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बांके बिहारी मंदिर में भोग व्यवस्था बाधित, वर्षों पुरानी परंपरा टूटी

On: दिसम्बर 16, 2025 5:22 अपराह्न
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बांके बिहारी मंदिर में भोग व्यवस्था बाधित, वर्षों पुरानी परंपरा टूटी
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वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक ऐसी स्थिति बनी, जिसने भक्तों और सेवायतों दोनों को चौंका दिया। मंदिर में वर्षों से चली आ रही परंपरा के विपरीत, उस दिन ठाकुर जी को सुबह का बाल भोग और रात का शयन भोग अर्पित नहीं हो सका। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मंदिर में भोग सेवा को ईश्वर की दैनिक पूजा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।

क्या होता है बांके बिहारी मंदिर में भोग का क्रम

श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन चार समय भोग अर्पित करने की परंपरा है
• बाल भोग सुबह के समय
• राजभोग दोपहर में
• उत्थापन भोग संध्या आरती से पहले
• शयन भोग रात्रि विश्राम से पूर्व

लाखों श्रद्धालु दर्शन के साथ साथ भोग प्रसाद की प्रतीक्षा करते हैं। सोमवार को बाल भोग और शयन भोग न लग पाने से यह क्रम अधूरा रह गया।

भोग न लगने के पीछे क्या कारण रहा

मामले की जानकारी सामने आने के बाद जो वजह उजागर हुई, उसने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर प्रबंधन के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी ने भोग निर्माण हेतु एक हलवाई की नियुक्ति की थी, जिसे लगभग 80 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाना तय है।

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सूत्रों के अनुसार, कई महीनों से हलवाई को वेतन नहीं मिला था। लगातार अनुरोध के बावजूद भुगतान न होने से नाराज होकर उसने भोग तैयार नहीं किया, जिससे ठाकुर जी को दो समय का भोग अर्पित नहीं हो सका।

पहले भी दी गई थी जानकारी

मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि हलवाई ने वेतन भुगतान को लेकर
• संबंधित अधिकारियों को
• भोग व्यवस्था देखने वाले प्रतिनिधि को
• और प्रबंधन से जुड़े लोगों को

कई बार अवगत कराया था। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अंततः इसका असर सीधे पूजा व्यवस्था पर पड़ा।

भोग प्रबंधन किसके जिम्मे है

हाई पावर्ड कमेटी के अनुसार, मंदिर में भोग और प्रसाद व्यवस्था की जिम्मेदारी मयंक गुप्ता को सौंपी गई है। वे ही हलवाई के माध्यम से दिन भर के भोग की व्यवस्था करते हैं।
सोमवार को जब सेवायतों को अर्पण के लिए भोग उपलब्ध नहीं हुआ, तब मामले की जांच शुरू की गई।

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पूछताछ के दौरान भुगतान न होने की बात सामने आई, जिसके बाद तत्काल भुगतान के निर्देश जारी किए गए।

मंदिर प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष

हाई पावर्ड कमेटी ने स्वीकार किया कि सूचना मिलने में देरी हुई।
कमेटी की ओर से कहा गया है कि
• बकाया वेतन शीघ्र दिया जाएगा
• भविष्य में भुगतान में देरी न हो इसके लिए नई व्यवस्था बनाई जाएगी
• भोग सेवा में किसी भी तरह की बाधा न आए, यह प्राथमिकता रहेगी

सेवायतों और भक्तों की प्रतिक्रिया

मंदिर के सेवायतों का साफ कहना है कि भोग ठाकुर जी का अधिकार है, इसे किसी भी प्रशासनिक या वित्तीय कारण से रोका नहीं जाना चाहिए।

वहीं, दर्शन के लिए आए भक्तों में भी निराशा देखने को मिली। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि
• भोग न लगना शुभ संकेत नहीं माना जाता
• यह परंपरा सदियों से चली आ रही है
• पहली बार ऐसा हुआ है, इसलिए चिंता स्वाभाविक है

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यह मामला क्यों अहम है

बांके बिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और व्यवस्था का प्रतीक है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि
• प्रशासनिक लापरवाही का असर धार्मिक परंपराओं पर भी पड़ सकता है
• पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था कितनी जरूरी है

आने वाले दिनों में भक्तों और सेवायतों की नजर इस पर रहेगी कि मंदिर प्रबंधन इस तरह की स्थिति दोबारा न बनने दे।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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