Operation Sindoor: Himanshi Narwal’s emotional appeal, ‘Continue the fight until terrorism ends’: भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता को दुनिया के सामने रखा। इस सैन्य कार्रवाई पर करनाल की हिमांशी नरवाल ने भावुक प्रतिक्रिया दी।
उनके पति लेफ्टिनेंट विनय नरवाल हाल ही में आतंकी हमले में शहीद हुए थे। हिमांशी की अपील और उनकी कहानी देशवासियों के दिलों को छू रही है। आइए, जानते हैं उनकी भावनाओं और इस ऑपरेशन के महत्व को।
एक शहीद की पत्नी की भावनाएं Operation Sindoor
करनाल के सेक्टर-7 में रहने वाली हिमांशी नरवाल ने अपने पति लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि विनय ने सेना में इसलिए कदम रखा, क्योंकि वे चाहते थे कि देश में शांति बनी रहे और निर्दोषों की जान न जाए।
आतंकवाद और नफरत के खिलाफ उनकी लड़ाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने साकार किया। हिमांशी ने कहा, “मैं सरकार की आभारी हूं कि उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया। लेकिन यह लड़ाई यहीं नहीं रुकनी चाहिए। जब तक देश से आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, यह जंग जारी रहनी चाहिए।”
विनय और हिमांशी की अधूरी कहानी
हिमांशी और विनय की शादी को अभी कुछ ही दिन हुए थे। दोनों अपने हनीमून के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। बैसारन घाटी में घूमते वक्त आतंकियों ने विनय पर गोलीबारी की, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस दुखद घटना ने हिमांशी का जीवन बदल दिया, लेकिन उनके हौसले को डिगा नहीं पाया। विनय की शहादत ने उन्हें आतंकवाद के खिलाफ और मुखर कर दिया। उनकी अपील न केवल एक पत्नी की भावनाओं को दर्शाती है, बल्कि देश के हर नागरिक की आवाज बन गई है।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंक पर करारा प्रहार
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने 6-7 मई 2025 की रात पाकिस्तान और पीओके में आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों को मिसाइल हमलों से तबाह कर दिया।
इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रशिक्षण शिविर ध्वस्त हुए। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। हिमांशी का कहना है कि यह ऑपरेशन उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी।
देशवासियों के लिए प्रेरणा
हिमांशी नरवाल की कहानी और उनकी अपील देशवासियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दुख की इस घड़ी में भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया।
उनकी बातें हमें याद दिलाती हैं कि शांति और सुरक्षा के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। सरकार और सेना की इस कार्रवाई ने आतंकियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत उनकी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की जरूरत
हिमांशी की अपील सरकार और नागरिकों से है कि आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई तब तक जारी रखी जाए, जब तक देश पूरी तरह सुरक्षित न हो।
उनकी भावनाएं उन लाखों परिवारों की आवाज हैं, जिन्होंने आतंकवाद के कारण अपने प्रियजनों को खोया है। यह समय है कि हम सब मिलकर सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लें।










