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लेह से अंडमान तक कई भूकंप दर्ज, NCS की रिपोर्ट में चार अलग केंद्रों की पुष्टि

On: December 11, 2025 7:37 AM
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लेह से अंडमान तक कई भूकंप दर्ज, NCS की रिपोर्ट में चार अलग केंद्रों की पुष्टि
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गुरुवार तड़के देश के अलग-अलग हिस्सों में भूकंप के हल्के से मध्यम झटके दर्ज किए गए। लेह लद्दाख से लेकर अंडमान समुद्र तक आए इन भूकंपों की तीव्रता 3.4 से 4.3 के बीच रही। राहत की बात यह है कि किसी भी क्षेत्र से नुकसान की सूचना नहीं मिली।

राष्ट्रीय भूकंप केंद्र NCS के अनुसार, यह गतिविधि देर रात से लेकर तड़के तक अलग-अलग समय पर महसूस की गई, जो यह संकेत देती है कि भारतीय उपमहाद्वीप के आसपास भूगर्भीय प्लेटें लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।

कौन से क्षेत्रों में महसूस हुए झटके

NCS की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार:

  • अंडमान समुद्र में रात 12 बजकर 18 मिनट पर 4.2 तीव्रता

  • बंगाल की खाड़ी में 3 बजकर 38 मिनट पर 4.3 तीव्रता

  • उखरुल, मणिपुर में 4 बजकर 11 मिनट पर 3.4 तीव्रता

  • लेह लद्दाख में 4 बजकर 31 मिनट पर 3.7 तीव्रता

चारों ही भूकंपों की तीव्रता हल्की मानी जाती है, लेकिन बार-बार गतिविधि होना चिंता का विषय बन सकता है।

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लेह फिर बना भूकंप का केंद्र

लद्दाख का लेह क्षेत्र पहले से ही भूकंप जोन चार में आता है, जिसे मध्यम से गंभीर खतरे वाले इलाकों में गिना जाता है।

NCS के अनुसार:

  • भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही

  • झटके तड़के 4 बजकर 31 मिनट पर दर्ज हुए

  • साल 2025 में लेह क्षेत्र में अब तक 4.0 से अधिक तीव्रता वाले पांच भूकंप आ चुके हैं

भू-विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि लद्दाख हिमालयी क्षेत्र में प्लेट मूवमेंट ज्यादा सक्रिय रहता है, इसलिए यहां मध्यम झटके सामान्य माने जाते हैं, लेकिन इनकी आवृत्ति पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

मणिपुर में भी जमीन हिली

मणिपुर के उखरुल जिले में आए भूकंप की तीव्रता 3.4 दर्ज की गई।

महत्वपूर्ण तथ्य:

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  • भूकंप सुबह 4 बजकर 11 मिनट पर महसूस हुआ

  • केंद्र 40 किलोमीटर की गहराई पर था

  • यह इलाका भूकंप जोन पांच में आता है, जो देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है

पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से भूकंपीय गतिविधियों का हॉटस्पॉट माना जाता है जहां लगातार माइक्रो क्वेक आते रहते हैं।

बंगाल की खाड़ी और अंडमान समुद्र में भी गतिविधि बढ़ी

NCS का कहना है कि लगातार दो समुद्री क्षेत्रों में भूकंप दर्ज होना यह संकेत देता है कि इंडो ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन प्लेटों के बीच हलचल जारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • 4.2 और 4.3 तीव्रता के भूकंप हल्के माने जाते हैं

  • समुद्री भूकंप से कभी-कभी लो लेवल टेक्टोनिक दबाव बनता है

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  • ऐसी गतिविधियों पर सैटेलाइट और समुद्री सेंसर सिस्टम विशेष निगरानी रखते हैं

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को 2004 की सुनामी के बाद से बेहद संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है।

यह जानकारी क्यों महत्वपूर्ण है

  1. भारत तीन प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम क्षेत्र में आता है

  2. पूर्वोत्तर, हिमालयी क्षेत्र और अंडमान समुद्र देश के सबसे सक्रिय भूकंपीय ज़ोन हैं

  3. बार-बार आने वाले छोटे भूकंप बड़े झटकों की संभावित चेतावनी माने जाते हैं

  4. सरकार और वैज्ञानिक संस्थान इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य की तैयारी, मॉनिटरिंग और चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने में करते हैं

अब आगे क्या

NCS ने सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लिया है और आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में भूकंपीय दबाव के पैटर्न का अध्ययन किया जाएगा।
भू-विज्ञानियों का कहना है कि यह सामान्य भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन लगातार गतिविधि होने पर लोगों को जागरूक रहना चाहिए।

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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