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Haryana News: हरियाणा में मुस्लिम टीचर ने पढ़ाया कलमा: बच्चों के गुनगुनाने से हुआ खुलासा, स्कूल में मचा हंगामा

On: मई 18, 2025 9:10 पूर्वाह्न
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Haryana News: हरियाणा में मुस्लिम टीचर ने पढ़ाया कलमा: बच्चों के गुनगुनाने से हुआ खुलासा, स्कूल में मचा हंगामा
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Haryana News: Muslim teacher taught Kalma in Haryana: Revealed by humming of children, uproar in school: हरियाणा के पानीपत जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्थानीय समुदाय में हलचल मचा दी। सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में एक मुस्लिम महिला टीचर (Muslim teacher) ने आठवीं कक्षा के बच्चों को कक्षा में कलमा पढ़वाया।

यह बात तब उजागर हुई जब बच्चे घर पहुंचे और मासूमियत में कलमा गुनगुनाने लगे। परिजनों के कानों तक यह बात पहुंची तो मामला गरमा गया। आखिर क्या था यह पूरा विवाद (controversy)? आइए, इस घटना की तह तक जाते हैं और जानते हैं कि स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाया।

स्कूल में क्या हुआ था? Haryana News

पानीपत का सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल वर्ष 2002 से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए है। दो दिन पहले स्कूल की मॉर्निंग असेंबली के बाद कक्षा शुरू हुई।

आठवीं कक्षा में संस्कृत की शिक्षिका महजीब अंसारी, जिन्हें बच्चे माही मैडम के नाम से जानते थे, ने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। बताया जाता है कि इस दौरान उन्होंने बच्चों को कलमा (Kalma) पढ़ाया। यह बात बच्चों के लिए नई थी, और वे इसे उत्सुकता से सीख रहे थे।

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स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्चे अपने घर लौटे। घर पर खेलते-कूदते समय कुछ बच्चों ने कलमा गुनगुनाना शुरू किया। माता-पिता ने जब यह सुना तो उनके होश उड़ गए।

बच्चों से पूछताछ करने पर पता चला कि यह सब स्कूल में उनकी शिक्षिका ने सिखाया है। यह सुनते ही परिजनों में गुस्सा भड़क उठा, और उन्होंने तुरंत इस मामले को स्कूल प्रबंधन तक पहुंचाने का फैसला किया।

परिजनों का गुस्सा और स्कूल का रुख

अगले दिन परिजन स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रबंधन से इस घटना की शिकायत (complaint) की। उनका कहना था कि स्कूल में बच्चों को उनकी सहमति के बिना किसी विशेष धर्म की प्रार्थना या शिक्षण देना गलत है। मामला गंभीर होता देख स्कूल प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई की और शिक्षिका को बर्खास्त (dismissed) कर दिया। इस बीच, स्थानीय पुलिस को भी सूचना दी गई ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

पुलिस के सब-इंस्पेक्टर निवास ने मामले की जांच की। उन्होंने बताया कि बच्चों ने स्कूल में होने वाली प्रार्थनाओं के बारे में उत्सुकता दिखाई थी। इसी दौरान शिक्षिका ने उन्हें अपने धर्म की दो पंक्तियों के बारे में बताया, जिसे बच्चे गुनगुनाने लगे। पुलिस ने इसे एक सामान्य घटना माना और दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाया। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने शिक्षिका को हटाने का फैसला किया ताकि माहौल शांत रहे।

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समाज में उठे सवाल

यह घटना भले ही छोटी लगे, लेकिन इसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शिक्षकों को बच्चों को उनकी सहमति के बिना किसी धर्म की शिक्षा देनी चाहिए? क्या स्कूल प्रबंधन का शिक्षिका को तुरंत हटाने का फैसला सही था, या इसे और गहराई से जांचने की जरूरत थी? इस घटना ने शिक्षा और धर्म (religion) के बीच की बारीक रेखा को फिर से उजागर किया है।

कई अभिभावकों का मानना है कि स्कूल का माहौल सभी धर्मों के लिए समान होना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि शिक्षिका ने बच्चों की जिज्ञासा को शांत करने के लिए यह कदम उठाया होगा। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए बच्चे, जिनके लिए यह सब एक सामान्य सीखने की प्रक्रिया थी।

आगे क्या?

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्कूलों में बच्चों को किस तरह की शिक्षा दी जानी चाहिए। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें बच्चों की जिज्ञासा का सम्मान हो, लेकिन साथ ही सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का भी ख्याल रखा जाए।

पानीपत की इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है, बल्कि यह पूरे देश में शिक्षा और धर्म के बीच संतुलन पर बहस का विषय बन सकती है।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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