Sonipat News: “Shocking terror in Sonipat: Monkeys bite 6 girl students in school, security crisis: हरियाणा के सोनीपत (Sonipat) में एक हैरान करने वाली और चिंताजनक घटना ने सबका ध्यान खींचा है! मुरथल अड्डा चौक पर स्थित सरकारी कन्या स्कूल में बंदरों का आतंक (monkey menace) इस कदर बढ़ गया है कि छात्राओं और शिक्षकों का स्कूल में रहना मुश्किल हो गया है।
बुधवार, 28 मई 2025 को एक बंदर ने एक-एक करके 6 छात्राओं पर हमला (attack on students) कर उन्हें घायल कर दिया। इस घटना (shocking incident) ने न केवल स्कूल में दहशत फैला दी, बल्कि अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भी गुस्सा और चिंता बढ़ा दी। घायल छात्राओं में से 5 को तुरंत सिविल अस्पताल (civil hospital) में उपचार (medical treatment) के लिए भेजा गया। आइए, इस लेख में हम आपको सोनीपत (Sonipat) के इस स्कूल की घटना, बंदरों की समस्या, और इससे निपटने के उपायों की पूरी जानकारी आसान और रोचक तरीके से बताते हैं।
सोनीपत: स्कूल में बंदरों का कहर Sonipat News
सोनीपत (Sonipat) के मुरथल अड्डा चौक पर स्थित सरकारी कन्या स्कूल में इन दिनों हालात ऐसे हैं कि कोई नहीं जानता कि कब और कहाँ से बंदर (monkey menace) क्लासरूम में घुस आएं और हमला (attack on students) कर दें। बुधवार को हुई इस घटना (shocking incident) में एक बंदर ने 6 छात्राओं को काट लिया।
डरी-सहमी छात्राओं ने चीखना-चिल्लाना शुरू किया और भागने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान बंदर ने और भी छात्राओं को निशाना बना लिया। हैरानी की बात यह है कि हमले के बाद भी बंदर स्कूल परिसर (school premises) से बाहर नहीं गया। वह स्कूल के एक कोने से दूसरे कोने तक भागता रहा, जिससे छात्राओं और शिक्षकों में दहशत (panic in school) का माहौल बन गया।
घायल छात्राओं का हाल और उपचार
इस भयावह घटना (shocking incident) में 6 छात्राएं घायल (injured students) हो गईं, जिनमें से 5 को तुरंत सिविल अस्पताल (civil hospital) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार (medical treatment) शुरू कर दिया है, और छात्राओं की हालत स्थिर बताई जा रही है।
लेकिन, इस घटना ने स्कूल की सुरक्षा (school safety) पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि अगर समय रहते बंदरों की समस्या (monkey problem) पर ध्यान दिया जाता, तो शायद यह नौबत न आती। सोनीपत (Sonipat) के इस स्कूल में पहले भी बंदरों के हमले की घटनाएं (monkey attacks) हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नगर निगम की लापरवाही का गुस्सा
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का गुस्सा नगर निगम (municipal corporation) की लापरवाही (negligence) पर फूट पड़ा है। स्कूल प्रबंधन और स्थानीय निवासियों ने कई महीनों से बंदरों को पकड़ने (catching monkeys) की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई सुनवाई (no action taken) नहीं हुई। नतीजा यह है कि दिन-ब-दिन बंदरों का आतंक (monkey menace) बढ़ता जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा (school safety) अब एक बड़ा मुद्दा बन गया है। अगर नगर निगम और प्रशासन (local administration) ने जल्दी कदम नहीं उठाया, तो ऐसी घटनाएं (monkey attacks) और बढ़ सकती हैं।
स्कूल में सुरक्षा के लिए क्या करें?
सोनीपत (Sonipat) के इस स्कूल की घटना (shocking incident) ने हम सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बंदरों की समस्या (monkey problem) से निपटने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। सबसे पहले, नगर निगम (municipal corporation) को तुरंत बंदरों को पकड़ने (catching monkeys) और उन्हें जंगल या सुरक्षित जगह (safe relocation) पर छोड़ने की व्यवस्था करनी चाहिए।
इसके अलावा, स्कूल परिसर (school premises) में जाली (protective nets) लगाना, सीसीटीवी कैमरे (CCTV cameras) इंस्टॉल करना, और सुरक्षा गार्ड (security guard) की तैनाती से इस समस्या को नियंत्रित (control measures) किया जा सकता है। अभिभावकों और छात्राओं से अपील है कि वे सतर्क (stay alert) रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि (suspicious activity) की सूचना तुरंत स्कूल प्रबंधन या पुलिस (report to police) को दें।
आगे का रास्ता क्या है?
यह घटना सोनीपत (Sonipat) के लिए एक चेतावनी है। स्कूल में बच्चों की सुरक्षा (school safety) से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। नगर निगम (municipal corporation) और स्थानीय प्रशासन (local administration) को तुरंत कार्रवाई (immediate action) करनी होगी ताकि बंदरों का आतंक (monkey menace) खत्म हो और छात्राएं बिना डर के पढ़ाई (safe learning environment) कर सकें।
स्कूल प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और सुरक्षा उपायों (safety measures) को मजबूत करना होगा। सोनीपत (Sonipat) के लोग अब प्रशासन से ठोस कदम (strict action) और अपडेट (latest update) का इंतजार कर रहे हैं। आइए, मिलकर इस समस्या का समाधान करें और बच्चों के लिए एक सुरक्षित माहौल (safe learning environment) बनाएं।











