Will Indian-origin Anil Menon create new history in space NASA handed over the command of ISS to him: अनिल मेनन अंतरिक्ष यात्री के रूप में भारत का नाम एक बार फिर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने को तैयार है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारतवंशी अनिल मेनन को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उनके पहले मिशन की जिम्मेदारी सौंपी है। यह खबर न सिर्फ भारतवंशियों के लिए गर्व का पल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना हकीकत बन सकता है। आइए, जानते हैं अनिल मेनन की इस रोमांचक यात्रा और उनके मिशन की खास बातें।
Anil Menon: अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन मिशन
जून 2026 में अनिल मेनन रोस्कोस्मोस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान से ISS की ओर रवाना होंगे। उनके साथ रूस के अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना भी होंगे। कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च होने के बाद यह तिकड़ी करीब आठ महीने तक स्पेस स्टेशन पर रहेगी। इस दौरान अनिल फ्लाइट इंजीनियर और एक्सपीडिशन 75 के क्रू मेंबर के तौर पर काम करेंगे। वह वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी प्रदर्शनों के जरिए भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को और बेहतर बनाने में योगदान देंगे। ये प्रयोग न सिर्फ अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा देंगे, बल्कि मानवता के लिए भी फायदेमंद होंगे।
अनिल मेनन एक असाधारण शख्सियत
अनिल मेनन का जन्म 15 अक्टूबर 1976 को मिनियापोलिस में एक भारतीय-यूक्रेनी परिवार में हुआ। उनकी पत्नी अन्ना मेनन भी अंतरिक्ष की दुनिया में जानी-मानी हस्ती हैं, जो स्पेसएक्स में काम करती हैं और 2024 में पोलारिस डॉन मिशन में हिस्सा ले चुकी हैं। अनिल और अन्ना के दो बच्चे हैं, और यह जोड़ी अपने प्रोफेशनल और निजी जीवन में एक-दूसरे का पूरा साथ देती है। अनिल की कहानी मेहनत, जुनून और कुछ कर गुजरने की चाहत की मिसाल है।
शिक्षा और करियर
अनिल मेनन की शैक्षिक उपलब्धियां किसी को भी हैरान कर सकती हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से न्यूरोबायोलॉजी में स्नातक, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री, और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की डिग्री—इतना ही नहीं, उन्होंने इमरजेंसी मेडिसिन और एयरोस्पेस मेडिसिन में रेजीडेंसी भी पूरी की। अनिल यूनाइटेड स्टेट्स स्पेस फोर्स में कर्नल हैं और स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन रह चुके हैं। NASA के स्पेसएक्स डेमो-2 मिशन में भी उनकी अहम भूमिका रही। खाली समय में वह टेक्सास मेडिकल सेंटर में इमरजेंसी मेडिसिन प्रैक्टिस करते हैं और मेडिकल स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।
क्यों है यह मिशन अहम?
अनिल मेनन का यह मिशन न सिर्फ उनके लिए, बल्कि भारत और पूरी दुनिया के लिए गर्व का विषय है। उनके वैज्ञानिक प्रयोग भविष्य में मंगल और चंद्रमा जैसे मिशनों के लिए रास्ता तैयार करेंगे। यह मिशन भारतवंशियों को प्रेरित करेगा कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए वैश्विक मंच पर बड़े सपने देखें। अनिल मेनन अंतरिक्ष यात्री के रूप में न सिर्फ भारत का नाम रोशन करेंगे, बल्कि विज्ञान और मानवता की सेवा में भी योगदान देंगे।












