Haryana-Punjab water dispute: Chaos over water cut, Congress attacks BJP government: हरियाणा और पंजाब के बीच जल विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। पंजाब सरकार द्वारा भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाले पानी में कटौती के फैसले ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना बताते हुए हरियाणा की बीजेपी सरकार पर मजबूत पैरवी न करने का आरोप लगाया है। यह मामला अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है।
जल विवाद की जड़ में क्या है? Haryana-Punjab water dispute
पंजाब और हरियाणा के बीच पानी का बंटवारा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। हाल ही में पंजाब सरकार ने भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाले 9,500 क्यूसेक पानी को अचानक घटाकर 4,000 क्यूसेक कर दिया। इस कटौती से हरियाणा के कई जिलों में पेयजल और सिंचाई संकट की आशंका बढ़ गई है।
केंद्रीय ऊर्जा और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने इस मुद्दे पर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, ताकि दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाई जा सके।
कांग्रेस का बीजेपी पर हमला
कांग्रेस ने इस मामले में हरियाणा की बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया है। सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और जल समझौतों की खुलेआम अवमानना कर रही है।
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र और हरियाणा में बीजेपी की सरकार होने के बावजूद पानी का हक दिलाने में प्रशासनिक विफलता साफ दिख रही है। सैलजा ने चेतावनी दी कि अगर हरियाणा को उसका जायज हिस्सा नहीं मिला, तो गर्मी के इस मौसम में कई जिले गंभीर पेयजल संकट का सामना करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “हरियाणा कोई अहसान नहीं मांग रहा। यह हमारा हक है, और पंजाब को हर हाल में यह पानी देना होगा।
” हुड्डा ने बीजेपी सरकार पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के पक्ष में फैसले के बावजूद हरियाणा को उसका हिस्सा नहीं मिला।
इनेलो ने भी उठाई आवाज
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के नेता अभय चौटाला ने इस विवाद को हरियाणा के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तंज कसते हुए कहा कि वे सिर्फ धमकियां दे रहे हैं, जबकि हरियाणा सरकार खामोश है। चौटाला ने कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा किया और कहा कि दोनों पार्टियां हरियाणा के हितों की अनदेखी कर रही हैं।
हरियाणा के लिए क्या है खतरा?
पानी की कटौती का सबसे ज्यादा असर हरियाणा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में देखने को मिल सकता है। गर्मी के मौसम में पेयजल की कमी और खेती के लिए सिंचाई का संकट गहरा सकता है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी दी है। यह विवाद न केवल दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ा रहा है, बल्कि केंद्र सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
आगे क्या होगा?
यह मामला अब केंद्रीय स्तर पर पहुंच चुका है, और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की रिपोर्ट इस विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है। हरियाणा के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार उनके हक का पानी सुनिश्चित करेगी। इस बीच, सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जो इस मुद्दे को और गर्माएगा।










