Bribery case Haryana: Excise officer and driver sentenced to four years in jail, know the whole matter: (हरियाणा भ्रष्टाचार केस सजा 2025) में गुरुग्राम की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अदालत ने दो सरकारी कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। मामले में आबकारी एवं कराधान विभाग के तत्कालीन निरीक्षक अनिल कौशिक को तीन साल की सजा और ₹15,000 का जुर्माना लगा है। वहीं विभाग के ड्राइवर संदीप मलिक को चार साल की जेल और समान जुर्माना का आदेश दिया गया है (Gurugram court corruption case)।
यह कार्रवाई भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो गुरुग्राम द्वारा की गई थी, जिसमें आरोपियों पर रिश्वत मांगने और लेने के गंभीर आरोप साबित हुए।
शिकायतकर्ता की कहानी: 25 हजार माहवारी रिश्वत की मांग Bribery case Haryana
शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी में सुपरवाइज़र के तौर पर कार्यरत थे, जिनका कार्य घरेलू सामान की शिफ्टिंग से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार सामान से भरी गाड़ी को सेल्स टैक्स विभाग के अधिकारी परेशान करते थे।
इसी दौरान संदीप मलिक, ड्राइवर पद पर कार्यरत, ने उनसे संपर्क किया और ₹25,000 महीने की रिश्वत की मांग रखी। उसने दावा किया कि वह यह रकम ऊपर अधिकारियों तक पहुंचाता है और कुछ हिस्सा स्वयं रखता है (bribery demand by officer)।
राज्य सतर्कता ब्यूरो ने तत्काल कार्रवाई की और आरोपी संदीप को शिकायतकर्ता से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया (bribery caught red-handed)। उसके खिलाफ केस दर्ज कर IPC की धारा 7 PC Act 1988 के अंतर्गत मुकदमा चलाया गया।
न्यायिक प्रक्रिया और अंतिम फैसला
इस मामले में दो साल तक चली सुनवाई के बाद दिसंबर 2020 में चालान कोर्ट में पेश किया गया। न्यायालय ने सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट रूप से दोनों आरोपियों को दोषी पाया।
(corruption punishment India) के तहत अब इन दोनों कर्मचारियों को सरकारी सेवा में रहते हुए किए गए गलत कार्यों की सजा मिल चुकी है। यह फैसला आम जनता को न्याय की भावना और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता का भरोसा देता है।
सरकारी पदों पर बैठे लोग अगर भ्रष्ट आचरण करते हैं, तो सख्त कानून और त्वरित कार्यवाही से उन्हें सजा मिल सकती है—यह संदेश यह फैसला देता है।













