मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए मुकाबले में कप्तानी की बड़ी चूक सामने आई है। पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने केकेआर के कप्तान अजिंक्य रहाणे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब रोहित शर्मा मैदान पर आग उगल रहे थे, तब रहाणे ने अपने सबसे बड़े हथियार सुनील नारायण को आक्रमण से दूर रखा। रोहित ने महज 38 गेंदों में 78 रनों की विध्वंसक पारी खेली और रेयान रिकलटन के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 148 रन जोड़ दिए। हरभजन के अनुसार, रहाणे को पावरप्ले में ही नारायण से एक या दो ओवर करवाने चाहिए थे ताकि रोहित की लय को शुरुआत में ही तोड़ा जा सके।
‘नारायण का सही इस्तेमाल न करना बड़ी भूल’
जियोस्टार से बातचीत के दौरान हरभजन सिंह ने कप्तानी के स्तर को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने तर्क दिया कि सांख्यिकीय रूप से सुनील नारायण का रोहित शर्मा के खिलाफ पलड़ा हमेशा भारी रहा है, लेकिन रहाणे ने इस मनोवैज्ञानिक बढ़त का लाभ नहीं उठाया। हैरानी की बात यह रही कि नारायण ने मैच में अपने कोटे के पूरे 4 ओवर भी नहीं डाले। हरभजन ने स्पष्ट किया कि रोहित और रिकलटन ने बिना किसी दबाव के बल्लेबाजी की, क्योंकि केकेआर की रणनीति में वह पैनापन गायब था जो मुंबई को संकट में डाल सके। इस रणनीतिक विफलता ने केकेआर को मैच में काफी पीछे धकेल दिया।
शार्दुल ठाकुर सपाट पिच के ‘संकटमोचन’
एक तरफ जहां कप्तानी पर सवाल उठे, वहीं दूसरी ओर पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने शार्दुल ठाकुर के प्रदर्शन को सराहा। सपाट पिच और छोटी बाउंड्री वाले वानखेड़े में जहां गेंदबाज रन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, वहां शार्दुल ने 39 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके। पठान ने शार्दुल की ‘ग्रिप’ और ‘मेंटल स्ट्रेंथ’ की तारीफ करते हुए कहा कि वह बल्लेबाज के दबाव में कभी नहीं आते। शार्दुल लगातार अपनी उंगलियों का इस्तेमाल कर गेंद की गति और लेंथ में बदलाव करते रहे, जिसने बल्लेबाजों को गलती करने पर मजबूर कर दिया।
विविधता ने दिलाई सफलता
इरफान पठान के विश्लेषण के अनुसार, शार्दुल ठाकुर के पास भले ही 150 किमी/घंटा की रफ्तार या स्विंग न हो, लेकिन उनके पास ‘क्रॉस-सीम’ और ‘स्लोअर’ गेंदों का गजब का मिश्रण है। शार्दुल जानबूझकर बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने के लिए उकसाते हैं और अपनी चतुराई भरी लेंथ से उन्हें जाल में फंसा लेते हैं। पठान का मानना है कि इस तरह की पिचों पर जहां गेंदबाजों के लिए मदद कम होती है, वहां शार्दुल जैसे प्रयोगधर्मी गेंदबाज ही टीम के लिए सबसे बड़े मैच विनर साबित होते हैं।
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