Punjab-Haryana water dispute: Bhagwant Mann leaves for Nangal Dam, AAP workers hold BBMB chairman hostage: पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार, 8 मई 2025 को नंगल डैम पहुंचे, जहां भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के चेयरमैन को आम आदमी पार्टी (AAP) कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर बंधक बनाया।
यह विवाद दोनों राज्यों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। आइए, इस तनाव की पूरी कहानी और इसके निहितार्थों को समझें।
नंगल डैम पर बढ़ा तनाव Punjab-Haryana water dispute
पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। ताजा घटनाक्रम में बुधवार रात नंगल डैम पर स्थिति तब बिगड़ गई, जब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के एक अधिकारी ने कथित तौर पर बांध से जबरन पानी छोड़ने की कोशिश की।
इस कदम को पंजाब ने अपने हितों के खिलाफ माना, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने उक्त अधिकारी को हिरासत में ले लिया। गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी के साथ, स्थिति का जायजा लेने नंगल डैम पहुंचे। इसी बीच, AAP कार्यकर्ताओं ने BBMB चेयरमैन मनोज त्रिपाठी को बंधक बनाने की कोशिश की, जिससे तनाव और बढ़ गया।
पंजाब विधानसभा का कड़ा रुख
पंजाब विधानसभा ने 5 मई 2025 को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, जिसमें साफ कहा गया कि हरियाणा को कोई अतिरिक्त पानी नहीं दिया जाएगा।
विधानसभा ने यह भी चेतावनी दी कि BBMB को पंजाब सरकार पर अपने फैसले थोपने का अधिकार नहीं है। यह प्रस्ताव पंजाब की जनता और किसानों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम माना जा रहा है, क्योंकि पानी की कमी से राज्य का कृषि क्षेत्र पहले ही प्रभावित है। पंजाब का कहना है कि हरियाणा को पहले से ही पर्याप्त पानी मिल रहा है, और अतिरिक्त पानी देना संभव नहीं है।
हरियाणा की स्थिति
हरियाणा, जो नंगल डैम और भाखड़ा ब्यास प्रणाली पर निर्भर है, का दावा है कि उसे अपने हिस्से का पानी नहीं मिल रहा। राज्य के किसान और शहरी क्षेत्र पानी की कमी से जूझ रहे हैं,
जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव गहरा गया है। BBMB, जो दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे का प्रबंधन करता है, इस विवाद में बीच में फंस गया है। चेयरमैन मनोज त्रिपाठी की मौजूदगी और AAP कार्यकर्ताओं की कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
जल विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ
पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद की जड़ें सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के निर्माण से जुड़ी हैं, जो दशकों से अधूरी है। दोनों राज्य पानी के बंटवारे पर सहमत नहीं हो पाए हैं,
और यह मुद्दा समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक तनाव का कारण बनता है। नंगल डैम, जो भाखड़ा ब्यास प्रणाली का हिस्सा है, इस विवाद का केंद्र रहा है। पंजाब का मानना है कि उसका पानी अन्य राज्यों को देना उसके किसानों के साथ अन्याय है, जबकि हरियाणा इसे अपने अधिकार के रूप में देखता है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह जल विवाद केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के किसानों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा है। पंजाब में पानी की कमी से धान और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जबकि हरियाणा में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा सकता है।
इस तनाव ने दोनों राज्यों के बीच सामाजिक एकता पर भी असर डाला है। BBMB और केंद्र सरकार पर इस मुद्दे का त्वरित और निष्पक्ष समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
नागरिकों के लिए सलाह
पंजाब और हरियाणा के नागरिकों से अपील है कि वे शांति बनाए रखें और इस संवेदनशील मुद्दे पर उत्तेजक बयानबाजी से बचें।
नंगल डैम और आसपास के क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। पानी के उपयोग में मितव्ययिता बरतें और जल संरक्षण को बढ़ावा दें। दोनों राज्यों की सरकारों से अनुरोध है कि वे बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझाएं।
पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद ने एक बार फिर दोनों राज्यों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। भगवंत मान की नंगल डैम यात्रा और AAP कार्यकर्ताओं की कार्रवाई ने इस तनाव को और बढ़ा दिया। यह समय है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि किसानों और नागरिकों के हित सुरक्षित रहें। शांति और सहयोग ही इस संकट का जवाब हो सकता है।












