजरे होते हैं, इसलिए आपदा प्रबंधन के लिए वे सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
1149 पदों पर होगी बंपर भर्ती

गृह विभाग ने इस नई फोर्स को मजबूती देने के लिए एक पूरी बटालियन को मंजूरी दे दी है। इस बटालियन में कुल 1149 पद होंगे। बैठक में डॉ सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार ही इस फोर्स का गठन होगा।
इसमें शामिल होंगी ये सुविधाएं:
विशेष वर्दी और अत्याधुनिक उपकरण
डेडिकेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर और बिल्डिंग
वरिष्ठ स्तर का नेतृत्व और कमांड सेंटर
हर डिवीजन में तैनात होगी क्विक रिस्पांस टीम
सरकार की योजना केवल फोर्स बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि उसे जमीन पर उतारने की भी है। डॉ मिश्रा ने बताया कि राज्य के सभी डिवीजनों में एक एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम यानी क्यूआरटी का गठन किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि किसी भी जिले में आपात स्थिति बनने पर चंडीगढ़ से आदेश का इंतजार किए बिना स्थानीय टीम तुरंत एक्शन ले सकेगी।
भोंडसी में पहले से तैयार है मजबूत बेस
बैठक में जानकारी दी गई कि हरियाणा के पास पहले से ही आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षित जवानों का एक मजबूत आधार मौजूद है। भोंडसी स्थित आईआरबी की पहली बटालियन नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है। यहां 594 पुलिसकर्मी ऐसे हैं जिन्हें ध्वस्त इमारतों में सर्च ऑपरेशन चलाने और बाढ़ राहत कार्यों की विशेष ट्रेनिंग मिली हुई है।
इतना ही नहीं ये जवान केमिकल, बायोलॉजिकल और न्यूक्लियर यानी सीबीआरएन हमलों से निपटने में भी सक्षम हैं। अब नई भर्ती और अग्निवीरों के आने से इस फोर्स की ताकत दोगुनी हो जाएगी।
विभागों को प्रस्ताव भेजने के निर्देश
डॉ सुमिता मिश्रा ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द एक व्यापक प्रस्ताव तैयार करें। इसमें समय सीमा, संसाधनों की आवश्यकता और ट्रेनिंग प्रोग्राम का पूरा ब्यौरा होना चाहिए। सरकार का मानना है कि एक पेशेवर डिजास्टर फोर्स होने से राज्य में जन सुरक्षा और मजबूत होगी।
HSDRF में भर्ती के लिए क्या चाहिए योग्यता?

हरियाणा की अपनी फोर्स के लिए तैयारी शुरू हरियाणा सरकार द्वारा 1149 पदों वाली राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी HSDRF के गठन को मंजूरी देने के बाद युवाओं में भर्ती को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। विशेष रूप से अग्निवीरों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। चूंकि यह बल सीधे तौर पर बाढ़, भूकंप और आपात स्थितियों से निपटेगा, इसलिए इसके शारीरिक और चिकित्सा मापदंड सामान्य पुलिस भर्ती से थोड़े सख्त और अलग हो सकते हैं। यहां हम आपको उन संभावित योग्यताओं के बारे में बता रहे हैं जो इस भर्ती के लिए अनिवार्य हो सकती हैं।
शारीरिक मापदंड (PMT) क्या हो सकता है
आपदा प्रबंधन के लिए शारीरिक रूप से मजबूत जवानों की जरूरत होती है। हरियाणा पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों के मानकों के आधार पर HSDRF के लिए निम्नलिखित शारीरिक मानक अपेक्षित हैं।
ऊंचाई (Height): सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए लंबाई 170 सेंटीमीटर होना अनिवार्य हो सकता है। वहीं आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट मिल सकती है जिसके तहत 168 सेंटीमीटर लंबाई मान्य होगी। अग्निवीर पहले से ही सेना के मानकों को पूरा करते हैं इसलिए उनके लिए यह बाधा नहीं होगी।
सीना (Chest): पुरुष अभ्यर्थियों के लिए सीना बिना फुलाए 83 सेंटीमीटर और फुलाने के बाद कम से कम 87 सेंटीमीटर होना चाहिए। इसमें कम से कम 4 सेंटीमीटर का फैलाव जरूरी होता है।
फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट (PST) और विशेष योग्यता
शारीरिक माप के अलावा उम्मीदवारों को अपनी स्टैमिना साबित करनी होगी।
दौड़: उम्मीदवारों को 2.5 किलोमीटर की दौड़ 12 मिनट के भीतर पूरी करनी पड़ सकती है।
तैराकी (Swimming): चूंकि HSDRF का मुख्य काम बाढ़ राहत का होता है, इसलिए तैराकी जानना इस भर्ती के लिए एक ‘गेम चेंजर’ योग्यता हो सकती है। जो उम्मीदवार तैराकी में कुशल होंगे, उन्हें विशेष वरीयता दी जाएगी।
ड्राइविंग: भारी वाहन चलाने का लाइसेंस और अनुभव रखने वालों को तकनीकी विंग में प्राथमिकता मिल सकती है।
अग्निवीरों को कहां मिलेगा फायदा
इस भर्ती का सबसे बड़ा लाभ अग्निवीरों को उनकी ट्रेनिंग की वजह से मिलेगा। अग्निवीर सेना में 4 साल के दौरान कठिन शारीरिक प्रशिक्षण, हथियार चलाने और अनुशासन का पाठ पढ़ चुके होते हैं।
सरकार का मानना है कि अग्निवीरों का ‘मेडिकल स्टैंडर्ड’ (A-One Shape) पहले से ही बहुत ऊंचा होता है। उनकी दृष्टि 6/6 होती है और वे कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्याओं से मुक्त होते हैं। इसलिए, मेडिकल जांच और बेसिक ट्रेनिंग में सरकार का समय और पैसा दोनों बचेगा। उन्हें केवल ‘डिजास्टर मैनेजमेंट’ की विशेष ट्रेनिंग देने की जरूरत होगी।
शैक्षिक योग्यता और आयु सीमा
सामान्यतः कांस्टेबल स्तर के पदों के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य होता है। वहीं तकनीकी पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा मांगा जा सकता है।
आयु सीमा: आम तौर पर आयु सीमा 18 से 25 वर्ष होती है। लेकिन अग्निवीरों के लिए हरियाणा सरकार ने पहले ही आयु सीमा में 3 से 5 वर्ष की छूट देने की घोषणा कर रखी है। इसका मतलब है कि सेना से लौटने के बाद भी वे आराम से इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे।
चयन प्रक्रिया का संभावित स्वरूप
भर्ती प्रक्रिया में सबसे पहले शारीरिक माप और दौड़ होगी। इसके बाद लिखित परीक्षा हो सकती है जिसमें आपदा प्रबंधन, तर्कशक्ति और सामान्य ज्ञान के प्रश्न होंगे। अग्निवीरों के लिए लिखित परीक्षा में बोनस अंक या छूट का प्रावधान भी संभव है। अंत में मेडिकल चेकअप और दस्तावेजों की जांच के बाद फाइनल मेरिट लिस्ट बनेगी।













