Arrest of Haryana YouTuber Jyoti Malhotra Sensational case of spying for Pakistan know the inside story: हरियाणा के हिसार से एक चौंकाने वाली खबर ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। 33 वर्षीय यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी (espionage) करने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हिसार पुलिस ने 15 मई 2025 को ज्योति को उसके घर से हिरासत में लिया और कोर्ट में पेश कर 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया। यह मामला केवल ज्योति तक सीमित नहीं है; पिछले एक हफ्ते में हरियाणा और पंजाब से कुल 6 अन्य संदिग्ध जासूसों को भी गिरफ्तार किया गया है। आखिर क्या है इस सनसनीखेज मामले की सच्चाई? आइए, इस लेख में हम आपको इस पूरे प्रकरण की गहराई से जानकारी देते हैं, जो विश्वसनीय स्रोतों और ज्योतिषीय विशेषज्ञता पर आधारित है।
Jyoti Malhotra एक यूट्यूबर से जासूस तक का सफर
ज्योति मल्होत्रा, हिसार की न्यू अग्रसेन कॉलोनी की रहने वाली एक 33 वर्षीय अविवाहित महिला, जिसने बीए तक की पढ़ाई की है। वह सोशल मीडिया पर ‘ट्रैवल विद जो’ नाम से एक लोकप्रिय यूट्यूब चैनल चलाती है, जिसके 3 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। अपने चैनल पर वह देश-विदेश की यात्राओं के वीडियो शेयर करती है। पहले गुरुग्राम में एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाली ज्योति को कोविड महामारी के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद, उन्होंने ब्लॉगिंग और यूट्यूब को अपना करियर बनाया। लेकिन अब उन पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों (intelligence agencies) के लिए जासूसी करने का गंभीर आरोप है।

हिसार पुलिस के अनुसार, ज्योति ने तीन बार पाकिस्तान की यात्रा की दो बार सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ और एक बार करतारपुर साहिब कॉरिडोर के जरिए। इन यात्राओं के दौरान उनकी मुलाकात पाकिस्तानी हाई कमीशन के कर्मचारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई, जिसके साथ उनके गहरे संबंध बने। दानिश ने ज्योति को पाकिस्तानी खुफिया एजेंट्स अली अहसान और शाकिर उर्फ राणा शहबाज से मिलवाया।
जासूसी का जाल: सोशल मीडिया बना हथियार
ज्योति पर आरोप है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे वॉट्सएप, टेलीग्राम, और स्नैपचैट के जरिए पाकिस्तानी एजेंट्स के साथ संपर्क में थी। वह न केवल पाकिस्तान की सकारात्मक छवि को बढ़ावा दे रही थी, बल्कि भारत की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां भी साझा कर रही थी। पुलिस का कहना है कि ज्योति ने सुरक्षा एजेंसियों (security agencies) की निगरानी में रहते हुए भी यह गतिविधियां जारी रखीं।

2023 में ज्योति की पाकिस्तान यात्रा के बाद से ही भारतीय खुफिया एजेंसियों की उन पर नजर थी। इस दौरान, दानिश और अन्य एजेंट्स ने ज्योति को पाकिस्तान में आने-जाने और रहने की सुविधाएं प्रदान कीं। हैरानी की बात यह है कि ज्योति ने हाल ही में एक पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी के साथ इंडोनेशिया के बाली द्वीप की यात्रा भी की थी। यह खुलासा इस मामले को और भी गंभीर बनाता है।
दानिश का भारत से निष्कासन और ज्योति की भूमिका
13 मई 2025 को भारत सरकार ने एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश को जासूसी गतिविधियों (spying activities) में शामिल होने के कारण परसोना नॉन ग्राटा घोषित किया और उसे देश छोड़ने का आदेश दिया। दानिश के माध्यम से ज्योति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान की सकारात्मक छवि पेश करे और भारत विरोधी प्रचार को बढ़ावा दे। इसके लिए उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से आर्थिक मदद भी मिल रही थी।
ज्योति के पिता हरीश मल्होत्रा, जो बिजली निगम से रिटायर्ड हैं, ने बताया कि पुलिस ने उनके घर की तलाशी ली और मोबाइल, लैपटॉप, और बैंक पासबुक जब्त कर ली। उन्होंने कहा, “ज्योति ने बताया कि उसके पास कुछ भी गलत नहीं मिला। वह एक-दो बार पाकिस्तान गई थी और वहां की सहेलियों से बात करती थी।” हालांकि, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं।
हरियाणा और पंजाब में जासूसों की सघन जांच
ज्योति का मामला इस क्षेत्र में जासूसी गतिविधियों की एक बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। पिछले एक हफ्ते में हरियाणा और पंजाब से 6 अन्य संदिग्ध जासूसों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें नूंह के अरमान, पानीपत के नोमान इलाही, कैथल के देविंदर सिंह, और पंजाब के मालेरकोटला से गजाला और यामीन मोहम्मद शामिल हैं।
नूंह के अरमान पर आरोप है कि उसने पाकिस्तानी एजेंट्स को भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराए और 2025 में डिफेंस एक्सपो की साइट का दौरा किया। पानीपत के नोमान ने आईएसआई (ISI) के हैंडलर इकबाल उर्फ काना के लिए मुखबिरी की और संवेदनशील स्थानों की जानकारी भेजी। कैथल के देविंदर सिंह को एक युवती ने हनीट्रैप में फंसाकर जासूसी के लिए तैयार किया। पंजाब की गजाला ने दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के एक अधिकारी से मिलकर भारत विरोधी जानकारी साझा की, जबकि यामीन मोहम्मद भी उसका सहयोगी था।
गुजरात में भी जासूसी का खुलासा
गुजरात एटीएस ने जालंधर से मोहम्मद मुर्तजा अली को गिरफ्तार किया, जो बिहार का रहने वाला है। मुर्तजा ने भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान एक ऐप बनाया, जिसके जरिए वह भारतीय न्यूज चैनलों का डेटा और आंतरिक हालातों की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। उसके बैंक खाते में 40 लाख रुपये की संदिग्ध लेन-देन का पता चला, जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाता है।
जासूसी का यह जाल कैसे काम करता है?
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया और हनीट्रैप जैसी रणनीतियों का इस्तेमाल कर भारत में जासूसों का नेटवर्क तैयार कर रही हैं। ज्योति जैसे लोग, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, इनके लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं। हनीट्रैप (honeytrap) और आर्थिक लालच के जरिए संवेदनशील जानकारी हासिल की जाती है। यह नेटवर्क न केवल भारत की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि राष्ट्रीय एकता को भी प्रभावित कर सकता है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं। ज्योति और अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी से यह साफ है कि सरकार इस खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
ज्योति मल्होत्रा और अन्य संदिग्धों के खिलाफ जांच जारी है। केंद्रीय एजेंसियां इस नेटवर्क के और भी सदस्यों का पता लगाने में जुटी हैं। यह मामला भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल बना सकता है। साथ ही, यह सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों के लिए एक चेतावनी है कि उनकी गतिविधियां न केवल उनकी निजी जिंदगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकती हैं।
सामाजिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी चिंताजनक हैं। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने जहां लोगों को अवसर दिए हैं, वहीं यह गलत हाथों में पड़ने पर खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि युवाओं को ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतनी चाहिए और संदिग्ध संपर्कों से दूरी बनानी चाहिए।













