Chandigarh Crime Ex-serviceman swindles Rs 86 lakh from people by promising them share in petrol pump: चंडीगढ़ में 21 मई 2025 को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने विश्वास और रिश्तों की नींव को हिलाकर रख दिया। एक पूर्व सैनिक ने पेट्रोल पंप में हिस्सेदारी (Petrol Pump Partnership) का लालच देकर एक परिवार से 86 लाख रुपये हड़प लिए। जब पीड़ित ने अपने पैसे और हिस्सेदारी का हिसाब मांगा, तो आरोपी का व्यवहार बदल गया और उसने धमकियां देनी शुरू कर दीं। चंडीगढ़ में धोखाधड़ी 2025 (Chandigarh Fraud Case) का यह मामला अब पुलिस की जांच के दायरे में है, और चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी (Fraud and Threats) की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। आइए, इस सनसनीखेज घटना की पूरी कहानी जानते हैं और समझते हैं कि यह समाज के लिए क्या सबक देती है।
Chandigarh Crime: चंडीगढ़ में धोखाधड़ी
चंडीगढ़ के सेक्टर-22ए निवासी अभिषेक तक्षक ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनके भाई अभिनव तक्षक, जो महेंद्रगढ़ में रहते हैं, की शादी पूर्व सैनिक बलवंत सिंह की बेटी उषा सहरावत से हुई है। वर्ष 2018 में बलवंत सिंह ने उनके पिता बलवंत तक्षक से संपर्क किया और कहा कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने पूर्व सैनिक कोटे में पेट्रोल पंप के लिए आवेदन मांगे हैं। उसने दावा किया कि वह इस कोटे के लिए पात्र है, लेकिन उसके पास निवेश के लिए पर्याप्त धन नहीं है। इस झांसे में आकर परिवार ने बलवंत सिंह पर भरोसा कर लिया, जो बाद में विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) का कारण बना।
पेट्रोल पंप का लालच, 86 लाख का निवेश
बलवंत सिंह और उनकी पत्नी संत्रा देवी ने पेट्रोल पंप को एक लाभदायक सौदा बताते हुए तीन साल में एक करोड़ रुपये निवेश करने का आग्रह किया। शुरुआत में बलवंत तक्षक ने इनकार किया, लेकिन पारिवारिक रिश्तों के कारण भरोसा करते हुए उन्होंने अलग-अलग किस्तों में 86 लाख रुपये बलवंत सिंह को दे दिए। बलवंत के साले राजा राम ने भी इस सौदे की गारंटी दी और 23 लाख रुपये की जमीन लीज पर दिलाई। पहले सिरोहिभाली गांव की जमीन 9 हजार रुपये मासिक किराए पर 30 साल के लिए ली गई, लेकिन जब वह जमीन अधिगृहीत हो गई, तो दूसरी जमीन 18 हजार रुपये मासिक किराए पर ली गई। इस तरह, परिवार को विश्वास दिलाया गया कि उनका निवेश सुरक्षित है।
हिस्सेदारी का वादा
पेट्रोल पंप ‘सैनिक फिलिंग स्टेशन’ के नाम से शुरू हो गया, लेकिन बलवंत सिंह ने 49 प्रतिशत हिस्सेदारी (Petrol Pump Partnership) देने का वादा तो किया, पर कोई लिखित दस्तावेज नहीं दिया। उसने शर्त रखी कि पहले बैंक का 25 लाख रुपये का लोन चुकाना होगा। इसके लिए बलवंत तक्षक ने 10 लाख रुपये नकद दिए, और बाकी 15.60 लाख रुपये बलवंत सिंह ने पेट्रोल पंप के खातों से निकाल लिए। जब और रकम मांगी गई और पीड़ित ने हिसाब मांगा, तो बलवंत सिंह नाराज हो गया और उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया। उसने धमकियां (Fraud and Threats) देनी शुरू कर दीं, जिससे परिवार सदमे में आ गया।
धोखाधड़ी और धमकी का केस
पीड़ित की शिकायत पर चंडीगढ़ के सेक्टर-17 थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बलवंत सिंह, उनकी पत्नी संत्रा देवी, साले राजा राम, और बेटी उषा सहरावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 406 (विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश), और 506 (धमकी) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। यह कार्रवाई न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कानून धोखाधड़ी (Fraud and Threats) के खिलाफ सख्ती से काम करता है।
चंडीगढ़ में धोखाधड़ी 2025 (Chandigarh Fraud Case) का यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। रिश्तों और विश्वास के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए सावधानी बरतना जरूरी है। किसी भी बड़े निवेश से पहले लिखित दस्तावेज और कानूनी सलाह लेना अनिवार्य है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी आकर्षक सौदे के झांसे में आने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। इसके अलावा, परिवारों को अपने बच्चों और बुजुर्गों को ऐसी योजनाओं के प्रति जागरूक करना चाहिए। स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संगठनों को भी जागरूकता अभियान (Awareness Campaigns) चलाने चाहिए ताकि लोग इस तरह के अपराधों से बच सकें।













