Operation Sindoor a fitting reply to terrorism, Omar Abdullah’s blunt statement: भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले ने न केवल आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि पड़ोसी मुल्क को भी स्पष्ट संदेश दिया। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतंक की शुरुआत पाकिस्तान से होती है, और जवाब देने का यही सही तरीका था। आइए, इस ऑपरेशन और उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया को गहराई से समझते हैं।
Operation Sindoor: आतंक पर सटीक प्रहार: उमर अब्दुल्ला
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। इस कायराना हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों का हाथ माना जा रहा है। भारत ने इस बार चुप्पी तोड़ते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को एयर स्ट्राइक से तबाह कर दिया। यह कार्रवाई न केवल पहलगाम हमले का जवाब थी, बल्कि पिछले 30-35 सालों से जम्मू-कश्मीर में आतंक की आग फैलाने वालों के लिए भी एक कड़ा संदेश थी।
उमर अब्दुल्ला ने इस ऑपरेशन की तारीफ करते हुए कहा कि भारत ने बेहद सधे हुए तरीके से सिर्फ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, न कि पाकिस्तान के नागरिक या सैन्य क्षेत्रों को। उन्होंने दो टूक कहा, “जवाब देने का यही तरीका था। अगर पहलगाम में हमला न हुआ होता, तो यह दिन न आता। आतंक की शुरुआत वहां से हुई, यहां से नहीं।” उनकी यह बात भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाती है।
पड़ोसी मुल्क को शांति की पहल करनी होगी
उमर अब्दुल्ला ने साफ शब्दों में कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता, बल्कि शांति और स्थिरता की उम्मीद करता है। लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को अपनी बंदूकें नीचे रखनी होंगी। उन्होंने कहा, “पहले हमारे पड़ोसी मुल्क को शांत होना पड़ेगा, तभी यहां से बंदूकें नहीं चलेंगी।” यह बयान न केवल भारत की शांति की इच्छा को दर्शाता है, बल्कि पाकिस्तान को आतंकवाद के समर्थन की नीति पर पुनर्विचार करने की चेतावनी भी देता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट साफ दिख रही है। वह एलओसी पर गोलीबारी कर रहा है, लेकिन भारत पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक के संपर्क में हैं, ताकि स्थिति पर काबू रखा जा सके।
आपातकालीन बैठक: जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर नजर
ऑपरेशन सिंदूर के बाद उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान से सटे इलाकों में मौजूदा तनाव और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बुलाई गई है। यह कदम दर्शाता है कि भारत न केवल आतंक के खिलाफ आक्रामक है, बल्कि अपनी सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है।
उमर अब्दुल्ला का यह रुख जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भी एक आश्वासन है कि उनकी सुरक्षा और शांति सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही, यह केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को भी दर्शाता है।
भारत का संदेश: शांति, लेकिन सुरक्षा पहले
ऑपरेशन सिंदूर और उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यह कार्रवाई उन शहीदों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आतंक के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान दी। यह उन परिवारों के लिए संदेश है, जो आतंकवाद की वजह से अपनों को खो चुके हैं। और सबसे बढ़कर, यह आतंकियों और उनके समर्थकों के लिए चेतावनी है कि भारत अब हर हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा।
उमर अब्दुल्ला की दो टूक बातें और भारत की इस साहसिक कार्रवाई ने दुनिया को दिखा दिया है कि हम शांति चाहते हैं, लेकिन कमजोर नहीं हैं। यह ऑपरेशन भारत के संकल्प और ताकत का प्रतीक है, जो आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।












