Haryana Sikh Gurudwara Management Committee: Jagdish Jhinda’s spectacular victory: He became the new head of Haryana Sikh Gurudwara Committee: हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (HSGMC) के लिए 19 जनवरी 2025 को हुए चुनाव के बाद जगदीश झींडा (Jagdish Jhinda) को इसका पहला स्थायी प्रधान चुना गया है। कुरुक्षेत्र के गुरुद्वारा छठी पातशाही में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 49 सदस्यों ने सर्वसम्मति से झींडा को यह जिम्मेदारी सौंपी।
इस मौके पर कार्यकारिणी का गठन भी किया गया, जिसमें नौ सह-नामांकित सदस्य शामिल किए गए। झींडा ने अपने संबोधन में गुरुद्वारा प्रबंधन (Gurdwara management) में पारदर्शिता, ऐतिहासिक गुरुद्वारों का संरक्षण, और सिख शिक्षा व संस्कृति (Sikh culture) को बढ़ावा देने का वादा किया। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर कुछ सदस्यों ने विरोध जताया, जिसने इस चयन को विवादों के घेरे में ला दिया। आइए, इस घटना को विस्तार से समझते हैं।
जगदीश झींडा का चयन और HSGMC चुनाव Haryana Sikh Gurudwara Management Committee
19 जनवरी 2025 को हुए HSGMC चुनाव (HSGMC election) में 40 सीटों के लिए कड़ा मुकाबला देखा गया। इसमें 22 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, जबकि झींडा के पंथक दल को 9, बलदेव सिंह कैम्पुरी के हरियाणा सिख पंथक दल (HSPD) को 6, और दीदार सिंह नलवी की सिख समाज संस्था को 3 सीटें मिलीं।
पूर्व तदर्थ प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल को कलांवाली सीट पर 1,771 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव के बाद कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में झींडा को सर्वसम्मति से प्रधान चुना गया। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास 32 सदस्यों का समर्थन है, जिसके चलते चुनाव की जरूरत नहीं पड़ी।
विवादों में घिरा जगदीश झींडा का चयन
जगदीश झींडा (Jagdish Jhinda) के प्रधान बनने की घोषणा के बाद 20 सदस्यों, जिनमें उत्तराधिकार सिंह नवी, बलदेव सिंह कमपुरा, और प्रकाश सिंह साहुवाला शामिल हैं, ने इस चयन का कड़ा विरोध किया।
इन सदस्यों ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए आरोप लगाया कि अस्थाई अध्यक्ष सरदार जोग सिंह को एक फोन कॉल के बाद झींडा को जबरदस्ती प्रधान घोषित किया गया। विरोधी नेताओं का कहना है कि सर्वसम्मति का दावा झूठा है और पारदर्शी चुनाव (transparent election) की प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया। इस विवाद ने सिख समुदाय में चर्चा को जन्म दिया है, और कई लोग इस मामले में निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।
झींडा की प्राथमिकताएं और वादे
बैठक से पहले जगदीश झींडा ने गुरुद्वारा छठी पातशाही में अरदास की और अपने समर्थकों के साथ इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने की तैयारी दिखाई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता गुरुद्वारा प्रबंधन (Gurdwara management) में पारदर्शिता लाना, ऐतिहासिक गुरुद्वारों का संरक्षण करना, और सिख शिक्षा व संस्कृति (Sikh culture) को बढ़ावा देना है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह सभी सदस्यों के साथ मिलकर काम करेंगे और सिख समुदाय की सेवा को प्राथमिकता देंगे। झींडा का यह दृष्टिकोण सिख समुदाय के लिए एक नई दिशा का संकेत देता है, लेकिन विरोध के चलते उनकी राह आसान नहीं होगी।
सिख समुदाय के लिए इसका महत्व
HSGMC का गठन हरियाणा में सिख गुरुद्वारों के प्रबंधन और सिख समुदाय की धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया गया है। जगदीश झींडा (Jagdish Jhinda) का चयन इस कमेटी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह पहली बार है जब स्थायी प्रधान चुना गया है।
यह कमेटी न केवल गुरुद्वारों के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी लेती है, बल्कि सिख समुदाय की शिक्षा, संस्कृति, और सामाजिक कल्याण को भी बढ़ावा देती है। झींडा के नेतृत्व में यह उम्मीद की जा रही है कि सिख समुदाय की एकता और विकास को नई दिशा मिलेगी।
विवादों से निपटने की चुनौती
विरोधी सदस्यों के आरोपों ने झींडा के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद सिख समुदाय में एकता को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए, झींडा के लिए जरूरी है कि वह सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करें और पारदर्शी तरीके से काम करें। सिख समुदाय के नेताओं को भी चाहिए कि वे आपसी मतभेदों को सुलझाकर गुरुद्वारा प्रबंधन (Gurdwara management) को मजबूत करें।
समुदाय और प्रशासन से अपील
जगदीश झींडा (Jagdish Jhinda) की नियुक्ति सिख समुदाय के लिए एक नई शुरुआत हो सकती है, बशर्ते विवादों को सुलझाया जाए।
समुदाय से अपील है कि वे एकजुट होकर गुरुद्वारों के विकास और सिख संस्कृति (Sikh culture) को बढ़ावा देने में सहयोग करें। प्रशासन को भी चाहिए कि वह इस मामले में निष्पक्षता बनाए रखे और सभी पक्षों को सुनने के बाद उचित कदम उठाए।













