female feticide, Strictness on female feticide in Haryana: Improvement in sex ratio through smart steps: हरियाणा में लिंगानुपात को बेहतर बनाने और कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने हाल ही में सभी उपायुक्तों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान (Beti Bachao Beti Padhao) को और मजबूत करने के लिए ठोस कदमों पर चर्चा हुई। जिला स्तरीय स्थायी समितियों के गठन से लेकर एमटीपी किट की अवैध बिक्री पर रोक तक, सरकार का हर कदम इस दिशा में बदलाव लाने का संकल्प दिखाता है। आइए, इस पहल की पूरी कहानी और इसके प्रभाव को समझते हैं।
कन्या भ्रूण हत्या पर सख्ती: जिला स्तरीय समितियों का गठन female feticide
हरियाणा सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) को रोकने के लिए जिला स्तर पर स्थायी समितियों का गठन किया है। इन समितियों की अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे, जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य निगरानी को मजबूत करना, नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना, और लिंगानुपात (sex ratio) में सुधार लाना है।
समितियों को हर सप्ताह बैठक करने, एमटीपी किट की बिक्री, अल्ट्रासाउंड केंद्रों, और गर्भपात केंद्रों की नियमित जांच करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। यह कदम न केवल कानूनी कार्रवाई को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ाएगा।
एमटीपी किट की अवैध बिक्री पर नकेल
अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने साफ किया कि अवैध गर्भपात (illegal abortion) एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, जिसके लिए सरकार और समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि उनके जिलों में एमटीपी किट की अवैध बिक्री को पूरी तरह रोका जाए।
इसके लिए नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई को अनिवार्य किया गया है। अगर कोई डॉक्टर लिंग निर्धारण (sex determination) जैसी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और हरियाणा मेडिकल काउंसिल द्वारा उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। यह कदम अवैध गर्भपात को रोकने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
गर्भपात की गहन जांच और निगरानी
सरकार ने 12 सप्ताह से अधिक के सभी गर्भपातों की गहन जांच का आदेश दिया है, खासकर उन मामलों में जहां दंपति के पास पहले से एक या अधिक बेटियां हैं। सिविल सर्जनों को इन जांचों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, और उन्हें संदिग्ध एमटीपी मामलों को ट्रैक करने और कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा, 10 सप्ताह से पहले हर गर्भावस्था का एएनसी पंजीकरण (ANC registration) अनिवार्य किया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि गर्भावस्था की शुरुआत से ही निगरानी हो और कोई भी गैरकानूनी गतिविधि न हो। इन कदमों से कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नई भूमिका
हरियाणा सरकार ने एक अनूठा कदम उठाते हुए एक या अधिक बेटियों वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी के लिए आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘सहेली’ के रूप में नियुक्त किया है। ये कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को परामर्श देंगी और उनकी गर्भावस्था की निगरानी करेंगी।
सिविल सर्जन इन महिलाओं और उनकी सहेलियों का रिकॉर्ड रखेंगे। अगर किसी मामले में गर्भपात होता है, तो संबंधित आशा या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह पहल न केवल गर्भवती महिलाओं को भावनात्मक समर्थन देगी, बल्कि कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) को रोकने में भी मदद करेगी।
समाज और सरकार का साझा प्रयास
कन्या भ्रूण हत्या और लिंग निर्धारण जैसी प्रथाएं समाज के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। हर bedrejdraiyana सरकार इन प्रथाओं को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान (Beti Bachao Beti Padhao) के तहत जागरूकता कार्यक्रमों को और तेज किया जा रहा है।
लोगों को चाहिए कि वे लिंग भेदभाव की मानसिकता को छोड़ें और बेटियों को बेटों के समान सम्मान दें। अगर आपको अपने आसपास अवैध गर्भपात या लिंग निर्धारण की कोई गतिविधि दिखे, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य विभाग या पुलिस को सूचित करें। आपका यह कदम एक बेटी की जान बचा सकता है।
हरियाणा का भविष्य: बेटियों के साथ
हरियाणा सरकार की यह पहल न केवल कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) को रोकने में मदद करेगी, बल्कि यह लिंगानुपात (sex ratio) को बेहतर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिला स्तरीय समितियों, सख्त निगरानी, और सामुदायिक भागीदारी के साथ हरियाणा एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां बेटियां सुरक्षित हों और उन्हें बराबरी का हक मिले। यह समय है कि हम सब मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनें और बेटियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित हरियाणा बनाएं।













